नए वर्ष की डायरी से : जीवन का एक नया राग

ग्रीष्म ऋतु की भटकती चिड़िया मेरी खिड़की तक आती है गाने और फिर उड़ जाने के लिए.. और शरद ऋतु की पीली पत्तियाँ जिनके पास गीत नहीं हैं, फड़फड़ाती हैं, भूमि पर गिर पड़ती है… …. और कुछ भी लिखने से पहले या लिखते समय मुझे यही अनुभव होता है कि मैं शरद ऋतु में … Continue reading नए वर्ष की डायरी से : जीवन का एक नया राग