“जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, जो होगा वो भी अच्छा ही होगा”

गीता में लिखे इस वाक्य का हम सभी ने जीवन ने कभी न कभी अनुभव किया होगा. अक्सर किसी बुरी घटना के होने पर हम मायूस, दुखी हो जाते हैं लेकिन इन्हीं घटनाओं में भविष्य की बहुत सी अच्छी बुरी घटनाओं की नींव ईश्वर रख देता है जिसे हम उन वक़्त नहीं समझ पाते हैं लेकिन अपने जीवन में भी आप अपने साथ हुई किसी ऐसी ही घटना को याद करेंगे तो पायेंगे कि तात्कालिक दुख के बाद उस घटना ने बाद में आपको सुखद परिणाम ही दिए हैं.

ऐसी ही एक दुखद घटना थी ‘गोधरा कांड’ इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया, चूँकि ये घटना गुजरात में घटी थी तो इसने अपना रौद्र रूप भी वहीं दिखाया. 59 निहत्थे लोगों को ट्रेन की बोगी में जिंदा जला दिया गया, उनके बच निकलने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए थे.

ये अपने आप में एक विलक्षण घटना थी. नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बने भी ज़्यादा लंबा समय नहीं हुआ था. काँग्रेस राज में शोषित पोषित धर्म विशेष के लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया था.

इस घटना की प्रतिक्रिया भी ज़बरदस्त हुई और समूचा गुजरात दंगों की आग में झुलस गया. चूँकि इन दंगों में मरने वाले मुसलमान ज़्यादा थे तो सेकुलरिज़म के नाम पर सिर्फ मुसलमानों की पैरवी करने वाली काँग्रेस, तमाम सेकुलर दल और काँग्रेस द्वारा पोषित मीडिया, पत्रकार तब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पीछे ऐसे पड़े और ऐसी दुश्मनी पाली कि इनको पाकिस्तान से भी बड़ा दुश्मन नरेंद्र मोदी नज़र आने लगे.

फिर हो गया इशरत जहाँ का एनकाउंटर और इस एनकाउंटर ने काँग्रेस की इस नफरत की आग में घी डालने का काम किया और देश के इतिहास में ये पहली बार हुआ कि किसी राज्य के गृहमंत्री (अमित शाह) को जेल में डाल दिया गया.

मोदी और शाह को कानूनी रूप से, सार्वजनिक रूप से, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का कोई अवसर काँग्रेस और मीडिया ने नहीं छोड़ा. लेकिन इन सबसे विचलित हुए बिना मोदी गुजरात के विकास की गाथा लिख रहे थे.

देखते ही देखते गुजरात का कायाकल्प हो गया. काँग्रेस राज में वर्षों तक हर साल दंगों की आग में झुलसने वाला गुजरात 2002 के इन दंगों के बाद फिर कभी नहीं झुलसा. बल्कि गुजरात ने पूरे देश को विकास की एक नई राह दिखाई. गुजरातियों ने अच्छे माहौल का पूरा फायदा उठाया और गुजरात का नाम देश के सबसे उन्नत प्रदेशों की सूची में लाकर रख दिया.

मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने सभी तीनों चुनावों में जीत दर्ज की, काँग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति गुजरात में लगातार फेल होती रही.

फिर आया 2014 का लोकसभा चुनाव भाजपा ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया तो काँग्रेस और मीडिया को लगा कि भाजपा ने एक बार फिर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है.

काँग्रेस ने मोदी के लिए तमाम अपशब्दों, 2002 दंगों की यादों का सहारा लिया लेकिन नतीजे काँग्रेस की सोच के उलट आये. देश की जनता ने वर्षों बाद मोदी के नेतृत्व में भाजपा को पूर्ण बहुमत से चुन लिया.

इसके बाद से अनेक राज्यों में चुनाव हुए जिनमें से ज़्यादातर में भाजपा ने जीत दर्ज की. अमित शाह जैसा ज़बरदस्त रणनीतिकार और मोदी जैसा करिश्माई नेता आज किसी भी दल के पास नहीं है. अपने साथ हुए तमाम अत्याचार, अपमान का बदला मोदी-शाह की ये जोड़ी काँग्रेस और दलाल मीडिया से बारबार और बराबर ले रही है.

इनकी कोई काट किसी भी दल के पास नहीं है. वे उन तमाम लोगों और एजेंसियों को भी आजमा चुके जिन्होंने कभी मोदी-शाह के लिए काम किया था. काँग्रेस को लगता है कि जादू मोदी-शाह का नहीं बल्कि इन एजेंसियों का है लेकिन नतीजा वही शून्य क्योंकि असली काम मोदी और शाह ही करते हैं.

लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण काँग्रेस में अहंकार भी बहुत गहरे घर कर चुका है. इसीलिए लंबे समय तक विपक्ष में रही भाजपा को वो दोयम दर्जे का ही समझती रही और खुद हाशिये पर जाती रही.

काँग्रेसी नेताओं के बड़बोलेपन, स्वयं को आज भी सरकार का हिस्सा समझकर चीन और पाकिस्तान के राजदूतों से चोरी छिपे मिलना, फिर उसका खंडन करना और पोल खुलने पर बेशर्मी से अपनी मुलाकात को सही ठहराना ये सब काँग्रेस को भारी पड़ गया.

रही सही कसर राहुल गाँधी अपने हास्यास्पद भाषणों, बयानों से कर ही देते हैं. हमेशा सिर्फ मुसलमानों की हिमायत करने वाली काँग्रेस ने इस पूरे चुनाव में 2002 दंगों का ज़िक्र करना तो दूर बल्कि खुद को हिन्दू, जनेऊधारी ब्राह्मण साबित करने, मंदिर-मंदिर जाने में ही अपनी पूरी ताक़त झोंक दी.

काँग्रेस के नेता मोदी को ढीली गेंदें फेंकते रहे और मोदी उन पर छक्के उड़ाते रहे. देश की सबसे पुरानी, सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली पार्टी आज कभी वोटिंग मशीनों को तो कभी चुनाव आयोग को ही दोषी बता रही है.

काँग्रेस लेकिन ये नहीं देख रही कि इतने वर्षों तक उसने देश में जो जाति, धर्म के नाम पर ज़हर के बीज बोए, देश की प्रगति को रोके रखा, जमकर भ्रष्टाचार किये, बेगुनाहों पर अत्याचार किये, कश्मीर विवाद को अपनी राजनीति के चलते उलझाए रखा कश्मीर में आतंकियों के खात्मे की बजाय उनको फलने फूलने के अवसर प्रदान किये, आतंकियों के मरने पर आँसू बहाये, हिंदुओं को, हिंदुत्व को चोट पहुँचाते रहे और अनगिनत षड्यंत्र अपने ही देश और जनता के खिलाफ रचते रहे, उसी का परिणाम है कि आज काँग्रेस दर दर की ठोंकरे खाने और लगातार पराजय का मुँह देखने को मजबूर हो गई है.

गोधरा के उन 59 कारसेवकों का बलिदान आज सार्थक हो गया है क्योंकि आज हो रहे इस पूरे घटनाक्रम की नींव यही एक घटना थी.

शायद रामजी की यही इच्छा थी, उन 59 कारसेवकों को प्रभु ने ही इस कार्य के लिए चुना था. उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. इस दुखद घटना की नींव पर सुखद, उज्ज्वल, मज़बूत, उन्नत भारत की इमारत खड़ी हो रही है. रामलला भी जल्द ही तंबू से निकलकर आलीशान मंदिर में विराजमान होंगे.

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