नमामि गंगे : आरोप-प्रत्यारोप बंद हों और सामूहिक प्रयास आरम्भ हों

गंगा भारत का प्राण है. यह सिर्फ़ जल की धारा नहीं अपितु भारत की मानवीय चेतना को भी प्रवाहित करती है. रामायण, महाभारत तथा अनेकानेक पुराणों में गंगा को पुण्यसलिला, पापनाशिनी, मोक्ष-प्रदायिनी आदि ना जाने कितने अलंकारों से विभूषित किया गया है पर मानवों के पाप को हर कर लगभग 50 करोड़ भारतीयों को जलरूपी … Continue reading नमामि गंगे : आरोप-प्रत्यारोप बंद हों और सामूहिक प्रयास आरम्भ हों