लोगों द्वारा नकारे जाने की वजह तलाशिए, मोदी-विरोध से तो सत्ता मिलने से रही

लोकतंत्र का मंदिर एक बार फिर से शर्मसार हो रहा है… देश की सबसे पुरानी पार्टी जो अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए जूझ रही है…

लोगों द्वारा नकार दिए जाने के बावजूद इस पार्टी के बचे खुचे कुछ चंद नेता जिन्हें जनता ने चुनकर संसद में भेजा था, वे नंगा नाच का प्रदर्शन करते नहीं थक रहे हैं.

इन लोगों की इन्हीं हरकतों की वजह से यह पार्टी दिन प्रतिदिन पतन की ओर अग्रसर होती जा रही है.

हालिया चुनाव के दौरान संसद के शीत कालीन सत्र के विलंब को लेकर मोदी सरकार को घेरने वाली कांग्रेस पार्टी आज अपनी क्षुद्रता पर उतर आई जब संसद का सत्र शुरू हुआ.

मोदी से माफी मंगवाने की बात हो या टूजी पर सीबीआई कोर्ट के निर्णय की बात हो, कांग्रेस की मंशा सिर्फ और सिर्फ संसद को ना चलने देने की ही है.

आज देश की जनता जो वर्तमान सरकार की ओर हसरत भरी निगाहों से देख रही है, जो चाहती है कि संसद चले, उनकी समस्याओं पर चर्चा हो, कुछ अच्छे कानून बने…

परंतु उनकी इच्छा आकांक्षाओं पर तुषारापात करते हुए कांग्रेस पार्टी, संसद को राजनीतिक अड्डा बना कर जनता की हसरतों को रौंद रही है.

अपनी लगातार हो रही हार की समीक्षा करने के बजाय कांग्रेस राजनीति के निम्नतम स्तर तक गिर चुकी है…

साढ़े तीन वर्षों से, जब से कांग्रेस पार्टी सत्ताच्युत हुई है, यह अपने क्षोभ का प्रदर्शन करती रही है और सबसे आसान तरीका संसद को बाधित करने का अख्तियार की हुई है.

इससे पहले भी चाहे मामला नेशनल हेराल्ड का हो… या फिर ललित मोदी के नाम पर सुषमा स्वराज को घेरने का हो, या फिर बाथरूम में रेनकोट पहन कर नहाने वाले बयान का मुद्दा हो… कांग्रेस अपनी स्वार्थ परक राजनीति करने से बाज नहीं आई… हमेशा संसद को बाधित करती रही.

कांग्रेस कहती है कि हमारे लोकप्रिय (?) पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, मोदी के हालिया बयान से आहत हुए हैं, इसलिए मोदी उनसे माफी माँगें.

मनमोहन सिंह ने भी मीडिया में आकर अपनी नम आँखों से आहत होने की बात स्वीकार की थी.

परंतु ये कितनी हैरानी की बात है कि जिस व्यक्ति को ये नहीं पता कि ‘आहत’ होना क्या होता है, कैसे आहत हुआ जाता है, आज वो भी आहत हो गया?

मनमोहन के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही सोनिया गांधी ने एक एडवाइज़री कमेटी बना दी जिसके अधिकार केंद्रीय मंत्रिमंडल के बराबर थे, सोनिया उस कमेटी की अध्यक्षा बन बैठी… उस वक्त मनमोहन जी, आप आहत क्यों नहीं हुए थे?

आप पीएम थे जनाब, बावजूद इसके… लालकिले पर खड़े होकर पार्टी पॉलिसी के तहत जब आपने ऐलान किया कि देश के संसाधनों पर मुस्लिमों का पहला हक है, तब आप आहत क्यों नहीं हुए थे?

2006 में जब आपने पाकिस्तान को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि भारत की तरह ही पाकिस्तान भी आतंकवाद का शिकार है, तब आप आहत क्यों नहीं हुए थे?

एक सांसद की हैसियत रखने वाले राहुल गांधी ने जब अध्यादेश फाड़ कर आपके और आपकी सरकार के मुँह पर तमाचा जड़ा था, तब आप आहत क्यों नहीं हुए थे?

नवाज़ शरीफ ने जब आपको देहाती औरत कहा… या जब देश में एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे थे, तब आप आहत क्यों नहीं हुए थे?

लेकिन…

लेकिन… जब मोदी ने मणिशंकर के घर पर हुई बैठक के बारे में सवाल पूछ लिया तो आप आहत हो गये? आपकी पूरी पार्टी आहत हो गई?

किसे बेवकूफ बना रहे हैं आप?

यहाँ सवाल तो ये उठता है कि आपकी मंशा पर सवाल क्यों ना उठाया जाए?

आप ये बताएँ कि उस गोपनीय पार्टी को गोपनीय रखने का प्रयास क्यों किया गया था?

मज़े की बात ये कि जब गोपनीयता भंग हुई, और खबर अखबारों में छप गई, फिर भी आप बैठक की बात क्यों नकारते रहे थे?

लेकिन मोदी ने जब यही बात रैली में उठा दिया तो आप तिलमिला गए?… कमाल है मनमोहन जी!!!

माना कि पाकिस्तानी पूर्व विदेश मंत्री मणिशंकर का दोस्त था, खाने पर आया हो सकता है, पर वहाँ आप क्या कर रहे थे? हामिद अंसारी और पूर्व सेनाध्यक्ष क्या कर रहे थे?

आपने कहा कि चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई… लेकिन जनरल कपूर ने तो कहा कि भारत-पाक संबंधों पर चर्चा हुई थी…

तो किस हैसियत से आप लोग चर्चा कर रहे थे… जबकि दोनों देशों के बीच मामला उलझा हुआ और संवेदनशील है?

मनमोहन जी, राजनीति तो आप कर रहे हैं, राजनीति तो आपकी पार्टी कर रही है, मौजूदा सरकार के खिलाफ षड्यंत्र करने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं आप लोग.

मणिशंकर जब पाकिस्तान जाकर मोदी सरकार को गिराने में सहयोग करने की मिन्नतें कर रहे थे, वो वीडियो तो सबने देखा था.

इन्हीं वजहों से कांग्रेस पार्टी आज खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है.

देश के लोगों के द्वारा नकारे जाने की वजह को ईमानदारीपूर्वक ढूँढने के बजाय मोदी विरोध को ही हथियार बना कर सत्ता प्राप्त करने की आप लोगों की कवायद कभी कामयाब नहीं हो सकती है.

आपकी पार्टी जब तक सकारात्मक राजनीति नहीं करेगी, जनता के मन में मोदी सरकार के विकल्प के रूप में अपनी छवि का निर्माण नहीं करेगी, सत्ता से दूर ही रहेगी इसमें कोई संदेह नहीं है.

ये ‘आहत’ होने का ढोंग बंद करें आप लोग… संसद को बंधक बनाकर उसकी कार्रवाई को ठप्प करके विरोध जताने की नौटंकी बंद करें

जनता की गाढ़ी कमाई से चलने वाली संसद को निर्बाध चलने दें वरना जनता मूर्ख नहीं है… ये पब्लिक है पब्लिक… सब जानती समझती है.

राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता निभाने के लिए चुनावी मैदान में दो-दो हाथ करने पड़ते हैं… लोकतंत्र के मंदिर में नहीं जिसे बाधित करके कांग्रेस पार्टी आज संसद को शर्मसार करने पर तुली हुई है.

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