आयुर्वेद आशीर्वाद : अंजीर

अंजीर एक ऐसा फल है जो और फलों की भांति फल मंडी में नहीं बल्कि किराना व पंसारी की दुकान पर मिलता है. इसके फलों को सुखाकर फूलों की माला की तरह गूँथा जाता है. अंजीर एक सुखा हुआ फल है, अंजीर के अंदर बहुत सारे अनगिनत बीज होते हैं. अंजीर के पेड़ अधिकतर गर्म देशो में पाए जाते हैं.

अंजीर के पेड़ों को लगाने के लिए चुने जाने वाली भूमि अत्यधिक उपजाऊ होती है. इस भूमि पर अंजीर की पैदावार बहुत अच्छी मात्रा में होती है. अंजीर के कच्चे फल का रंग हरा होता है एवं पके हुए का रंग पीला या बैंगनी होता है. अंजीर के फल के अंदर का रंग बहुत ही लाल होता है. इसका वृक्ष मध्यम आकार को होता है. पत्ते चौड़े तथा हृदयाकार होते हैं. अंजीर पहाड़ों पर खूब पैदा होता है. इसमें वर्ष में दो बार फल आते हैं − जून−जुलाई तथा इसके बाद जनवरी मास में.

अंजीर को संस्कृत में फल्गु, पंजाबी में किमरी फगवारा, तेलगु मलयालम में शिमि अट्ठी, अंग्रेजी में कॉमन फिग, तमिल में तेनत्ति तथा मलयालम में सिभयत्ति, वहीं लेटिन नाम फाइकस कैरिका है.

अंजीर औषधीय रूप से काफी महत्वपूर्ण है.

अंजीर को रात में पानी मे गलाकर सुबह लेना काफी लाभदायक होता है. आयुर्वेद के अनुसार थोड़ी मात्रा में खाए जाने पर अंजीर पाचक, रूचिकर और हृदय के लिए हितकर होता है. जिन लोगों को होंठ, मुख फटने की शिकायत होती है उनके लिए ताजा या सूखा अंजीर लाभदायक होता है. अंजीर का सेवन दूध के साथ करने से डाइबिटीज कंट्रोल होती है, साथ ही कब्ज दूर हो जाती है.

अंजीर का सेवन टी.बी. के रोगी के लिए बड़ा फायदेमंद है, वहीं दमारोगी जिन्हें कफ (बलगम) निकलता हो, उनके लिए अंजीर खाना बड़ा लाभकारी होता है. इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को शीघ्र ही आराम भी मिलता है. बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन लाभकारी होता है. मुंह में छाले हो तो अंजीर का रस छालों पर लगाने से शीघ्र आराम मिलता है.

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