‘कोई भी लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, और हारा वही जो लड़ा नहीं’

शानदार… ज़बरदस्त… जिंदाबाद… जी हाँ… आज ये शब्द और तारीफें ना तो एक व्यक्ति विशेष के लिए है, ना ही एक विचारधारा या सोच के लिए और ना ही किसी पार्टी के लिए…

ये शब्द हैं उस भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जिस पर एक विचारधारा थोपी नहीं जा सकती… गुजरात और हिमाचल के चुनावों के नतीजे आज आ गए… इन नतीजों से बहुत कुछ सीखने समझने की ज़रूरत है…

कुछ भी कहिये… लाख विरोध कीजिये… लाख आलोचना करिये… लेकिन फिर भी मैं राहुल गाँधी को बधाई देना चाहूँगा जिन्होंने अपनी पार्टी की तरफ से अकेले मोर्चा संभाले रखा… और 61 सीट से अपनी पार्टी को गुजरात में 80 सीट तक ले आये.

इसके लिए राहुल गांधी निश्चित रूप से बधाई के पात्र है… मणिशंकर अय्यर और कपिल सिब्बल वाले विवादों के बावजूद राहुल गांधी ने बेहद सधे और आक्रामक ढंग से अपने प्रचार कैम्पेन को आगे बढाया और अपनी पुरानी नकारात्मक राजनीति करने वाली छवि से खुद को बाहर निकाला…

और मैं निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि सॉफ्ट हिंदुत्व को अपनाने से जो राहुल गाँधी और कांग्रेस को फायदा मिला है उसे राहुल एक सबक के रूप में लेकर अपनी आगे की राजनीति भी सॉफ्ट हिंदुत्व पर ही लड़ेंगे…

लेकिन इस बार एक चीज़ थी जो गुजरात चुनावों में देखने को नहीं मिली और वो थी गोल जालीदार सफ़ेद टोपी और मस्जिद जाने की होड़… पूरे चुनावों में मुसलमानों की बात दोनों में से किसी भी दल ने नहीं की… वही मुसलमान, जिसे गुजरात में अपने पक्ष में करने के लिए लोग किस भी हद तक गिर जाते थे ….

खैर जो भी हो कुल मिलाकर राहुल गाँधी इस चुनाव में पहले से परिपक्व नेता बन कर उभरे हैं. बस उन्हें अपनी भाषण शैली और टाइमिंग पर ध्यान देना होगा अन्यथा उनका मज़ाक आलू की फैक्ट्री और आलू से सोना बनाने वाली मशीन को लेकर उड़ाया जाता रहेगा…

अब आते हैं विनिंग पार्टी यानी भारतीय जनता पार्टी पर… 22 साल की एंटी इनकम्बेंसी… gst… नोट बंदी… पाटीदार आन्दोलन… मुख्यमंत्री रुपानी और पूर्व में आनंदी बेन जैसा लचर नेतृत्व के बाद भी अगर आप 99 सीट यानी बहुमत से 7 सीट ज्यादा जीतते हैं तो निश्चित रूप से भाजपा और मोदी जी बधाई के पात्र हैं…

आप मानिये या ना मानिये… इस जीत में सिर्फ दो लोगों ने अपना किरदार निभाया है… एक मोदी जी दूसरा अमित शाह… मैं दावे के साथ कह सकता हूँ अगर मोदी जी ने अंतिम समय में अपनी ताकत ना झोंकी होती तो आज कांग्रेस बहुमत से गुजरात में अपनी सरकार बना रही होती…

इस बीच हिमाचल में भी भाजपा को शानदार जीत मिली है… इसके लिए भी वो बधाई की पात्र है… मोदी जी ने जब 2014 में सत्ता संभाली थी तो भाजपा केवल 8 राज्यों में थी, आज भाजपा अपने और अपने सहयोगी दलों के साथ 19 राज्यों में सत्ता मे हैं…

राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति भी भाजपा के ही सदस्य रहे हैं… इसके साथ राज्य सभा में भी भाजपा का बहुमत हो गया है… इसलिए भाजपा को समझना चाहिए कि उसकी जिम्मेदारी अब और बढ़ जाती है…

गुजरात में पिछले चुनावों में भाजपा को 112 सीटें मिली थी आज वह 99 पे है, कांग्रेस को 61 सीट मिली थी आज कांग्रेस ने 80 सीटें हासिल की है… अगर भाजपा ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया तो ये एक बड़ा गेम चेंजर आगामी चुनाव में बन सकता है…

भाजपा को समझना होगा कि सिर्फ योजनायें बना कर ज्यादा देर तक किसी को बहला नहीं सकते… जनता को ठोस नतीजे चाहिए… राम मंदिर पर अगर भाजपा ने अपना पुराना राग अलापना नहीं छोड़ा तो भाजपा को 2019 मे और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा…

इसके साथ साथ gst जैसी चीजों को सरल बनाना होगा… किसानों के मुद्दों पर ध्यान देना होगा… क्योंकि ग्रामीण इलाकों में भाजपा कमज़ोर हो रही है…

खैर अंत में यही कहूँगा, जो जीता वो सिकंदर और जो हारा वो भी सिकंदर से कम सम्मानित नहीं होना चाहिए… जीत जीत होती है… चाहे वो छोटी हो या बड़ी… मुश्किल से मिली हो या आसानी से… दुनिया हार का इतिहास नहीं जीत का इतिहास पढना चाहती है… जीतता वही है जिसमें हार का डर नहीं जीतने का जूनून होता है…

और अंत में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों से मैं यही कहना चाहता हूँ कि हार और जीत से उत्साहित या निराश मत होइए… भारत रत्न अटल जी के शब्दों में, ‘कोई भी लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं और हारा वही जो लड़ा नहीं’.

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