आज संतूर उदास है

कई बार लोकप्रिय गीतों को सुनते समय ‘अंतरों’ में प्रयोग हुए ‘म्यूजिकल पीस’ मन को छू जाते हैं. कोई गिटार की धुन, कोई सितार का पीस, कोई संतूर का टुकड़ा. उन्हें सुनते समय ये विचार आता है कि ऐसे विलक्षण वादकों के बारे में हम जान पाते. ये वो छुपे हुए कलाकार हैं जिनके बगैर गीत यात्रा कर दूसरे अंतरे तक नहीं पहुँच सकता.

इन वादकों का नाम कहीं नहीं लिया जाता. ये किसी बादशाह महाराजा के कीमती सिंहासन में जड़े छोटे-छोटे माणिक्य हैं, जो यथाशक्ति सिंहासन की सुंदरता बढ़ाते हैं लेकिन उनको सिंहासन जैसा मान कभी नहीं मिलता.

ऐसे ही एक पहुंचे हुए कलाकार उल्हास बापट, जिनका साथ राहुल देव बर्मन के साथ ‘1942 ए लव स्टोरी’ तक बना रहा. उनके सैकड़ों गीतों में उल्हास बापट के बजाए संतूर के टुकड़े ‘अंतरों’ के बीच बह रहे हैं. उल्हास केवल फिल्मों के लिए वादन नहीं करते थे बल्कि लाइव कार्यक्रमों में श्रोताओं को समाधिस्थ कर देने की क्षमता रखते थे.

प्रशंसकों के लिए वे ‘संतूर का कर्ण मधुर नाद’ हैं. पंचम के गीत उनके बिना पूरे नहीं हो सकते थे इसलिए उल्हास आखिर तक पंचम के साथ बने रहे. आइये अब उनको पंचम के कुछ गीतों में खोजते हैं.

1942 ए लव स्टोरी (कविता कृष्णमूर्ति)

‘क्यों नए लग रहे हैं ये धरती गगन’ की शुरुआत सारंगी की मासूम धुन से होती है. इसके बाद मंदिरों की घंटियों की ध्वनि. यही उल्हास बापट संतूर लिए तैयार हैं. उनका एक ‘पीस’ गीत को आवश्यक गति और ऊंचाई प्रदान करता है.

नमकीन (किशोर कुमार)

‘राह पे रहते हैं, यादों में बसर करते हैं’ गीत में उल्हास बापट के संतूर का एक ‘टुकड़ा’ निरंतर अंतरों के बीच थिरकता रहता है. जरा शिद्द्त से उस टुकड़े की अहमियत महसूस कीजिये. इस ‘यात्रा गीत’ को आवश्यक गति इसी टुकड़े से मिलती है.

इज़ाज़त ( आशा भोंसले)

यहाँ भी उल्हास बापट के हस्ताक्षर पढ़ लीजिये. ‘मेरा कुछ सामान, तुम्हारे पास पड़ा है’. इसमें एक लाइन ‘पतझड़ है कुछ, है ना’ के बाद उल्हास ने एक लंबा पीस बजाया है. जैसे ‘मेजराब’ की टंकार से फिसलकर सुर चले आ रहे हैं, इस अनगढ़ गीत की पतवार बनने के लिए.

आज राहुल देव बर्मन की पुण्यतिथि है. आज ही के दिन वे चले गए थे और आज ही के दिन उल्हास बापट भी जा चुके हैं. अब से कुछ घंटे पूर्व 67 साल की आयु में उल्हास का निधन हो गया. उन्हें पंचम से अत्याधिक प्रेम था सो दुनिया से जाने के लिए भी उनका ही दिन चुन लिया. एक गीत बनाया था उन्होंने पंचम पर. उस गीत में भी पंचम ही पंचम है. ऐसे महान कलाकार के जाने से आज ‘संतूर’ भी उदास होगा. नमन है आपको उल्हास

‘सुर में ताल में, गीतों के बोल में तेरी ही याद है, पंचम,
तेरे गीतों की शान से दुनिया जवान है, पंचम’

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