राहुल खुद तो दिल्ली गए और गुजरात काँग्रेस के पास छोड़ गए तीन बंदर

स्वयं एक Professional Sportsman, एक Coach और 3 खिलाड़ियों का पिता होने के नाते मैं Doping और Performance पे Dope के तात्कालिक और दीर्घकालिक प्रभावों को खूब समझता हूँ.

जिन Games में Skill की अपेक्षा Power और Strength Endurance का ज़्यादा महत्व होता है वहां तो एक जिला स्तरीय Dopey खिलाड़ी भी National Champion के लिए मुसीबत बन जाता है. Weight Lifting जैसी games में यही होता है.

डोप लेने से सिर्फ 3 महीने में ही Snatch और Clean n Jerk में 20 से 30 किलो तक का इजाफा होता है और एक दोयम दर्जे का खिलाड़ी भी Champion के बगल में आ खड़ा होता है.

ऐसे में अगर Dope Test न हो तो अपना खिताब बचाये रखने के लिए चैंपियन खिलाड़ी को भी dope लेना पड़ जाता है.

Dope लेने के बाद खिलाड़ी ऐसे फूलता है जैसे गुब्बारे में किसी ने हवा भर दी हो… और वही Dope बंद करते ही वही खिलाड़ी ऐसे सूखता है जैसे गुब्बारे से किसी ने हवा निकाल दी हो…

मैंने एक राष्ट्रीय champion ShotPut और Discuss Thrower को Dope छूटने के बाद 130 किलो से 90 किलो का होते देखा है.

गुजरात में कांग्रेस की Performance जातिवादी (आरक्षण) आंदोलन के Dope का परिणाम है. काँग्रेस के Fundamentals में कोई change नहीं आया है. उनके Basics जस के तस हैं.

तमाम खेल तमाशे और Dope के बाद अपनी tally में बमुश्किल 7 या 8 सीट का इजाफा कर पाई है. ये वृद्धि भी अल्पेश – जिग्नेश – हार्दिक का इंजेक्शन (Dope) ले के हासिल हुई है.

2012 के जो 60 विधायक थे उनपे एकछत्र मालिकाना हक कम से कम कांग्रेस का तो था… आज जो 70 विधायक जीत के आएंगे वो तो 4 जगह बंटेगे!

चुनाव अभियान शुरू हुआ तो राहुल बाबा ने गुजरात कांग्रेस के पुराने नेताओं, शक्ति सिंह गोहिल, अर्जुन मोढवाडिया, और भरत सोलंकी को दरकिनार कर हार्दिक- अल्पेश – जिग्नेश को सिर पे बैठा लिया.

नतीजा ये हुआ कि सोलंकी लड़े नहीं, गोहिल और मोढवाडिया हार गए और अल्पेश जिग्नेश जीत गए.

गुजरात कांग्रेस के पास क्या बचा? बाबा जी का ठल्लू? राहुल जी खुद तो दिल्ली गए और गुजरात काँग्रेस के पास छोड़ गए तीन बंदर… लो बेटा सम्हालो और नचाओ…

आज जो काँग्रेस गुजरात मे गुब्बारे की माफिक फूली फूली सी नज़र आती है, ऐसे ही एक बार यूपी में फूली थी… 2009 में… जबकि कल्याण सिंह के सपा में आने से नाराज मुसलमानों ने मुल्लायम जादो को झटका देते हुए कांग्रेस को वोट डाला.

नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस 22 सांसद जिता लायी. मीडिया नंगा नाचने लगा… राहुल के हाथ जीत का जादुई फॉर्मूला लग गया. कांग्रेस यूपी में सरकार बनाने के सपने देखने लगी…

पर 2012 में मुसलमान वापस सपा में चला गया और काँग्रेस पुनर्मूषकोभव होती हुई 22 सीट पे आ गयी… मुस्लिम वोट के Dope से फूला गुब्बारा पंचर हो गया.

आज जो 70 सीट्स आती दीख रही हैं इस से बहुत उम्मीदें पालने की ज़रूरत नहीं. जमीन पे कुछ नहीं बदला है. गुब्बारा पिचक जाएगा जल्दी ही… 2019 में यही गुजरात फिर शत-प्रतिशत सीटें देगा मोदी जी को.

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