कौवा विश्व का सर्वाधिक पुराना वामपंथी

विश्व का सर्वाधिक पुराना वामपंथी कौन है, आप को पता है?

पहले ही कह दूं कि यह वामपंथी से साधर्म्य रखता है. मनुष्य नहीं है, लेकिन प्रकृति का निर्मित वामपंथी है. कौन है यह?

चलिये, बता ही देता हूँ. वो है कौवा. अब आप पूछेंगे कि क्या समानता है कौवे और वामपंथी में, तो निराकरण प्रस्तुत है.

कौवा गन्दगी को ढूँढता है, उस पर बैठकर आवाज लगता है. तब बाकी कौवे भी आ जाते हैं, और उनकी कांय कांय से हमें या तो पता चलता है कि वहां कुछ गन्दा है.

या अगर हमने जान बूझ कर उसे दुर्लक्षित किया हो तो उसके तरफ ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है.

कौवे का यह गुण है कि वो उस गंद को खा जाता है, वामपंथी उसे सुधारता नहीं, बस आप को गालियाँ देने का उसे यह एक साधन मिल जाता है.

वो आपका दिमाग खाता रहेगा और मीडिया को बुलाकर भाव खाता रहेगा. उस समस्या का कायम रहना उस के लिए आजीविका का साधन बन जाता है.

श्राद्ध में भी कौवे की भूमिका अहम् होती है. आपकी सभी समस्याओं का कारण आपके पितर बताये जाते हैं. उनका दूत बनकर कौवा आता है. खा कर चला जाता है, आप समस्या के निराकरण की राह तकते रहते हैं, अगले श्राद्ध तक.

वैसे ये कामगार, शोषित, पीड़ित, वंचित आदि के प्रतिनिधि बन कर आते हैं. अगला हाल आप भी जानते ही होंगे.

अधमरा चूहा वगैरह दिखे तो कौवे उस पर टूट पड़ते हैं, चोंच मार-मार कर मार डालते हैं. दुर्बल और मौन सरकार के साथ वामपंथियों का चलन कुछ अलग होता है क्या?

कौवों में ज़ोरदार भ्रातृभाव पाया जाता है. इक्का दुक्का चील को झुण्ड बना कर परेशान कर के खदेड़ते कौवे हर किसी ने देखे होंगे.

कौवे छायादार पेड़ों में कॉलोनी बनाकर रहते हैं. कोई कोकिला या उल्लू भटका तो उस से कैसे सब एक हो कर खदेड़ते हैं यह भी शायद देखा होगा आप ने. वैसे ही वाम पंथी.

कांफ्रेंस में कोई विरोधी खेमे का मिल गया तो उसकी कैसे घेराबंदी करते हैं आप में से कोई जानते होंगे. कॉलेज, विद्यापीठ और मीडिया इनकी कॉलोनियां होती हैं.

वैसे कौवों में भी अन्तर्विरोध होता है. खूंखार भी होता है. इन में भी अलग नहीं. लेकिन शत्रु के विरोध में हम सब एक.

कौवे दीर्घद्वेषी होते हैं ऐसी मान्यता है. वैसे ही वामपंथी भी. अनुभवित है.

अब इतने तथ्य तो सहज याद आये. कुछ आप को भी याद आये तो जोड़ दीजियेगा. और हां, इतनी समानताओं के चलते COMMUNISM का स्पेलिंग CAWMMUNISM किया जाए ऐसा मेरा ईमानदार सुझाव है.

वैसे आप वामपंथी की जगह पर आपिया लिखना चाहें तो आप का दोष नहीं है. किसी भी बुद्धिमान मनुष्य को यह खयाल आये यह उसकी बुद्धि अभी भी जिन्दा होने की निशानी है. बधाई हो.

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