हल्ला मचाकर विकास के रास्ते पर अनावश्यक बाधा उत्पन्न मत कीजिए

2G स्पेक्ट्रम मामले में ए राजा, कनिमोझी आदि को सीबीआई कोर्ट ने बरी कर दिया. करीब 7 वर्ष चले इस घटनाक्रम की सब जने अपने स्वार्थ के अनुसार व्याख्या करेंगे.

संसद में कांग्रेसी अब और अधिक हंगामा करेंगे क्योंकि उनके अनुसार ‘कोई घोटाला हुआ ही नहीं’.

नाराज़ भाजपाइयों की दृष्टि में मोदी सरकार निकम्मी सिद्ध हुई है क्योंकि कांग्रेसियों को चिल्लाने का एक मौका और मिल गया है.

भक्तजन भारी सकते में हैं क्योंकि वे इसके लिए अरुण जेटली को जिम्मेदार मानते हैं. परन्तु इस राजनैतिक कोलाहल में वास्तविक विषय खो गया है.

भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) जब रिपोर्ट देते हैं तो उसमें ‘घोटाला’ अथवा ‘अपराध’ शब्द का प्रयोग नहीं करते. उनका कार्य सरकारी खजाने की ऑडिट करना है और यह बताना है कि अनियमितता कहाँ और कैसे हुई.

2G स्पेक्ट्रम बेचने में यूपीए सरकार के मंत्रियों ने भारी अनियमितता बरती थी यह सर्वविदित तथ्य है. सन् 2001 के दाम पर 2008 में स्पेक्ट्रम नहीं बेचा जा सकता था वह भी तब जब माल सरकारी हो और इसका लाभ जनता को मिलने वाला हो.

सीधा सा हिसाब है कि 2017 में कोई भी दूकानदार सात वर्ष पूर्व के दाम पर मुझे अपना माल बेचेगा तो उसे हानि होगी.

यदि कोई दूकानदार आपको पुराने मूल्य पर सामान बेचता है तो आप स्वयं खरीदना नहीं चाहेंगे. आपको शंका हो जायेगी कि जरूर दाल में कुछ काला है.

सुप्रीम कोर्ट ने इसी को संज्ञान में लेते हुए ए राजा समेत सभी आरोपियों पर आपराधिक धाराओं में केस चलाने का आदेश दिया था. न्यायालय ने स्पेक्ट्रम की नीलामी भी रद्द कर दी थी.

मोदी सरकार ने वही स्पेक्ट्रम उचित मूल्य पर बेचे तो देश को सत्तर हजार करोड़ से अधिक का लाभ हुआ. इन रुपयों से रक्षा सौदों में तेजी आई और अन्य विकास कार्यों को भी गति मिली.

राजा और अन्य आरोपियों को सीबीआई न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में बरी किया है. इससे कांग्रेस की करतूतों का रंग उजला नहीं हो जाता.

मनमोहन सिंह की नाक के नीचे कामनवेल्थ गेम्स में घोटाला हुआ, कोयला घोटाला हुआ और रागा बाबा के जीजा जी ने भी रासलीला रचाई. इन्होंने न केवल देश को लूटा बल्कि लूट होते देखते भी रहे.

देश को मिलने वाले लाभ में कमी होना भी घोटाला है क्योंकि यह तेजी से हो रहे विकास में बाधा उत्पन्न करता है.

इस घोटाले में साथ देने वाले लोग सह-अपराधी (accomplice) हैं. 2G घोटाले का केस यूपीए सरकार के समय ही न्यायालय पहुँचा था.

सम्भव है कि आज अपनी पीठ थपथपाने वाली कांग्रेस ने मनमोहन को बचाने के लिए तत्कालीन जाँच एजेंसियों से राजा और अन्य के विरुद्ध किंतु कमजोर केस बनाने को कहा हो जिसका परिणाम आज आया सीबीआई का अप्रत्याशित निर्णय है.

इस केस में मोदी सरकार का हस्तक्षेप तो अब होगा जब इसे उच्च न्यायालय में ले जाया जायेगा.

कोई कुछ भी कहे, मैं अपने प्रधानमंत्री के साथ खड़ा हूँ. आपको भाजपा पसन्द हो या न हो किंतु हल्ला मचाकर विकास के रास्ते पर अनावश्यक बाधा उत्पन्न मत कीजिए.

यूपीए सरकार के समय खुल्लमखुल्ला जो अनियमितताएँ होती थीं वह मोदी सरकार में नहीं होती… न होगी.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY