गुजरात : मौका चूक गए राहुल, अब 5 साल बाद क्या होगा, क्या पता

Sports injury 99% अच्छे खिलाड़ियों का करियर बर्बाद कर देती है.

वही खिलाड़ी पीक पर पहुंचते हैं जो चोटों से बच पाते हैं या समय रहते उबर पाते हैं. Competition season में अगर injury हो जाये तो पूरा एक साल बर्बाद हो जाता है.

उसी तरह अगर Olympics से पहले किसी विश्व स्तरीय खिलाड़ी को injury हो जाये तो वो उसे आजीवन सालती है. क्योंकि Olympics का चक्र 4 साल का होता है.

अगर आपका ये Olympic मिस हो गया तो अब अगला मौका आपको 4 साल बाद मिलेगा. आज आप पीक पर हैं. आपकी world ranking टॉप पर है.

आज आपके medal जीतने की संभावना है… पर दुर्भाग्य से आपको injury हो गयी… अब आप मौका चूक गए… 4 साल बहुत लंबा समय होता है.

4 साल में दुनिया बदल जाती है… अगले 4 साल में दुनिया भर में न जाने कितने नए खिलाड़ी उभर आएंगे… 4 साल बाद की कौन जानता है?

राजनीति का चक्र तो 5 साल का है. ये मौका अगर आप चूक गए तो अगला मौका अब 5 साल बाद मिलेगा.

5 साल बाद जाने क्या होगा… गुजरात में राहुल गांधी मौका चूक गए हैं. ये एक सुनहरा अवसर था जो वे चूक गए.

मोदी ने 2016-17 में चुनावी राजनीति की चिंता न करते हुए नोटबन्दी और GST जैसे कड़े कड़वे निर्णय लिए जिससे उनका प्रबल समर्थक वोट बैंक भी उनसे नाराज़ था…

इसके अलावा मोदी के गुजरात छोड़ दिल्ली चले जाने से भी जो शून्य निर्मित हुआ था उसका भी असर था.

पर राहुल गांधी ये मौका चूक गए. अब गुजरात भाजपा को अपनी गलती सुधारने और पुनः regroup और consolidate करने के लिए 5 साल का मौका मिल जाएगा.

मोदी जी के पिछले तीन साल तो UPA के कुशासन के गड्ढे पाटने में ही निकल गये. अगले 5 साल में मोदी जी की सभी योजनाओं का परिणाम आने लगेगा.

अगला गुजरात चुनाव जब 2022 में होगा तो GDP ग्रोथ 10% सालाना के आसपास होगी.

मोदी जी के सारे प्रशासनिक और आर्थिक सुधार ज़मीन पर दिखने लगेंगे. 2022 में मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में आठवां साल चल रहा होगा.

जो vision मोदी जी ले कर चल रहे हैं वो अगले 5 साल में ज़मीन दिखने लगेगा.

इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक सुधार, जनधन योजनाएं, मुद्रा बैंक की योजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत जैसी योजनाओं का रिजल्ट दिखने लगेगा.

इसके अलावा ये भी कि एक अराजक आंदोलन से उपजे राहुल बाबा के नए नए मित्र बने इन तीन लौंडों की भी पोल खुल जाएगी अगले 5 साल में, जैसे दिल्ली में केजरीवाल की खुल गयी.

गुजरात मे एक सुनहरा मौका था जो इस बार राहुल गांधी ने गंवा दिया. अन्य किसी राज्य में कांग्रेस की दाल गल जाए इसकी संभावना नगण्य है.

एक अकेला राजस्थान है जहां आज भाजपा वसुंधरा राजे सिंधिया के कारण बैकफुट पर नज़र आती है.

इसके अलावा सिर्फ एक मप्र है जहां कांग्रेस सिर्फ कोशिश कर सकती है, पर शिवराज सिंह की जो लोकप्रियता है उस से लगता नही कि वहां उसे पैर जमाने की जगह मिलेगी.

फिलहाल कांग्रेस का पुनरुत्थान दूर की कौड़ी है.

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