राहुल की कच्ची राजनीति का सबूत है अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवानी की जीत

एक प्रतिष्ठित वेब पोर्टल लिखता है कि काँग्रेस के लिए अच्छी खबर… अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवानी जीत गए.

मेरा ये मानना है कि ये गुजरात काँग्रेस के लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है कि अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवानी जीत गए और शक्ति सिंह गोहिल, अर्जुन मोढवाडिया, सिद्धार्थ पटेल (पूर्व मुख्यमंत्री चिमन भाई पटेल के पुत्र) हार गए और भरत सिंह सोलंकी लड़े ही नहीं…

130 साल पुरानी काँग्रेस का इस से बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि गुजरात काँग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता नेता सिर्फ एक महीने के भीतर हाशिये पे धकेल दिए गए…

और जीत का सेहरा हार्दिक – अल्पेश – जिग्नेश के सिर बँधा… ये तीनों एक अराजक आंदोलन की उपज हैं… इनका जन्म ही अराजकता से हुआ है…

एक अभी सिर्फ 23 साल का है और बाकी दोनों जीत के विधायक बन गए हैं. गुजरात काँग्रेस वो रोटी बन गयी है जिसमें हिस्सा बंटाने 3 जंगली बिल्लियां टकटकी लगाए हैं.

राहुल गांधी यहां बहुत बुरी तरह चूक गए. राजनीति का कोई माहिर खिलाड़ी होता तो जिग्नेश और अल्पेश को भितरघात कर हरवा देता.

हारा हुआ नेता डंक विहीन बिच्छू होता है. हार्दिक – अल्पेश – जिग्नेश की उपयोगिता समाप्त हो चुकी है.

राहुल गांधी को चाहिए था कि इसी चुनाव में ही तीनों में से कम से कम इन दो को तो निpटा ही देते.

अब राहुल गांधी में इतनी ताब, इतना राजनैतिक कौशल नहीं है कि इन तीन बिल्लियों को सम्हाल लें…

गुजरात काँग्रेस का बहुत नुकसान करने वाली हैं ये तीनों बिल्लियाँ.

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