राम सेतु पर आया वीडियो, बड़ी साज़िश का हिस्सा!

राम सेतु पर हाल-फिलहाल आये एक वीडियो के बाद कई हिन्दू इस बात को लेकर बड़े खुश हुये कि हमारे राम सेतु पर पश्चिम की मुहर लग गई. उनके द्वारा इसके प्राकृतिक न होने तथा मानवनिर्मित होने का सर्टिफिकेट दे दिया.

इस ख़ुशी में लोग ये भूल गये कि इसके साथ-साथ उन्होंने श्रीराम का काल-निर्धारण भी कर दिया और कह दिया कि “राम आज से करीब सात हज़ार साल पहले हुये थे”.

अब हिन्दुओं के साथ कई समस्याएँ हैं. पहली तो ये कि ये लोग हज़ार साल की गुलाम कौम हैं, दूसरा ये कि ज़रूरत से अधिक प्रगतिशील और वैज्ञानिक होने का दावा है, तीसरा ये कि हमको अपनी चीजें पश्चिम से सर्टिफाइड चाहिये. इसलिये मित्र राहुल सिंह राठौर को बड़ी हिम्मत करके ये लिखना पड़ा :

“वैज्ञानिक सोच को धारण करते हुए वह कैसे माने कि हमारे आराध्य भगवान श्रीराम सत्रह लाख साल पहले इस धरा पर अवतरित हुए थे। ऐसा कहते ही उसे घोर पुरातनपंथी और दकियानूसी सोच रखने वाला घोषित कर दिया जायेगा।”

विषय ये है कि राम के जन्मकाल को निर्धारित करने की ये नौटंकी शुरू किसने की? भारत में या यूं कहे कि हिन्दुओं में ही कई तबके हैं जो राम के काल को पांच से सात हज़ार साल में सीमित करने की बेवकूफियों के जनक हैं.

एक बड़ा नाम तो ‘आबू पहाड़’ वाले ब्रह्मकुमारियों का है जिनकी मूढ़ता ये कहती है कि ‘कृष्ण पहले हुये और राम बाद में आये’ जबकि गीता में भगवान ने स्पष्ट कहा है कि “शस्त्रधारियों में मैं राम हूँ”.

राम को सात हज़ार साल में सीमांकित करने वालों में दूसरी जमात कुछ ज्योतिषियों की है जो ग्रह-गोचर को मिलाकर राम का काल निर्धारित कर देतें हैं जबकि इन जाहिलों को ये नहीं मालूम कि ग्रहों का ये संयोग दुहराता रहता भी है.

तीसरी जमात में वो लोग हैं जो कहने को तो राम के भक्त है पर राम के साढ़े सत्रह लाख साल पहले होने की बात मानकर खुद को दकियानूस कहलाया जाना पसंद नहीं है.

जो लोग सेमेटिक मज़हब पर नज़र रखते हैं उनको पता है कि राम को कुछ हज़ार साल की परिधि में सीमांकित करने का मकसद क्या है. आपको भी इस विषय पर उस वीडियो के बाद कोई भ्रम न हो इसलिये कुछ तथ्यों से अवगत कराता हूँ.

सामी मज़हबों के मतानुसार समस्त मानवजाति आदम (एडम) और बीवी हव्वा (ईव) की संतान है. आदम और उनकी पत्नी हव्वा को खुदा/ अल्लाह के हुक्म की नाफरमानी की वजह से जन्नत से निकाल दिया गया था.

इस्लामी किताबों और हदीसों में ये दर्ज है कि जन्नत से निकाले जाने के बाद आदम सरांदीप (वर्तमान श्रीलंका) में उतारे गये थे और वहां से समुद्र पार कर एक ब्रिज होते हुये भारत आये थे.

इसी आधार पर ईसाई जगत राम सेतु को “एडम्स ब्रिज” और मुस्लिम उसे “आदम का पुल” कहतें हैं. अरब के बद्दू कथानकों तक में इसका जिक्र इसी रूप में है.

यानि हम हिन्दू जिसे “राम सेतु” मानते हैं ईसाई और मुस्लिम जगत उसे “एडम्स ब्रिज” कहता है.

राम को सात हज़ार साल की परिधि में सीमांकित करने की सोच के पीछे की वजह यही है कि उस पुल को आदम द्वारा निर्मित पुल घोषित कर दिया जाये. उस पुल का काल लगभग सात हज़ार साल ही क्यों लिया गया इसकी भी वजह है. ईसाई और इस्लामिक मान्यताओं के हिसाब से आदम का काल आज से लगभग सात-हज़ार साल पहले का था.

भविष्य पुराण ने भी स्पष्ट बताया है कि आठ हजार दो सौ दो वर्ष द्वापर युग के शेष रहने के समय आदम और हव्वा हुये थे. यानि हमारी काल-गणना भी आदम को ज्यादा से ज्यादा दस-ग्यारह हज़ार साल पूर्व मानती है और ईसाई और इस्लामिक मान्यता भी लगभग ऐसी ही है.

आदम को भारत के साथ जोड़ने को लेकर वो कितने कटिबद्ध हैं इसका पता आपको तब चलेगा जब आप दारूल-उलूम देबबंद के फतवा विभाग पर जायेंगें. वहां मांगे गये एक फ़तवे में पूछा गया था –

Assalamo Alikum mufti sahib! My question is whether there is any tradition that Holy Prophet (PBUH) felt breeze from India. Allama Iqbal has said something like that in his poetry; “MEERE ARAB TO AYE THANDI HAWA JAHAN SE MERE WATAN WOHI HAI.” Any tradition saying this?

Ans:- We could not find this Hadith, may be it is somewhere. But, it is surely known that the virtue of India has been mentioned in the traditions of the Prophet ( صلی لله علیہوسلم ). There is one Hadith saying that Hazrat Adam ( علیہ السلام ) was sent down to India.

[Darul Ifta, (Fatwa: 1257/1176-D/1429), Darul Uloom Deoband]

यानि सेमेटिक मज़हब वालों का उद्देश्य पहले आदम को हिन्द से जोड़ना है (ये कहते हैं कि तब श्रीलंका भी भारत का ही एक हिस्सा था) और फिर उसके बाद यहाँ अपने दावे को स्थापित करना है कि ये भारत तो हमारी आदि-भूमि है जहाँ हमारे पूर्व-पुरुष आदम आये थे और उन्होंने सरांदीप से भारत आने के लिये समंदर पर एक सेतु बाँधा था जिसका काल सात-हज़ार साल पहले होना और मानव-निर्मित होना प्रमाणित हो गया है.

राम सेतु को सात हज़ार साल की परिधि में सीमांकित करना आपके राम सेतु को छीनने और उसके ऊपर जबर्दस्ती का दावा करने की राह में पहला चरण है. आगे का खेल भी इसी तरह चरण-बद्ध रूप में होगा. आपको अभी समझ नहीं आ रहा है.

हमें अ-आधुनिक, पिछड़ी सोच वाला भले ही कोई कहे पर कम से राम के सेतु के काल-निर्धारण के इस मकरो-फ़रेब में न पड़ियेगा.

याद रहे आधुनिकता पालने और प्रगतिशील कहलाने के भ्रम ने हमसे पहले भी बहुत कुछ छीना है और आगे भी छीनने वाला है.

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