नहले पर दहला

triple talaq dowry making india

हम कितने ही मुसलमानों को जानते हैं, जो साले रोज़ बीवियों के हाथों धुने जाते हैं लेकिन आजतक तलाक़-तलाक़-तलाक़ नहीं बोल पाए. क्योंकि अगर बोल दिया तो जीवन में दुबारा हूर जैसी स्त्री मिलने से रही. मुझे नहीं पता कि इस्लामिक समाज के कितने लोग इस प्रथा का लाभ उठाते होंगे! पर फिर भी मोहतरमाएँ यदि इस प्रथा की छुट्टी चाहती हैं तो इस प्रथा का अंत होना ही चाहिए.

लेकिन एक किस्सा सुनाता चलूँ जो बाबा नागार्जुन ने लिखा है- “एक दिन राहुल सांकृत्यायन मुझे अपने गाँव ले गए. राहुल जी ने बताया कि जब से वे घर छोड़कर भागे हैं तब से गाँव नहीं गए.

गाँव पहुंचे तो जोरदार स्वागत हुआ. घर के अंदर एक खटोली पर बैठे ही थे कि एक गठरी बनी स्त्री आकर उनके चरणों पर लेट गई. पता चला वह उनकी पहली पत्नी हैं, जो आजीवन अपने इस ससुराल की चौखट पर नौकरानी बन कर रहीं. राहुल जी बिदक गए और आँगन छोड़ बाहर आ गए.”

राहुल जी ने उसके बाद भी दो और शादी की थीं. उदहारण मैं और भी कईयों के दे सकता हूँ लेकिन राहुल जी का इसलिए कि एक पढ़े-लिखे प्रगतिशील सवर्ण हिंदू पुरुष के समाज में पत्नियों की दशा क्या है. आज भी हजारों उदहारण मिल जाएँगे.

– शम्भुनाथ शुक्ल

आप ने यह अर्द्धसत्य बताया है. राहुल किसी कारण [ पत्नी के कारण नहीं ] घर छोड़ कर किशोर वय में ही भाग गए थे. लेकिन राहुल के परिजनों ने उन की पत्नी को घर से भगाया नहीं. सम्मान सहित रखा, दासी बना कर नहीं. इतना कि फिर वह कभी मायके नहीं गईं.

ज़माने बाद राहुल जब अपनी रुसी पत्नी के साथ गांव लौटे तो एक महिला को देख कर उस का परिचय पूछा तो बताया गया कि उन की पत्नी हैं. मारे ग्लानि और अफ़सोस के उन्हों ने अपना माथा पकड़ लिया. रो पड़े. कहा कि यह तो मुझ से बहुत बड़ा अपराध हो गया. बहुत पछताए. उन की रुसी पत्नी ने भी पहली पत्नी को सम्मान से गले लगाया और राहुल को बहुत धिक्कारा.

राहुल ने बहुत कोशिश की पहली पत्नी के जीवन में आने की लेकिन उन्हों ने फिर राहुल को नहीं स्वीकार किया. अपने अंतिम समय में भी राहुल के परिजन सारनाथ के एक अस्पताल में इलाज करवा रहे थे. राहुल जी को इस की सूचना दी. पर यह जान कर कि राहुल उन्हें देखने आ रहे हैं , वह अस्पताल छोड़ कर गांव लौट आईं. वह नहीं मिलना चाहती थीं राहुल जी से.राहुल को सम्मान सहित वह उपेक्षित करती रहीं , आजीवन. राजेंद्र यादव की पत्नी मन्नू भंडारी ने भी यही किया है. नामवर सिंह ने भी अपनी पत्नी को गांव में ही छोड़े रखा. मैनेजर पांडेय , दूधनाथ सिंह आदि कईयों ने भी यही किया है , पत्नी को गांव में छोड़ कर.

कथाएं और भी लेखकों और राजनीतिकों आदि की भी है. नरेंद्र मोदी ही नहीं , एक पूर्व प्रधान मंत्री चंद्रशेखर भी इसी राह के राही हैं. उन की पत्नी गांव में रहती थीं और वह दिल्ली में एक नेपाली महिला के साथ. राम विलास पासवान की पहली पत्नी अभी भी गांव में रहती हैं , राम विलास पासवान के घर में ही. लेकिन तीन तलाक़ के बाद जिस तरह मुस्लिम समाज और पीड़ित स्त्री के परिजन स्त्रियों को लात मार कर ढेर सारे बच्चों समेत घर से भगा कर भीख मांगने या वेश्या बन जाने को लाचार कर देते हैं , ऐसा अमूमन हिंदू ही नहीं , अन्य समाज के परिवारों में भी नहीं होता. मुस्लिम स्त्रियों की इस यातना को समझिए.

लेकिन दिक्कत यह है कि सेक्यूलर होने की चटाई ओढ़ने के फेर में आप जैसे कुछ मित्र इस तरह की अर्द्धसत्य बातें परोसने लगते हैं. यह गुड बात नहीं है. राहुल जी के लेखन , उन के योगदान , अवदान और उन के जीवन की बहुतेरी उल्लेखनीय बातें और भी हैं. उन की याद कीजिए. राहुल जी जैसे लोग सदियों में पैदा होते हैं.

– दयानंद पाण्डेय

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