सांस्कृतिक मार्क्सवाद : नीयत से पहचानें वामपंथियों को

सांस्कृतिक मार्क्सवाद के फ्रैंकफर्ट स्कूल की चर्चा हो रही है तो इसे समझने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है इसका 11 पॉइन्ट प्लान –

1. रेसिज्म के आरोपों की कल्पना.

2. लगातार बदलाव और भ्रम की स्थिति बनाये रखना.

3. बच्चों को सेक्स और समलैंगिकता का पाठ पढ़ाना.

4. स्कूलोँ और शिक्षकों की अथॉरिटी को खत्म करना.

5. शरणार्थियों, घुसपैठियों और अप्रवासियों को बढ़ावा देकर सामाजिक संरचना और पहचान को खत्म करना.

6. नशे को बढ़ावा और समर्थन.

7. धर्म-स्थलों को खाली करना – लोगों को धर्म से विमुख करना.

8. अन्यायपूर्ण और अविश्वसनीय न्याय-व्यवस्था खड़ी करना.

9. सरकारी मदद पर लोगों को आश्रित बनाने को बढ़ावा.

10. मीडिया पर नियंत्रण.

11. परिवार की व्यवस्था को नष्ट करना.

वामपंथियों को पहचानना सबसे महत्वपूर्ण कदम है. आज के वामपंथी 70 के वामपंथियों की तरह दाढ़ी बढ़ा के, फटा पजामा पहन के खादी का झोला लेकर चलने वाले घोषित वामपंथी नहीं हैं.

इनकी ताक़त है कि ये पहचान में नहीं आते. इसलिए इनका यह 11 सूत्री प्लान महत्वपूर्ण है…

समाज में जहाँ कहीं भी, कोई भी, इन 11 में से किसी भी सूत्र को बढ़ावा दे रहा हो वह वामपंथी है.

इसमें सबसे महत्वपूर्ण है सूत्र नंबर 2… लगातार बदलाव और भ्रम…

आज का वामपंथी मार्क्स और दास कैपिटल और कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो से नहीं बँधा है. वह किसी भी एक सिद्धांत से नहीं बंधा है. वह अपने सिद्धांतों और रणनीति में लगातार बदलाव करने को तत्पर है.

ऐसे में वामपंथ को उनके सिद्धांतों और रणनीति से नहीं पहचाना जा सकता… उसे सिर्फ उसकी नीयत से पहचाना जा सकता है.

एक स्टीरियोटाइप वामपंथी की नीयत का उदाहरण दूँगा.

अगर बस में दो लोगों के बीच झगड़ा हो जाये, और उनमें एक 6 फ़ीट 4 इंच का हो और दूसरा 5 फ़ीट 3 इंच का तो नतीजा क्या होगा? लंबा आदमी नाटे की ठुकाई कर देगा और सीट ले लेगा.

अब यहाँ से एक वामपंथी की भूमिका शुरू होती है. एक वामपंथी इस घटना को इस्तेमाल करके यह नैरेटिव बनाएगा कि दुनिया में लंबे लोग दुष्ट और अत्याचारी होते हैं और नाटे लोग बेचारे पीड़ित होते हैं.

दुनिया में हर कोई किसी ना किसी से लंबा और किसी ना किसी से नाटा है, दो लोगों को छोड़ कर… पर यह कथन उनके नैरेटिव को सूट नहीं करता.

पीड़ित नाटी मानवता का झंडा खड़ा करके यह वामपंथी नाटाधिकार एक्टिविस्ट हज़ार नाटे लोगों की भीड़ लेकर किसी लंबे आदमी के घर को घेर कर लूटपाट मचा देगा… बाकी सारे लंबे लोग लंबे होने के अपराध-बोध से ग्रस्त चुपचाप बैठे रहेंगे.

उस लंबे आदमी की एक्स्ट्रा लार्ज पैंट और जैकेट छीन कर नाटे लोगों में बाँट देगा और उन्हें समझायेगा कि दुनिया में लंबे लोगों ने नाटे लोगों के हिस्से का कपड़ा लेकर ये लंबी लंबी पैंटें सिलवाई हैं इसीलिए कपड़े की इतनी कमी है और कपड़ा इतना महंगा है… और उसकी सोने की चेन और घड़ी चुपचाप अपने पास रख लेगा…

यही सोने की चेन और घड़ी वामपंथी की असली नीयत है. उसे इसी से पहचानें… उनकी नीयत है सत्ता पर कब्ज़ा.

नाटे आदमी को बस में खिड़की की सीट मिलनी चाहिए… यह उसका मूल नाटाधिकार है… यह नारेबाजी है.

नज़र उनकी है उस सोने की चेन और घड़ी पर जो उस आदमी के पास है जो उस बस में चल भी नहीं रहा…

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