राकेश शर्मा और कृष्ण

यदि टीवी धारावाहिक रामायण के ‘राम’ अरुण गोविल उससे पहले पांच फिल्मों में बलात्कारी विलेन का किरदार निभा चुके होते तो क्या रामानंद सागर उन्हें इस किरदार के लिए अनुबंधित करते. आपमें से अधिकांश का जवाब ना ही होगा. बात सीधी सी है कि पांच फिल्मों के बाद अरुण गोविल की छवि ऐसी नहीं रह जाती कि उन्हें राम के किरदार के लिए चुना जाता. बाहुबली का उदारहण सामने हैं. राजामौली ने अपनी फिल्म में लिए जाने वाले कलाकारों की सामाजिक छवि तक का ध्यान रखा.

आज दो ख़बरें आई हैं. पहली है शाहरुख़ खान ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा पर बनने जा रही ‘बायोपिक’ के लिए हाँ कह दिया है और दूसरी सुनकर आपके माथे पर बल पड़ जाएंगे. मिस्टर आमिर खान ‘महाभारत’ पर एक सीरीज बनाने की तैयारी तेज़ी से कर रहे हैं. जैसे ही उनकी आगामी फिल्म ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान’ का काम पूरा होगा, महाभारत की कास्टिंग पर काम शुरू हो जाएगा. राकेश शर्मा पर बनने वाली फिल्म का शीर्षक ‘सैल्यूट’ हो सकता है. इस फिल्म को सिद्धार्थ रॉय कपूर और महेश मथाई बना रहे हैं.

दोनों को ही ‘बायोपिक’ बनाने का कोई अनुभव नहीं है. ये दोनों ऑफर लेकर आमिर के पास गए थे लेकिन आमिर महाभारत प्रोजेक्ट में व्यस्त हैं. आमिर ने इनको शाहरुख़ का नाम सुझा दिया. आमिर तो फिर भी अपने किरदार को निभाने से पहले स्टडी करता है लेकिन किंग खान तो बिना कुछ पढ़े-लिखे, किरदार की गहराई जाने बगैर शूटिंग में कूद पड़ते हैं और यहीं कारण है कि वे अपनी हर फिल्म में एक जैसे, दस हज़ार बार देखे गए ‘शाहरुख़’ ही प्रतीत होते हैं. किरदार की गहराई से उनको कोई ख़ास मतलब नहीं होता. ‘मैथर्ड एक्टिंग’ से उन्हें कोई सरोकार नहीं होता.

राकेश शर्मा ने 1984 में अंतरिक्ष में जाने का कारनामा किया था. वे अंतरिक्ष में सात दिन, इक्कीस घंटे और चालीस मिनट बिताने वाले पहले भारतीय हैं. वैसे किंग खान को इससे क्या लेना-देना. उनको तो ‘रोमन इंग्लिश की हिन्दी’ में लिखे डायलॉग बोलने भी नहीं, केवल पढ़ने हैं. फिर जब वे परदे पर राकेश शर्मा बनकर आएँगे तो हमें रईस फिल्म का संवाद याद आएगा ‘ बनिए का दिमाग और मियांभाई की डेरिंग’. मैंने ऊपर भी कहा ‘इमेज’ ही सब कुछ होती है.

सिर्फ लुक बदल देने से लोगों की याददाश्त नहीं बदलती, उसके लिए आपको बलराज साहनी होना पड़ेगा, जिन्होंने हाथरिक्शा वाले का किरदार निभाने के लिए कलकत्ते में सचमुच हाथरिक्शा खींचा था, उन लोगों के बीच रहे थे. और दुनिया जानती है कि ‘दो बीघा ज़मीन’ में निभाया गया उनका किरदार भारतीय सिनेमा की थाती बन गया.

अब आमिर खान की महाभारत पर आते हैं. बाहुबली की विश्वव्यापी सफलता ने हिन्दी फिल्म उद्योग के सारे पूर्वाग्रह ध्वस्त कर दिए हैं. बाजार के बदलते रुख को आमिर ने भांप लिया है और चुपके-चुपके इसकी तैयारी कर रहे हैं. इन दिनों वे असमंजस की स्थिति में हैं. उनको समझ नहीं आ रहा कि महाभारत में वे कृष्ण का किरदार निभाए या कर्ण का. कहा जा रहा है कि राकेश शर्मा की बॉयोपिक उन्होंने इसलिए छोड़ी क्योंकि वे महाभारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाने जा रहे हैं.

यहाँ भी प्रश्न ‘छवि’ का है. पिछली फिल्म ‘द सीक्रेट सुपरस्टार’ में वे संगीतकार थे और उनके माथे पर ‘पीके’ का कलंकित विवाद भी सजा हुआ है. ऐसे में ‘कृष्ण’ का चरित्र निभाना खतरे से खाली नहीं होगा. मामला गंभीर है और सीधा हमारे पौराणिक चरित्रों की गरिमा से जुड़ा हुआ है. क्या कहानी है, कहानी के सोर्स क्या है, हम कुछ नहीं जानते. एक ऐसा फिल्मकार जिसने पूर्व में हिन्दू संस्कृति पर अपनी फिल्म से प्रहार किया हो, वो इस प्रोजेक्ट को कैसे प्रस्तुत करेगा कोई नहीं जानता.

जिन हिन्दुओं को रिझाने के लिए आमिर ने जानबूझकर अपनी फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ पिटवाई है, उन्हें सच्चाई का अंदाज़ा ही नहीं है. आमिर ने अपनी सबसे छोटी ऊँगली इसलिए कटवाई क्योंकि आप उन्हें ‘पीके’ के लिए माफ़ कर दे. एक बार आपने माफ़ कर दिया तो उन्हें सुदर्शन चक्र धारण कर कृष्ण बने देखने में आसानी होगी. कई दर्शकों ने इसलिए माफ़ कर दिया क्योकि उन्होंने पिछली फिल्म में तलाक प्रथा और मुस्लिम महिलाओं की दयनीय स्थिति दिखा दी थी.

सलमान ला रहे हैं ‘लवरात्रि’, आमिर ला रहे हैं ‘महाभारत’ लेकिन देश का सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय क्या कर रहा है. पद्मावती बनती रही, मंत्रालय सोता रहा. विवाद हुआ तो फिल्म की रिलीज रोककर फिर सो गया है. ऐसा अनुमान है कि लवरात्रि के प्रोमो जब टीवी पर चलने लगेंगे, तब शायद मंत्रालय कुनमुनाकर जाग जाए. जगाइए इस मंत्रालय को.

फोटो दो बीघा ज़मीन का है. आज यदि हमारे पास युवा बलराज होते तो राकेश शर्मा का किरदार खुद ही मांगने चले आते. फिर वे छह माह तक केवल ‘राकेश’ ही बने रहते, बलराज खो जाता. तब कहीं जाकर वे शूटिंग शुरू करते. बलराज का ज़िक्र इसलिए आया क्योंकि वे इस किरदार को महान ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते थे.

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