इनके पैरों की हड्डियाँ कैसे सलामत हैं? इनके गले से आवाज़ कैसे निकल रही है?

मैं फौज में जिस आर्मर्ड रेजिमेंट का आरएमओ था, वह भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट में से एक है. 200 साल से अधिक पुरानी.

1807 में उत्तर प्रदेश के एक कस्बे में यह रेजिमेंट पहली बार खड़ी की गई थी. तब यह रेजिमेंट किसी दूसरे नाम से थी.

इसे पहली बार टैक्स वसूलने के लिए एक घुड़सवार टुकड़ी के रूप में बनाया गया था.

बाद में इस रेजिमेंट ने दर्जनों लड़ाइयाँ दुनिया के कोने कोने में लड़ीं… हमारे बैटल ऑनर में विक्टोरिया क्रॉस तक शामिल था.

उस रेजिमेंट में एक स्क्वाड्रन राजपूत था, एक जाट और एक मुस्लिम. 1947 में उसकी मुस्लिम स्क्वाड्रन पाकिस्तान चली गयी और उसमें दो राजपूत और एक जाट स्क्वाड्रन हो गए.

रेजिमेंट के बाद के गौरवशाली इतिहास के बजाय इसकी शुरूआत को देखें तो यह मूलतः टैक्स वसूलने, या कहिए किसानों से उनकी फसल लूटने वाले घुड़सवार ही तो थे.

तो आप क्या कहेंगे?

कि जाटों और राजपूतों ने उत्तर प्रदेश में किसानों से उनकी फसल लूटी?

जलियांवाला बाग में गुरखा रेजिमेंट ने गोलियाँ चलाई थी…

तो आप क्या कहेंगे?

जलियांवाला बाग में गोलियाँ अंग्रेजों ने चलवाईं या गुरखा उसके जिम्मेवार हैं?

अंग्रेजों के भारत में शासन का चरित्र ही यही रहा है. उन्होंने कहीं गुरखा से सिखों पर गोलियाँ चलवाईं हैं, तो कहीं सिखों से जाटों पर, तो कहीं जाटों से किसी और पर.

अंग्रेजों ने हमें ही हमेशा हमारे खिलाफ इस्तेमाल किया है…

उन्होंने पूरे देश को इस गरीबी और लाचारी में झोंक दिया कि हमारे लोगों के पास उनकी नौकरी करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा. पर यह हमारी आपसी लड़ाई कभी नहीं थी.

पर यह तब की बात है… आज वे कौन से लोग हैं जो अंग्रेजों और भारतीयों के बीच की इस लड़ाई को मराठा बनाम महार की लड़ाई बता रहे हैं?

और वे लोग हमारे बीच कैसे हैं? उन्हें देश के मानस में यह ज़हर घोलने की आज़ादी कैसे मिली हुई है?

जब आपने उन्हें जेएनयू में भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाते रंगे हाथों पकड़ा था तो वे फिर कैसे बाहर आ गए?

आज़ाद कैसे घूम रहे हैं? उनके पैरों की हड्डियाँ कैसे सलामत हैं? उनके गले से आवाज़ कैसे निकल रही है?

यह किसकी गलती है? किसकी कमज़ोरी है? क्या आप इतने भोले हैं कि यह होगा आपको पता नहीं था?

आप क्या स्कूल के हेडमास्टर हैं जो बच्चों को पकड़ के, डाँट डपट के छोड़ दिया, कान पकड़ के बेंच पर खड़ा कर दिया और उम्मीद करते हैं कि वे सुधर जाएंगे… फिर कोई शरारत नहीं करेंगे? आप देश चला रहे हैं या किंडरगार्टन स्कूल?

पुणे में जो हो रहा है वह देशद्रोह है… और वह पहली बार या बिना किसी चेतावनी के नहीं हो रहा है…

मेरा सीधा सीधा प्रश्न अपनी चुनी हुई ‘राष्ट्रवादी’ सरकार से है – देशद्रोह की सजा क्या होनी चाहिए?

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