थैंक यू खेजड़ीबाल… आई लव यू

हमारे एक राम जी भैया हैं… सैदपुर के भाई राम जी सिंह उदयन

बड़े ही उच्च कोटि के साहित्यकार और कवि… उन्होंने बहुत पहले एक बार एक कवि सम्मेलन कराया था जखनियाँ में.

तब मैंने जाना कि बड़े उच्च कोटि के कवि भी कवि सम्मेलनों में 500 रूपए पर कविता पढ़ देते थे उन दिनों.

और मैं ये कोई 1930 या 40 की बात नहीं कर रहा हूँ बल्कि 2004 के आस पास की… और बहुत से कवि तो ऐसे थे जो 100 या 200 रूपए के लिए भी आयोजक को तेल लगाते थे.

तब मुझे है कवियों का रेट कार्ड पढ़ के बहुत आश्चर्य हुआ था और दया भी आई थी.

आश्चर्य इसलिए हुआ कि उन दिनों मैं जालंधर की हरिवल्लभ संगीत महासभा से जुड़ा हुआ था…

और एकदम नए नकोर नौसिखिए बच्चे भी 1994 में शास्त्रीय संगीत की एक प्रस्तुति के लिए 20 – 25,000 रूपए मांगते थे और थोड़े से ठीक ठाक गवैये भी 60 – 70 हज़ार से नीचे बात नहीं करते थे.

मैंने इसका कारण जानने समझने की कोशिश की तो ये जाना कि कवि सम्मेलन में कविता तो आप किसी से भी लिखवा के पढ़ सकते हैं.

मैंने खुद बहुत से लोगों को रामजी भाई की कविताएं मंच से पढ़ते सुना है. अपने नाम से अख़बारों और पत्रिकाओं में छपवाते देखा है.

बहुत से पुराने खलीफा किस्म के कवि तो खूबसूरत लड़कियों को छांट के उनको कविता लिख के देते और वे सब चेहरा पोत के ओंठ लाली लिपस्टिक लगा के उसे मंच से पढ़ देतीं.

ऐसी सैकड़ों फुलझड़ी किस्म की कवयित्रियाँ आज भी मंचों पर सक्रिय हैं जो किसी दूसरे कवि की कविता खाली लटके झटके से गा के मंच से वाहवाही लूटती आज स्टार बनी घूम रही हैं.

वो अमरमणि फेम मधुमिता भी ऐसी ही फुलझड़ी छाप कवयित्री थीं…

सो हमको ये समझ आया कि इस कविता कहानी में बड़ा झोल है और मिलावट की बहुत संभावना है, जबकि शास्त्रीय संगीत का गवैया तो एक मिनट क्या कहा बल्कि 3 सेकंड में धरा जाएगा अगर नकली होगा…

हरिवल्लभ के मंच से तो मैंने कई बार देखा जब कि आयोजकों ने नकली या अनाड़ी नौसिखिए गायक वादक को बीच प्रस्तुति में रोक के मंच से उतार दिया कि तुम रहन दो बेटा… तुमसे न हो पायेगा.

तो मुझे ये कविता-कहानी वाले शुरू दिन से ही बहुत संदिग्ध लगते थे… पर सबसे ज़्यादा अत्याचार तो तब हुआ जब हमारे राष्ट्र कवि कमर-22 जी आम अमरूत पाल्टी के नेता हो गए.

फिर इनकी बातचीत भाजपा में आने की होने लगी… मैंने तो तभी कह दिया था कि अगर ये पाल्टी में आ गया तो मैं तो या तो जनेऊ से लटक के खुदकुशी कर लूंगा या फिर अगर ये भाजपा में आ गया तो मैं आम अमरूत पाल्टी में कूद जाऊंगा.

बहरहाल, ज़िंदगी में पहली बार, खेजड़ीबाल ने देश पर भोत बड़ा उपकार किया जो इस कमर-22 को राज्यसभा में नहीं भेजा… थैंक यू खेजड़ीबाल… आई लव यू.

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