आशु उवाच : होली शिट

शिट तीन प्रकार की होती हैं.
१- ओह शिट
२- डीप शिट
३- होली शिट
दरसल ये होती शिट ही हैं, किंतु परिस्थितियों के अनुसार इनके प्रति प्राणी के भाव बदलते जाते हैं.

कैसे ?

एक चील पहाड़ की चोटी पर बैठा हुआ चमकते हुए सूर्य को देख रहा था. उसे सूर्य का सबसे ऊपर होना अखर रहा था. उसने अपने पंखों को फड़फड़ा कर देखा तो पाया कि वह चाहे तो सूर्य तक पहुँच कर अपनी चोंच से सूर्य में छेद कर सकता है.

चील अपनी ऊँची उड़ान के कारण पक्षियों का राजा बन बैठा था, वह अन्य पक्षियों को हेय दृष्टि से देखता था. इससे सभी पक्षी असंतुष्ट थे किंतु चील राजा के भय से कुछ ना कहते, किंतु तोतों ने सोच लिया था कि राजा साब का कुछ इंतज़ाम करना पड़ेगा.

तोते ताड़ू होते हैं वे ताड़ गए कि राजा साब सूर्य में छेद करना चाहते हैं! लेकिन नियम है कि जब तक राजा सलाह ना माँगे तब तक प्रजा को बोलना नहीं चाहिए, क्योंकि राजा सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन प्रजा उसका मन ताड़ गयी है ये उसे बिलकुल भी स्वीकार नहीं होता, राजा को सर्प्राइज़ करना अच्छा लगता है. सो तोते ताड़ने के बाद भी चुपचाप बैठे रहे.

अब चील राजा ने सगर्व सभा में नीचे बैठे हुए पक्षियों को देखा और मैना से पूछा- क्यों मैना ये सूरज कितनी दूरी पर होगा?

मैना ने हाथ जोड़ते हुए कहा- प्रभु सूरज राजा है और आप भी राजा हैं, तो राजा-राजा की आँख में आँख डालकर देख सकता है, किंतु हम जैसी प्रजा नहीं. भगवन, जिस पर राजा की आँखे लगी हों उसे प्रजा को नहीं देखना चाहिए. इसलिए हमने सूरज को आज तक नहीं देखा, अतः मैं कैसे बता सकती हूँ की सूरज कितनी दूर है?

मैना का जवाब सुनकर चील राजा प्रसन्न हो गया और उसने आह्लादित स्वर में तोते से पूछा- क्यों रट्टूराम तुम बता सकते हो हमसे सूरज की दूरी कितनी है?

तोते ने कहा- महाराज आपकी सदा जय हो, अपने राजा के होते हुए किसी दूसरे राजा को देखना घोर पाप की श्रेणी में आता है, इसलिए महाराज हमारी आँखे हों या आशाएँ सब आप पर ही लगी रहती हैं. सो, आपको देखकर मैं ये कह सकता हूँ कि सूरज कितनी ही दूर क्यों ना हो वह आपकी पकड़ में है, आपके पंख इतने विशाल हैं कि आप चाहें तो उसे अपने पंखों में लपेट सकते हैं, आप चाहें तो आपकी नुकीली चोंच उसमें छेद करके उसकी हवा निकाल सकते हैं, जिससे वो पल भर में बुझ जाएगा और धरती पर गिरेगा धड़ाम से. जिस दिन सूरज का आपसे पाला पड़ा उसकी सारी चमक धरी रह जाएगी सब तपना, तपाना भूल जाएगा. वो जानता है कि आप उसे अपने पंखों में समेट सकते हो इसलिए वह आपसे बहुत दूरी बनाकर रखता है.

तोते के मुँह से चील चालीसा सुनकर चील राजा मदहोशी में लहराने लगा और सूरज को पंखों में समेट कर उसे बुझा देने के लिए फुर्र से उड़ गया. जैसे-जैसे वह ऊपर उठता जाता उसका मद बढ़ता जाता और जैसे-जैसे मद बढ़ता वह और ऊपर उठता जाता. इसी चक्कर में वह अपनी अभी तक की सबसे ऊँची उड़ान की सीमा को भी पार कर गया, लेकिन सूरज अभी भी बहुत दूर था. अब उसके पंखों में जलन होने लगी थी, किंतु उसका अहंकार उसे ऊपर की ओर धकेल रहा था, अचानक उसके पंख झुलस गए और वह बहुत तेज़ी से धरती पर गिरा, चील राजा दर्द से कराह रहा था कि तभी एक गाय ने उसके ऊपर गोबर कर दिया अपने पर गोबर गिरा देख उसके मुँह से निकाला- ओह शिट!! ये पहली अवस्था है.

वह गोबर के ढेर में फसा हुआ बिलबिला रहा था, कि उसने देखा कि एक जंगली बिल्ली उसे लालच से देख रही है वह घबरा गया क्योंकि उसके पंख काम नहीं कर रहे थे उसे लगा कि वह अपंग हो गया है अब कभी वह उड़ नहीं पाएगा, आज इस बिल्ली के द्वारा वह मारा जाएगा तब रोते हुए उसके मुँह से निकला- आई ऐम इन अ डीप शिट! ओह गॉड प्लीज़ हेल्प मी.. यह दूसरी अवस्था है.

गोबर में लुथड़ने, अपनी अपंगता को, और जंगली बिल्ली को देखकर वह इसे अपने अपमान और अंत की पराकाष्ठा समझ रहा था, किंतु गोबर ने जादुई काम किया उसकी जलन ख़त्म हो गयी, उसके झुलसे हुए पंख ठीक होने लगे, जंगली बिल्ली ने बहुत सावधानी से उसके ऊपर से गोबर साफ़ किया, और उसे गोबर से बाहर निकाल दिया इसे देख चील राजा प्रसन्नता से चीख़ पड़ा- थैंक यू सो मच गॉड.. ओह, इट्स अ होली शिट! यह उसी शिट की तीसरी अवस्था है.

और तभी जंगली बिल्ली ने उसपर झपट्टा मार कर उसका काम तमाम कर दिया.

मॉरल ऑफ़ द स्टोरी

१- हर वो व्यक्ति जो हम पर शिट फेंकते हैं आवश्यक नहीं के वे हमारे शत्रु हों.
२- हर वो व्यक्ति जो हमें डीप शिट से निकालते हैं ज़रूरी नहीं कि वे हमारे मित्र हों.

– आशुतोष राणा

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