भाजपाइयों, हमेशा बचाने नहीं आएंगे मोदी

2017 का पंजाब का चुनाव मैंने बड़े नज़दीक से देखा. राजनैतिक दल और मीडिया मिल जुल के कैसे narrative build करते हैं ये देखा.

Anti incumbency क्या होती है ये देखा. पंजाब चुनाव से पहले drugs का मामला बड़े ज़ोर शोर से उठा. पूरे दो साल तक चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ एक ही चर्चा थी… चिट्टा… drugs…

ऐसा प्रचार किया गया कि पूरी बादल सरकार ही खुद drugs बेच रही है… फिर पंजाब के कुछ इलाकों में अचानक गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं होने लगी. गुरु ग्रंथ साहिब के पन्ने फटे हुए पाए जाने लगे. 4 जिलों में अचानक तनाव फैल गया.

ये सारा narrative कनाडा इंग्लैण्ड में बैठे खालिस्तानी आम अमरूत पार्टी के माध्यम से कंट्रोल कर रहे थे. पर सरकार के खिलाफ नाराजगी का असली कारण anti incumbency ही था.

Anti incumbency से ग्रस्त किसी भी सरकार के खिलाफ कोई भी भावनात्मक मुद्दा खड़ा कर रातों रात माहौल खराब किया जा सकता है… कांग्रेस इस काम में माहिर है… कांग्रेस ने हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के बहाने आग लगाई, मप्र में किसान आंदोलन के बहाने, गुजरात मे पटेल आरक्षण के बहाने…

पंजाब चुनाव हुए 9 महीने बीत गए. इस समय यहां अमन चैन पूरी तरह कायम है. इस समय यहां नगर निगम और स्थानीय निकायों के चुनाव चल रहे हैं. आम आदमी पार्टी परिदृश्य से बिल्कुल गायब है.

अब पंजाब में कोई भी drugs की समस्या पे एक शब्द भी नहीं बोलता. कोई नाम तक नहीं लेता. मैं पूरा देश घूमता हूँ. दूर दराज के क्षेत्रों में जाता हूँ. पंजाब भारत के सर्वाधिक विकसित और सबसे ज़्यादा well governed state है.

सही मायने में पंजाब इतना उन्नत है कि गुजरात और तमिलनाडु जैसे विकसित राज्य भी इसके आगे पानी भरते हैं. यहां की सरकारों के सामने सिर्फ एक चुनौती है… उद्योग…

पंजाब की इंडस्ट्री विभिन्न कारणों से हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और गुजरात पलायन कर रही है… कारण है इन राज्यों में मिलने वाले incentives, tax rebates, सस्ती ज़मीनें, सस्ती लेबर, सस्ता raw material, और ports…

पंजाब का किसान देश का सबसे सम्पन्न किसान है. प्रति एकड़ प्रति वर्ष 75,000 से ले के सवा लाख रूपए तक का return ले लेता है अपने खेत से… इतना सब होने के बावजूद anti incumbency जब होती है तो अच्छी से अच्छी लोकप्रिय सरकार को भी नानी याद करा देती है जनता जनार्दन.

गुजरात में तो भाजपा 22 साल की anti incumbency झेल रही थी. 22 साल में गुजराती कांग्रेस का कुशासन भूल गए हैं? माना कि आज का गुजराती युवा तब पैदा भी नहीं हुआ था या अभी बहुत छोटा था… पर सौराष्ट्र के किसान कैसे भूल गए कांग्रेस के कुशासन को?

आज सौराष्ट्र में पानी की भरमार है. वो सौराष्ट्र जो कल तक एक-एक बूंद पानी के लिए तरसता था आज वो कृषि में पंजाब के मुकाबले खड़ा है… किसान इसके बावजूद नाराज है? नर्मदा का पानी अब तक खेतों में नहीं पहुंचा तो इसके लिए जिम्मेवार कौन?

मोदी… या काँग्रेस जिसने आज तक बाँध की ऊंचाई नहीं बढ़ने दी? मोदी, मनमोहन सिंह से कहते रह गए पर उन्होंने बाँध पे फाटक लगाने ही नहीं दिए. मोदी जी ने पीएम बनते ही 15 दिन के भीतर बाँध पे फाटक खड़े करने का काम चालू करा दिया पर किसान फिर भी भाजपा से नाराज है कि मेरे खेत मे नर्मदा का पानी नहीं पहुंचा?

इस नाराजगी के मूल में झांकिये, इसके पीछे आपको anti incumbency ही दिखाई देगी. जब तक तो मोदी खुद सीएम थे उन्होंने गुजरात को सम्हाले रखा. उनके हटने के बाद शून्य आना स्वाभाविक था.

वो तो मोदी का कौशल है, वो राजनीति के इतने माहिर खिलाड़ी हैं कि कैसे भी उन्होंने अंततः गुजरातियों को मना ही लिया…

रो के, गा के, भावनात्मक कार्ड खेल के, बेटा बन के, पाकिस्तान का भय दिखा के, हिंदुत्व कार्ड खेल के, नीच शब्द पकड़ के, चाहे जैसे मना ही लिया…

वरना मैंने anti incumbency के सामने लाचार हताश देखा है बादल साहब जैसे राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी को भी…

आज इस विपरीत माहौल में भी भाजपा अगर 99 सीट ले आयी, अगर आज भाजपा गुजरात में लगातार छठी बार चुनाव जीत रही है तो इसका पूरा श्रेय भाजपा संगठन, पन्ना प्रमुख से ले के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक, और हम सबके हरदिल अज़ीज़ मोदी जी को जाता है जिन्होंने एक हारा हुआ चुनाव जिता दिया…

यहां पंजाबी में एक लोकगीत है…

कंजरी (वेश्या) बण्यां मेरी इज़त न घटदी
मैन्नू नच के यार मनावण दे…

नाराज वोटर को मनाने का हुनर जो मोदी में है वो किसी में नहीं…

वो नाच के, रो-गा के, प्यार से पुचकार के, भाई बन के बेटा बन के, नीच बन के, चाय वाला बन के, पिछड़ा दलित बन के, हिन्दू बन के, गुजराती अस्मिता जगा के, चाहे जैसे… अपने वोटर को मना ही लेंगे, ये इस चुनाव में उन्होंने दिखा दिया है…

पर इसके साथ ही, स्थानीय भाजपा को एक बड़ा सबक मिल गया है… वोटर से जुड़ाव न टूटे, किसान की अनदेखी महंगी पड़ेगी… हमेशा मोदी बचाने नहीं आएंगे.

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