चीन का राष्ट्रवाद और उसकी देशभक्ति : आप बोलेंगे न साथी!

चीन अपने शिनजियांग प्रांत के 1 करोड़ उइगुर मुसलमानों को देशभक्ति सिखाने की योजना शुरू कर चुका है.

हज़ारों उइगुरों को गिरफ्तार कर सैनिक शिविरों की निगरानी में रख चीन उनमें अपने देश के प्रति प्यार सिखा रहा है.

इसी चीन ने इस दिमाग सही करने की योजना से पहले उइगुर मुसलमानों के धार्मिक अस्मिता और पहचान को संकट में डालते हुए… उनके टोपी पहनने, दाढ़ी रखने, नमाज़ पढ़ने के साथ-साथ रोज़ा रखने तक पर पाबंदी लगा रखी है.

असोसिएट प्रेस की एक जांच के हवाले से चीन की सरकार के दस्तावेजों से पता चलता है कि ये शिविर निःशुल्क, पूरी तरह से बंद और सेना की निगरानी वाले इलाके में हैं.

चीन की सरकार इस पूरे अभियान को वोकेशनल ट्रेनिंग का नाम दे रही है, लेकिन उसका असली मकसद उइगुर मुसलमानों के दिमाग में देशभक्ति भरना है.

तीन महीने से दो साल तक के सत्र की ट्रेनिंग में उइगुरों को मंदारिन, कानून, जातीय एकता, कट्टरता से छुटकारा पाने के साथ ही चीन माई की जय बोलना… उर्फ़ देशभक्ति भी सिखाई जाएगी.

चीन की सरकार द्वारा शिनजियांग के चरमपंथियों को देशभक्ति सिखाने के इस अभियान की अगुआई चेन कांगुओ कर रहे हैं जिन्हें तिब्बत में बौद्धों के आंदोलन को कुचलने के एवज़ में हाल में ही प्रमोशन उर्फ़ पदोन्नति मिली थी.

“उइगुर आतंकवादियों को हम युद्ध के सागर में दफना देंगे” : यह कहा था चेन कांगुओ ने.

हे भारतीय कामरेडों! भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह-इंशाअल्लाह, तुम कितने अफ़ज़ल मारोगे.. हर घर से अफ़ज़ल निकलेगा, भारत की बर्बादी तक… जंग चलेगी जंग चलेगी के नारों और नारेबाज़ों को अपनी गोद में खिलाने के धनी रहे हैं आप.

कश्मीर में आतंकियों पर चली एक भी गोली आपके सीनों में उतरती महसूस की है इस देश ने, जबकि पत्थरबाजों का हर पत्थर मुहब्बत से लपका है आपने.

इस देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का…. यही कहना था न आपके लिए सत्ता का छायावाद परोसते आये आपके सत्ताई मालिकान कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री जी और देश के गृहमंत्री जी ने!

तनिक सोचिए न, जो सवाल आज मेरी फरज़ाना बिटिया और उसकी अम्मी उर्फ़ मेरी भाभीजान आपसे और आपके मालिकान कांग्रेस से पूछती हैं, उसका जवाब क्या देंगे?

फरज़ाना बहुत खुश है कि उसके बिगड़े चीनी उइगुर चचा लोगों को चीन कुछ इस तरह चीन अम्मी की जय बोलना सिखा रहा है, लेकिन अगर भारत में मुस्लिम चरमपंथियों पर मासूम छर्रे भी चलें तो आपको मानवाधिकार का आंचल दिखाई देता है अपने समर्थन के लिए.

कामरेड! भारत-चीन युद्ध के समय कलकत्ते की सड़कों से आपके यही नारे उठे थे “दिल्ली दूर, पेकिंग नजदीक है”. आपने तो बंगाल में यह भी बताना शुरू कर दिया था कि “चीन से मुक्तिवाहिनी” आ रही है.

आपको अपनी इस नजदीकी के इस मानवाधिक्कार पर जरूर कुछ बोलना चाहिए.

मेरी फरज़ाना बिटिया और उसकी अम्मीजान उर्फ़ मेरी भाभीजान आपके मानवाधिक्कारी मुंह खुलने की प्रतीक्षा में हैं.

आप बोलेंगे न साथी!

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