क्या दाऊद के खानदान की किसी लड़की को कभी सपने में भी तलाक का डर होगा?

आर्मी क्या होती है?

एक ऑर्डर को बिना बदलाव के जितने सारे लोग अंजाम देते हैं वे एक सुगठित शक्ति हैं, वे सेना हैं, इंग्लिश में जिसे आर्मी कहा जाता है.

इंस्टेंट तीन तलाक का बिल जैसे ही लोकसभा में पारित हुआ, मुसलमानों में सरकार का विरोध एक सुसूत्रता से चल रहा है. सब का कथन (narrative) एक ही है.

सरकार पर गलत मंशा का आरोप है, अज्ञान का भी आरोप है लेकिन यह कहीं नहीं कह रहे कि इस्लामी देशों में यह प्रथा गुनाह करार दी गयी है.

फिर यह भी कह रहे हैं कि तलाक देना गैर कानूनी हो गया तो तलाक तो हुआ ही नहीं तो फिर सज़ा कैसी और क्यों, और मर्द जेल चला गया तो गुज़ारा कैसे होगा. और वह औरत तलाक़शुदा कहलाएगी या नहीं.

और इसके उपरांत उनका फेवरिट विक्टिम कार्ड तो है कि सरकार मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाना चाहती है.

आर्मी होना इसी को कहते हैं. इस्लाम आर्मी है और हर मुसलमान उसका अनुशासित सैनिक. हर किसी का कथन कमोबेश सेम टू सेम.

यह तलाक गैर कानूनी हो गया तो तलाक तो हुआ ही नहीं…. से लेकर…. गुज़ारा कैसे होगा तक के झूठ का तार्किक जवाब देना मुश्किल नहीं है.

बस इसके पहले, याने आज स्थिति क्या है इस पर गौर कर लीजिये. आज यह इंस्टेंट तीन तलाक वैध माना जाता है जिसके खिलाफ़ यह कानून प्रस्तावित है.

1. आज यह इंस्टेंट तलाक देते ही बीवी घर से बाहर हो जाती है. मायके जाये या अगर मायके वाले लेते नहीं या लेने के काबिल नहीं, तो जहां जाना वहाँ जाय. इस हालत में मर्द कौन सा गुजारा दे रहा होता है उसे?

2. मेहर की बात ही न करें, मेहर के नाम से क्या धोखा होता है, बहुत आँसू देख चुका हूँ. कोई मायने नहीं रखती मेहर की रकम आज के दिनों में और निकाह के वक़्त भी वह कम करवाने या माफ करवाने के दबाव कम नहीं होते. ऊपर से वो एक आया सिखा दो तो भी मेहर माफ वाला बहाना तो है ही.

3. गुजारा तो मर्द की संपत्ति कुर्क करके भी वसूला जा सकता है. वैसे भी अगर पति ने तलाक मुंह से बोला तो निकाह का बंधन या प्यार का लिहाज कहाँ तक करे औरत. आज तो वो सीधा घर बाहर होती है और उसके सामाजिक स्टेटस में यह तीन शब्द पल भर में बरसों की गिरावट ला देते हैं.

उसके साथ ससुराल की औरतें कहीं खड़ी नहीं होती. अपने ही घर के खून का (बच्चों का) क्या हाल होगा यह भी खयाल उन्हें नहीं आता कि मर्द को तलाक देने से रोके. कल कम से कम यह डर तो रहेगा कि प्रॉपर्टी से गुज़ारा मांगा तो अपने सर से भी छत हट सकती है. वे मर्द को रोकेंगी.

498A जैसे इसका दुरुपयोग होगा, मुसलमान घर तबाह होंगे… यह रोना रोया जा रहा है. मतलब जब 498A लाया गया तो मुसलमानों को कल्पना थी कि इससे हिंदुओं के घर बर्बाद होंगे, यह इस बात की कबूलात ही है. काफी बड़ा किस्सा निकलेगा इस पर.

फिलहाल इतनी जिज्ञासा अवश्य है कि 498A के पैरोकार कौन थे और आज वे और उनके विरासत के झंडाबरदार कहाँ और किनके साथ खड़े हैं?

और हाँ, यह इस्लाम का दुखड़ा रोनेवाले लगभग सभी लोग अच्छे और समर्थ घरों से हैं यह बात को अवश्य नोट किया जाये. इस प्रस्तावित कानून से खुश मुस्लिमा और इस कानून का विरोध करती मुस्लिमा में आप को स्टेटस का बहुत फर्क दिखेगा.

समर्थ मुसलमान की बेटी को तलाक का डर बहुत कम होता है. क्या दाऊद के खानदान की किसी लड़की को कभी तलाक का डर सपने में भी होगा?

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY