बता कौन है तू… नहीं तो भाग यहाँ से

असम के मुख्यमंत्री हुआ करते थे बिमला प्रसाद चालिहा… कांग्रेस के कद्दावर नेता थे.

उन्होंने 1951 के बाद असम में आकर बसे अवैध मुसलमानों को, जो मूलतः पाकिस्तान से थे, असम से बाहर खदेड़ने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया… लेकिन नेहरु इस अभियान के सख्त खिलाफ थे.

चालिहा ने असम विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे पाकिस्तानी घुसपैठ रोकथाम अधिनियम 1964 का नाम दिया गया…

तभी कांग्रेस के ही 20 मुस्लिम विधायकों ने चालिहा को धमकी दी कि अगर वो ये अधिनियम लाये तो वो सरकार गिरा देंगे…

परिणाम ये हुआ कि चालिहा दबाव में आ गए और ये अधिनियम फिर कभी पारित नहीं हो सका…

इस घटना के करीब 30 साल बाद असम के मुख्यमंत्री बने हितेश्वर सैकिया… ये भी कांग्रेसी नेता ही थे…

10 अप्रैल 1992 को असम विधानसभा में सैकिया ने कहा कि असम में वर्तमान में 20 से 30 लाख बंगलादेशी घुसपैठिये हैं…

उनकी इसी बात पर अब्दुल मुहीब मजूमदार के नेतृत्व वाले मुस्लिम फोरम के सदस्य नाराज हो गए… और चेतावनी दी कि असम के मुस्लिम चाहें तो महज़ 5 मिनट में हितेश्वर सैकिया की सरकार गिरा सकते है…

परिणाम ये हुआ कि मुख्यमंत्री महोदय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर ये घोषणा की कि असम में एक भी बंगलादेशी घुसपैठिया नहीं है…

इसके बाद फिर कभी असम की विधानसभा में अवैध बंगलादेशी घुसपैठियों का मुद्दा नहीं उठा.

इन दो घटनाओं के बाद असम के स्थानीय कांग्रेसी नेताओं को समझ में आ गया कि असम और केंद्र सरकार बंगलादेश के घुसपैठियों को लेकर सख्त नहीं है…

तो उन्होंने भी बाकायदा इन घुसपैठियों को अपना समर्थन दिया… उनके राशन कार्ड के साथ वर्क परमिट तक बनाये गए…

2012 में असम में एक बड़ा दंगा हुआ… असम के मूल निवासी बोडो जनजाति के लोगों पर बंगलादेशी मुसलमानों ने सुनियोजित हिंसा की…

लेकिन किसी के मुंह से संवेदना का एक भी शब्द नहीं फूटा… क्योंकि अब ये घुसपैठिये सरकार के वोट बैंक थे…

इस घटना पर असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गगोई ने एक बार बोडो जनजातियों के ऊपर मुसलमानों द्वारा की गयी हिंसा का मुद्दा उठाया… लेकिन उनके साथ भी वही हुआ जो बिमला प्रसाद चालिहा और हितेश्वर सैकिया के साथ हुआ था.

अब असम में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है… भाजपा ने अपने घोषणापत्र में असम में बसे बंगलादेशी मुसलमान घुसपैठियों के खिलाफ कार्यवाही और उन्हें भारत से बाहर निकालने का वादा किया था…

लगता है असम में भाजपा की सोनेवाल सरकार उसे अमली जामा पहनाने जा रही है… सरकार ने प्रदेश के 1.5 करोड़ नागरिकों को ही असम का नागरिक माना है… बाकी के बचे हुए कथित नागरिकों की अब कड़ाई से जांच की जायेगी…

उन्हें बताना होगा कि वे कौन हैं… उनका असली नाम क्या है? माँ बाप का नाम क्या है? उनके बाप के बाप कहाँ रहते थे? ये लोग असम में कबसे रह रहे हैं?

क्या काम करते हैं? आमदनी का स्त्रोत क्या है? आधार कार्ड बना है कि नहीं? बना है तो फर्जी है कि असली…

अगर इन सब सवालों का ये असम के ये कथित मुसलमान नागरिक जवाब दे पाए तो ठीक, वरना भारत सरकार उन्हें असम से बाहर निकाल देगी.

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