तो क्या मोदी हिन्दुत्व की लाइन पर नहीं हैं?

कुछ हिन्दुओं ने मोदी को सिर्फ इसलिए वोट देकर प्रधानमंत्री बनाया था कि मोदी जी हिन्दुत्व के रास्ते पर चलेंगे…

और पाँच साल के अपने कार्यकाल में कुछ ऐसा जादू कर देंगे… या फिर, कोई ऐसा उलटफेर कर देंगे कि देश में हर जगह भगवा ही भगवा लहराता हुआ दिखेगा…

और फिर ये हिन्दू अपने सिर पर केशरिया साफा बाँध कर गैर हिन्दुओं को देश से बाहर खदेड़ने की कवायद शुरू कर देंगे.

मैं ऐसे चंद लोगों को उनके खुद के गिरेबान में झाँकने की भी सलाह देना नहीं चाहूँगा.

ऐसे लोगों को ना तो मैं हिन्दुत्व की सीख दूँगा, ना ही वे समझना चाहेंगे, वे अपनी परिभाषा खुद ही गढ़ते हैं या फिर विरोधियों के झाँसे में आकर मोदी पर अकारण दबाव बनाते हैं.

ये लोग स्वयं को कट्टर हिन्दू कहलाना पसंद करते हैं पर, इन्हें एक बात ज़रूर याद रखनी चाहिए कि हमारे देश में एक संविधान भी है जिसे हमने ही बनाया था… स्वीकार किया था… जिसका आदर और निष्ठा से पालन करना हमारा पहला कर्तव्य है.

अब यह तो हमें तय करना है कि संविधान के दायरे में रहकर हम ऐसा क्या कर सकते हैं जो हमारी हिन्दुत्व की विचारधारा को पुष्ट करती है, वह विचारधारा जिसे पूर्व की गैर राष्ट्रवादी सरकारों ने एक षड्यंत्र के तहत ‘साम्प्रदायिक’ करार दिया था.

ये माना कि सदियों से लेकर आज तक हिन्दुत्व को मिटाने का प्रयास किया गया… आपके हृदय में आक्रोश की ज्वाला जो सुषुप्तावस्था में पड़ी थी… दबी-कुचली और आहत भावनाएँ, मस्तिष्क के किसी कोने में दबी पड़ी थी उनमें उबाल आया…

और भले ही देर हुई, पर जब आपने अपनी मर्जी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनायी है, तो क्या इतना जल्दी हतोत्साहित हो जाना उचित है?

हिन्दुत्व की लाइन पर मोदी सरकार कैसे चलेगी, कितने कदम चलेगी और कहाँ तक चलेगी, ये कौन तय करेगा?

सरकार उदारवादी हिन्दुत्व पर चले, कट्टरवादी हिन्दुत्व पर चले या साधु संतों या संन्यासियों वाले हिन्दुत्व पर चले… ये कौन तय करेगा?

हिन्दुत्व की लाइन पर चलने का मतलब क्या यह नहीं कि सरकार किसी धर्म विशेष का तुष्टीकरण नहीं कर रही है?… जैसा कि गैर बीजेपी सरकारों में बिलकुल नहीं हो रहा था.

मुस्लिमों का तुष्टीकरण करने वाली और हिन्दुओं के प्रति द्वेष रखने वाली कांग्रेस या अन्य सरकारों को क्या आप भुला देंगे?

आप अपने विरोधियों की ताकत को कम क्यों आँक रहे हैं, जो देश के अंदर ही नहीं बल्कि विदेशों में बैठे हर वक्त आपकी सरकार को उखाड़ फेंकने की कवायद में जुटे हुए हैं, जी तोड़ षड्यंत्र कर रहे हैं?… सरकार के हर कदम पर, हर निर्णय पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठे हैं?

क्या वे सत्ता में वापसी के लिए लालायित नहीं हैं?… क्या वे फिर से आकर आपकी विचारधारा को कुचलने का प्रयास नहीं करेंगे जो विगत कई दशकों से अब तक करते आएँ हैं?

क्या आप में इतनी ताकत या एकजुटता हो पायी है कि आप उनके झाँसे में ना आकर उनके षड्यंत्रों को विफल कर दें?

क्या आप ये दावा कर सकते हैं कि अगले चुनाव में विकास को प्राथमिकता देने वाले मोदी को आप दोबारा पूर्ण बहुमत में ला पाएँगे?

हिन्दी भाषी राज्यों में, या उन राज्यों में जहाँ बीजेपी की सरकारें है, आगामी लोकसभा चुनाव में क्या उतनी सीटें आएँगी जितनी पहले आई थीं?

यदि गठबंधन की सरकार बनी और सरकार की चाभी किसी अवसरवादी पार्टी के हाथों में आयी तो क्या वो स्थिति हिन्दुत्व के लिए सुखद होगी?

अब आप कहेंगे कि ये सोचना हमारा काम नहीं है… तो क्या आप सिर्फ आलोचना करने के लिए पोस्ट डालकर हिन्दुओं को भ्रमित करते रहेंगे? बेतुकी बातें करते रहेंगे… और मोदी हिन्दुत्व की लाइन पर कैसे और कितना चलें, आप तय करेंगे?

आप यह काम संघ और मोदी सरकार पर क्यों नहीं छोड़ते कि वह अपनी हिन्दुत्व की लाइन खुद बनाए और अपने विवेक से चले?

अब सबसे बड़ी बात कि आप यह किस आधार पर कह सकते हैं कि मोदी सरकार हिन्दुत्व की लाइन पर नहीं चल रही है?

मुझे तो, कभी महसूस नहीं हुआ कि सरकार हिन्दुत्व की लाइन से डिरेल हुई है, या इसकी सोच में कोई परिवर्तन आया है.

हाँ, ये संभव है कि यह सरकार कुछ कट्टर लोगों की भावनाओं के अनुरूप काम ना कर रही हो, पर क्या सारी चीजें इतनी जल्दी की जा सकती है?

आप तो यह भी चाहते थे कि सरकार शंभुलाल रैगर को हिन्दुत्व के योद्धा के रूप में नामित करके पुरस्कृत करे…

गौरक्षकों के कृत्यों को मोदी का खुला समर्थन मिले… गौ तस्करों की हत्या जायज़ हो या उन्हें फाँसी की सज़ा दी जाए… या फिर सेना की मदद से रोहिंग्याओं को बर्मा में ढकेल दिया जाए.

परंतु आपके चाहने से सरकार ऐसा काम कैसे कर सकती है जो संविधान सम्मत नहीं है? संविधान और कानून को बदलने की क्षमता और सामर्थ्य तो आपको ही देनी होगी.

अब ज़रा हिन्दुत्व की लाइन पर गौर करें…

मोदी जब भी कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं तो समझें कि वे हिन्दुत्व की लाइन पर हैं.

मोदी जब किसी वर्ग विशेष के बजाय 125 करोड़ भारतीयों की बात कहते हैं तो समझें कि वे हिन्दुत्व की लाइन पर हैं.

मोदी जब कब्रिस्तान और श्मशान की बात कहते हैं तो वे हिन्दुत्व की लाइन पर हैं.

जब देश की जनसंख्या को सीमित करने के लिए जनसंख्या नीति पर विमर्श होता है तो मोदी हिन्दुत्व की लाइन पर हैं.

जब देश में शिक्षा नीति पर बहस होती है और भारतीय संस्कृति को पाठ्यक्रमों में समावेश की बात होती है तो मोदी हिन्दुत्व की लाइन पर हैं.

योगी जी जैसे भगवाधारी को सीएम, संघियों को राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल बनाया जाता है, तो समझें मोदी हिन्दुत्व की लाइन पर हैं.

मुस्लिम तुष्टीकरण का ना होना… असम से बंगलादेशियों को खदेड़ने के लिए वहाँ के नागरिकों का नेशनल रजिस्टर (NRC) बनाना… ट्रिपल तलाक के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड की तरफ धीरे धीरे बढ़ना…

काश्मीर में धारा 370 के उन्मूलन के लिए माहौल बनाना, यही तो हिन्दुत्व की लाइन है… तो क्या मोदी हिन्दुत्व की लाइन पर नहीं हैं?

ट्रिपल तलाक से याद आया, ज़रा याद करें कि शाहबानो मामले में कैसे कट्टर मुस्लिम संगठनों और मूल्ला मौलवियों ने देश भर में उत्पात मचाया था, सड़कों पर हंगामा खड़ा करके सरकार को अपने हक में कानून बनवाने को बाध्य किया था… परंतु आज क्या स्थिति है?

…आज सिर्फ ट्रिपल तलाक ही नहीं बल्कि मुस्लिम महिलाओं को अकेले हज पर जाने वाली मेहरम जैसी प्रथा का विरोध सिर्फ टीवी डिबेट के अलावा कहीं नहीं दिख रहा… ये क्या है?… आप अब भी नहीं समझ रहे क्या?

यूनिफार्म सिविल कोड की तरफ कदम बढ़ाना क्या मोदी की हिन्दुत्व की लाइन नहीं है?

संघ की विचारधारा पर चलने वाले मोदी और उनकी पार्टी से ऐसी उम्मीद क्यों करनी चाहिए कि वे हिन्दुत्व की लाइन से उतर जाएंगे?

पिछले कुछ सालों में संघ के विस्तार के लिए जो सकारात्मक माहौल बना है यह भी तो मोदी सरकार के लिए हिन्दुत्व की लाइन पर चलने की वजह से बना है… आँकड़े देखें कि इस सरकार से पहले और अब संघ कितनी तेजी से विस्तार पा रहा है.

तो अब ये बातें दिमाग से निकाल दें कि मोदी हिन्दुत्व की लाइन से भटक रहे हैं, ज़रूरत है मोदी पर विश्वास बनाए रखने की, ज़रूरत है संघ एवं संघ समर्थित पार्टी पर भरोसा बनाए रखने की.

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