अगले दस वर्षो में समाप्त हो जायेगा सामान्य और आरक्षित वर्ग में अंतर

मेरे आरक्षण वाले लेख – उस ‘एक’ नंबर के लिए दलित, पिछड़े और सवर्ण एक दूसरे के विरुद्ध खड़े हुए है – पर कई मित्रों ने सार्थक विचार रखे. इस विचार विमर्श को विस्तार देने की आवश्यकता है.

मित्रों ने लिखा कि कई लोग फ्री में कुर्सी तोड़ने, ऊपर की कमाई और प्रेस्टीज के कारण सरकारी नौकरी ज्वाइन करना चाहते हैं.

एक भी कमेंट में यह नहीं था कि लोग सरकारी नौकरी राष्ट्र और जनता की सेवा के कारण करना चाहते हैं; कि पब्लिक पालिसी या नीति निर्धारण के द्वारा जनता को भारत के भाग्य का विधाता बनाना चाहते हैं.

कहीं ऐसा तो नहीं है कि यही एक मिसिंग कमेंट हम भारतीयों को हमारे चरित्र और हमारी महत्वाकांक्षा के बारे में कुछ बताता है?

भ्रष्टाचार के बारे में मेरा मानना है कि यह कोण किसी नैतिक शिक्षा, धार्मिक ग्रन्थ, उपदेश या दंड (जैसे कि कड़ी पुलिस, भ्रष्ट लोगो को जेल, लोकपाल, इत्यादि) से नहीं समाप्त होने वाला.

यह समाप्त होगा प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णयों (जनधन, आधार, लाभकारियो को धन सीधे बैंक अकाउंट में भेजना, कैश के प्रयोग को कम करना, टैक्स रिफार्म, इंटरनेट के द्वारा अधिक से अधिक सेवाएं सेवाएं, पेंशन सुधार, नीम कोटिंग, इत्यादि) द्वारा.

मित्रों ने पहले के लेखों में बैंक मैनेजर्स द्वारा लोन देने में घूस के बारे में लिखा. क्या उपाय है?

अमेरिका में आपको कई लोन बिना बैंक जाए इंटरनेट के द्वारा केवल आपकी क्रेडिट रेटिंग (उपभोक्ता के लोन वापस करने का रिकॉर्ड) के आधार पर मिल जाएगा.

अगर भारतीय बैंक नहीं सुधरेंगे, तो सरकार का अगला कदम यही होगा.

आप आधार कार्ड, बैंक अकाउंट और बिज़नेस प्लान को बैंक की वेबसाइट पर अपलोड करें; कृत्रिम बुद्धि या आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस आपका रिकॉर्ड चेक करेगी और लोन का पैसा सीधे आपके अकाउंट में.

बदले में बैंकों के जॉब कम हो जायेंगे, जब कि आई टी में बढ़ जायेंगे. इसे एक तरह से बैंक कर्मचारियों को चेतावनी के रूप में लेना चाहिए.

मैंने पहले भी लिखा था, कि हमारी आँखों के सामने चौथी औद्योगिक क्रांति हो रही है.

पहली क्रांति भाप की मशीन जिसने जानवरों की शक्ति पर हमारी निर्भरता कम की; द्वितीय बिजली की मशीन जिसने मास प्रोडक्शन या बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा दिया; तृतीय सूचना की क्रांति जिसने हमें कनेक्ट किया.

और अब चौथी डिजिटल जिसमें मानवीय या फिजिकल, सूचना या डिजिटल और जैविक या जेनेटिक दुनिया को जोड़कर एक नयी संरचना 10 से 20 वर्षो में लागू हो जाएगी जो आज तक के सभी मानवीय प्रयासों और विकास को उलट-पलट देगी.

इस डिजिटल क्रांति की नींव नॉलेज या ज्ञान होगी. दूसरे शब्दों में, नॉलेज-बेस्ड इकॉनमी (knowledge-based economy), जिसमें ज्ञान सर्वोपरि होगा, ना कि सरकारी नौकरी.

अगले 10 वर्षो में जिसके पास ज्ञान होगा, स्किल होगी, वही राज करेगा.

यही सन्देश मेरे उन मित्रों को है जो आरक्षित वर्ग में आते है. इस युग में सामान्य और आरक्षित वर्ग में अंतर समाप्त हो जायेगा. क्योंकि वे दोनों ही अपने अस्तित्व की निरर्थकता से सामना करेंगे.

क्योंकि प्राइवेट सेक्टर सरकारी तंत्र से कई गुना बड़ा और प्रभावी हो जायेगा. अगर सरकार कण्ट्रोल करने का प्रयास करेगी, तो प्राइवेट सेक्टर कहीं और पलायन कर जाएगा.

अंदरूनी गृह युद्ध की बात वो करते है जिन्हे अपने बूते पर प्राइवेट सेक्टर में नौकरी नहीं मिल सकती, या प्राइवेट सेक्टर में अपेक्षित मेहनत का माद्दा नहीं रखते, या अपने उद्यम को चलाने के लिए जी-तोड़ मेहनत नहीं कर सकते.

यही इस युग का सत्य है.

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