विवशता है मोदी जी कि आपके नाम पर बगुला भगतों को भुगतना पड़ रहा है

तो एक काम करो अगली बार कांग्रेस को ले आओ

तुम देशद्रोही हो, सवाल करते हो, भक्त को सवाल नहीं करना चाहिए

देश का विकास हो रहा लेकिन हिन्दुत्ववादियों को तो बस मारकाट ही चाहिए

राहुल गांधी को बना दो ना प्रधानमंत्री

मत देना वोट, तुम्हारा वोट नहीं मिलेगा तो क्या भाजपा नहीं जीतेगी

ऊपर लिखे वाक्य ‘तानों’ के रूप में उन लोगों को सुनाए जाते हैं जो मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल करते हैं.

सवाल करने वाले कांग्रेसी नहीं है, मोदी समर्थक ही हैं, भाजपा के परंपरागत वोटर हैं. अटल जी के समय से भाजपा को वोट करते हैं.

कहा जाता है जनता-जनार्दन सर्वोपरि होती है लेकिन 2014 से वो ‘भक्त’ बनी बैठी है. वो भक्त बनी है आपकी कार्यशैली से, आपके व्यक्तित्व से और सबसे महत्वपूर्ण आपकी ‘हिंदुत्व के संरक्षक’ की छवि से. वह अभी और भक्त बनी रहेगी इसमें संदेह है.

नोटबंदी के दंड को कतारों में लगकर ‘उत्सव’ इन्ही भक्तों ने बनाया था. उल्लास से भरे चेहरे याद हैं ना आपको. कतार में खड़े होकर गर्व से कहते थे ‘मैं देश निर्माण में सहयोग कर रहा हूँ’.

जीएसटी लागू हुआ तो इन्ही भक्तों ने माथे पर बिना शिकन लाए महंगा सामान ख़रीदा, महंगा खाना खाया. जबकि जीएसटी के कारण भक्तों की जेब से अधिक पैसा निकल रहा था. वह हर निर्णय में आपके साथ खड़ा रहा है.

कुछ घोर भाजपाई आरोप लगाते हैं कि कुछ लोगों के ‘निजी कार्य’ नहीं हो रहे इसलिए मोदी बुरा लगता है. मेरे ख्याल में मोदी सरकार को पिछले तीन साल में केवल और केवल हिंदुत्व के मुद्दे पर ही घेरा गया है.

आम वोटर भी जानता है कि आर्थिक सुधार के परिणाम जल्दी नहीं आएँगे इसलिए वह भरोसा कर रहा है. आपकी विकास नीतियों पर से उसका विश्वास कतई नहीं डिगा है न आपके ईमानदार होने पर वह संशय कर रहा है.

उसे तकलीफ है अन्य भाजपा नेताओं से, उनके व्यवहार से. राजस्थान और मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण चरम पर है.

एक तरफ हम मोदी के जरिये नए भारत का उदय देख रहे हैं लेकिन अपने प्रदेशों में भाजपा का नैतिक पतन भी देख रहे हैं. देश सुधारने का मोदी-हठ देख रहे हैं तो अन्य भाजपा नेताओं का मुस्लिम तुष्टिकरण भी देख रहे हैं.

भक्त इसी विरोधाभास का सामना कर रहा है. वह ये जानना चाहता है कि क्या 2019 के नए भारत में हमें ‘मध्यप्रदेश-राजस्थान’ की कालिख भी ले जानी होगी.

देश अब भी प्रतीक्षारत है कि नोटबंदी के असली अपराधियों को जेल कब भेजा जाएगा. हमारा खून खौलता है ये जानकर कि जिन धनिक लोगों ने गरीबों को कतार में लगाकर अपना धन सफ़ेद करवाया, वे अब भी मस्ती में हैं.

आपने कहा था ‘सहन नहीं करेंगे’ और यहाँ तो 2018 शुरू भी हो चुका. इस देश में आज तक ऐसा प्रधान नहीं हुआ है जिसके लिए जनता की ऐसी दीवानगी देखी गई है. इस आदमी के प्रति भारत आज भी आशान्वित है लेकिन इसके आसपास धूर्तों के डेरा है. इन्ही धूर्तों के ‘धूर्त चेले’ अब सवाल करने पर कांग्रेस को वोट देने की भभकी देने लगे हैं.

आज भी दावे से कहता हूँ कि यदि पीछे मोदी न खड़ा हो तो भाजपा में स्पष्ट बहुमत लाने की औकात नहीं है. देशवासियों के ‘प्यार’ को सभी भाजपाई अपने लिए भुनाते हैं जबकि प्रेम तो केवल मोदी के लिए है. इनके लिए मोदी ‘पच्चीस सभाएं करने वाला बैल है’, जो इन्हें सत्ता दिला दे और फिर ये अपनी दुकानदारी चलाते रहे.

मोदी के ‘ओज’ को भाजपाई गलती से पार्टी की ताकत समझ बैठे हैं. विवशता है मोदी जी कि आपके नाम पर इन बगुला भगतों को देश सहन करता है.

अंत में यही कहना चाहूंगा कि अत्यधिक दंभ में भरे अपने नेताओं को समझाइश देने का समय है. अपने समर्थकों को सवाल पूछने पर ताने देना बंद कर दे भाजपाई नहीं तो गुजरात बार-बार दोहराया जाएगा. मध्यप्रदेश में नैया डगमगा रही है और ऐसे ही भक्तों का निरादर चलता रहा तो ये अखंड गढ़ ‘खंड-खंड’ हो सकता है.

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