आज के ‘ये’ दलित सबसे बड़े ब्राह्मण वादी और मनुवादी

भीमा कोरेगांव की घटना के बाद तथाकथित दलितों ने फिर से victim card play करना शुरू कर दिया है.

ये दलित हमेशा ब्राह्मण, ब्राह्मणवाद और मनुवाद का रोना रोते है और अपनी खुद की पैदा की गई समस्याओं के लिए मनुस्मृति और ब्राह्मणों को दोष देते हैं.

जबकि जमीनी हकीकत इस से इतर है.

ज़मीनी हक़ीक़त ये है कि जो व्यवहार एक ब्राह्मण एक चमार से करता है, ठीक वही व्यवहार एक चमार एक मुसहर से करता है.

जितनी तीव्रता से ब्राह्मण चमार को दुत्कारता है उसकी 100 गुणा ज़्यादा तीव्रता से चमार मुसहर को दुत्कारता है.

ब्राह्मण के लिए चमार अछूत है तो उसी चमार के लिए मुसहर अछूत है.

ब्राह्मण जाति व्यवस्था में खुद को सबसे श्रेष्ठ मानता है तो चमार भी दलितों में खुद को सबसे श्रेष्ठ मानता है.

दलित हर जगह ये बताते फिरते हैं कि ब्राह्मण किस तरह सभी मलाईदार पदों पर जमे हुए हैं. ठीक उसी तरह दलितों में सबके हिस्से की सबसे ज्यादा मलाई चमार खा रहे हैं.

कुल पदों में यदि ब्राह्मणों का प्रतिशत ज़्यादा है तो उसी तरह दलितों के पास कुल पदों में तो चमारों ने अकेले सभी दलितों के हक़ पर कब्जा जमा रखा है.

आज यदि दलितों SC-ST के 100 पद है तो उनमे से 90 पर चमार काबिज हैं.

दलितों में ब्राह्मणत्व चमारों के हाथ मे हैं.

दलितों में भी एक क्रीमी लेयर है जिसपर चमार काबिज हैं.

मैंने सोशल मीडिया पर सक्रिय 100 से ज़्यादा दलितों को उदयन के बारे में बताया. उनको उदयन की पूरी कार्य योजना समझाई. उनको अपने यहां आमंत्रित किया. उनसे कहा कि आप अपनी वाल पर उदयन को promote कीजिये.

कभी किसी ने नहीं किया. आज तक कभी कोई दलित हितचिंतक उदयन में देखने ताकने नहीं आया. आज तक कभी किसी दलित हित चिंतक ने उदयन की प्रशंसा में दो शब्द नहीं लिखे.

हमारे दलित हित चिंतक टीना धाबी जैसे मलाईखोर दलितों की हित चिंता में मरे जाते हैं पर गांव में असली दलित की फिक्र किसी ने नहीं की.

कड़वी हक़ीक़त ये है कि आज गांव में मुसहर से जितनी नफरत ठाकुर बाभन करते हैं, उस से ज़्यादा नफरत हिकारत चमारों के मन में है.

मेरे गांव में किसी काज प्रयोजन में कोई दलित, चमार हरिजन किसी मुसहर को आमंत्रित नहीं करता. मुसहर बस्ती में जब कोई काज प्रयोजन होता है तो कोई दलित हरिजन उसमें शामिल नहीं होता…

दलितों को ये ब्राह्मणवाद और मनुवाद का फटा हुआ ढोल पीटना बंद कर देना चाहिए. सबसे बड़े ब्राह्मण वादी और मनुवादी आज के ये चमार दलित हैं…

आज वो समय आ गया है कि अब मुसहरों को दलितों की इस क्रीमी लेयर के खिलाफ खड़े होना चाहिए. अब मनुस्मृति नहीं बल्कि अम्बेडकर स्मृति जलाने की ज़रूरत है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY