मदारी और देवकन्या

खुद ही मदारी बनकर खेल रचता है, खुद ही जमूरा बनकर करतब दिखाता है और खुद ही दर्शक बनकर ताली पीटता है… अद्भुत कला थी उसमें अपनी ही दुनिया में मायाजाल रचकर जीवन भर उसमें उलझे रहने को वास्तविक आनंद समझने लगा था… देवलोक की एक कन्या का एक दिन वहां से गुज़रना हुआ… उसकी … Continue reading मदारी और देवकन्या