जब न्यायपालिका से उठ जाता है भरोसा, तभी पैदा होते हैं शम्भू लाल रैगर

आरुषि और हेमराज का मर्डर हुआ ही नहीं था.

मीडिया तो बस यूं ही फालतू में चिल्ला रही थी.

आरुषि-हेमराज के मर्डर की झूठी खबर फैला के भोली भाली जनता को गुमराह करने के लिए मीडिया को सज़ा मिलनी चाहिए.

मीडिया को ‘सभी पदों’ से हटा के जेल में डाल देना चाहिए.

मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह के खिलाफ आज तक कोई आरोप सिद्ध नही हुआ है.

ये बेचारे तो बहुत मासूम, सीधे साधे… समाज सेवी लोग है… गरीबों मज़लूमों की आवाज़ उठाते रहे सो इन पर झूठे मुकदमे लाद दिए गए.

साँच को आँच कहां… सत्यमेव जयते… Truth Prevails… दोनो समाजसेवी बाइज़्ज़त बरी होते जा रहे हैं एक एक मुकदमे से…

लालू यादव ने गोबर किया?

नहीं किया न?

किसी ने लालू यादव को गोबर करते देखा? है कोई गवाह, जो ये कह दे कि लालू ने गोबर किया?

इसका मतलब लालू ने चारा नहीं खाया…

अगर चारा खाते तो गोबर करते न?

गोबर नहीं किया मने चारा नहीं खाया… Hence Proved… बाइज़्ज़त बरी किया जाता है.

देश की जनता का विश्वास जब न्यायपालिका से उठ जाता है तभी शम्भू लाल रैगर पैदा होते हैं.

तभी कंगारू कोर्ट्स पनपती हैं. तभी जनता स्वयं त्वरित न्याय करने को प्रेरित होती है.

आज यदि आप आम जनता में सर्वे करें और पूछें कि माफिया, आतंकी, बलात्कारी को पकड़ के जेल में बंद कर मुकदमा चलाया जाए या फिर जंगल मे ले जा के पॉइंट ब्लैंक सिर से सटा के गोली मार दें और एनकाउंटर दिखा दें?

अधिकांश जनता कोर्ट कचहरी की अपेक्षा एनकाउंटर पर सहमत होगी.

भारत की न्याय व्यवस्था अंग्रेजों ने बनाई थी… उस समय एक मात्र उद्देश्य अंग्रेजी सरकार और अंग्रेजी हुक्मरानों के हितों की रक्षा करना और उनके कुकृत्यों को ढकना छुपाना protect करना था.

इस संविधान और पूरी न्याय प्रणाली को कूड़ेदान में फेंक के भारत की पुरातन प्राचीन न्याय व्यवस्था लागू करो, जिसकी प्रथम इकाई ग्राम सभा और ग्राम पंचायत थी, जिसमें 5 सयाने…

अनपढ़ पर ज़िन्दगी का व्यावहारिक अनुभव लिए होते थे… और जटिल से जटिल मामले भी चुटकियों में हल कर देते थे और उनका न्याय व्यावहारिक होता था.

90% मामले तो ग्राम सभा – पंचायत ही सुलझा लेती थी. सिर्फ 10% मामले ही ऊपर तक जाते थे…

ग्राम पंचायत की व्यवस्था हज़ारों सालों से चली आयी और कामयाब थी.

आधुनिक न्याय प्रणाली पूरी तरह फेल है… Justice Delayed is Justice Denied.

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