कैसे बनें कुकुरमुत्ता से मशरूम

यदि मैं आपसे कहूँ कि विश्व में “मशरूम” ने व्यक्तित्व विकास की तीव्र प्रक्रिया का जो उदहारण पेश किया है वह दुर्लभ और अनोखा है. यकीन करेंगे आप? आप चाहें लाख तुलना करके देख लें लेकिन आप पायेंगे कि पूरे विश्व में मशरूम एकमात्र ऐसा पौधा, सब्जी या कवक है जिसने अल्प समय में अपने व्यक्तित्व का गुणोत्तर विकास किया एवं साथ ही साथ उच्च एवं सम्मानित पद पर आसीन भी हुआ.

भला कौन यकीन करेगा कि कुकुरमुत्ता परिवार से निकला हुआ कोई नौजवान आज सब्जी बाज़ार में सबसे महंगे मूल्य पर खरीद फरोख्त किया जाता है. क्या हमारी आने वाली पीढ़ियाँ यह विश्वास कर पायेंगी कि जिसके सगे परिवार का एक सदस्य गोबर के घूर पर उपेक्षित और तिरस्कृत है, जिसका नामकरण ही इतना सुस्पष्ट है कि कि पांच वर्ष का बच्चा भी इसके नाम का संधि-विच्छेद करके उसमें कुत्ते और मूत्र दोनों का बोध करके उसे छूने मात्र से कतराता हो और उसी परिवार का एक युवराज विवाह एवं अन्य भोज उत्सवों में “मटर मशरूम”या “मशरूम दोप्याजा” बनकर सबकी थाली में ‘आकाश शर्मा’ की तरह ओपनर बैट्समैन बना बैठा है… उसे पूरे सब्जी के टीम में विराट कोहली वाला सम्मान और स्थान प्राप्त है.

मित्रों यही है आत्मसुधार की प्रक्रिया.. यही है स्वयं का मूल्य बोध… यही वह ताकत है कि व्यक्ति अपनी क्षमता की पहचान करे और खुद को शीर्ष स्थान पर स्थापित करे.

मुझे पता है मित्रों कि मशरूम बनना इतना आसान नहीं और जब पूरा व्यक्तित्व कुकुरमुत्ते की तरह छाता बनाकर गोबर के घूर पर खड़ा हो तब तो यह सोचना भी अपराध लगता है लेकिन हमारे बीच से खड़े होकर कुकुरमुत्ते ने यह करके दिखाया है और सिर्फ इतना ही नहीं किया, वह वहाँ से पदोन्नत होकर आम जन के स्पर्श में आया. उनकी थाली में जगह बनाया, उत्सव में टॉप रैंकिंग पाया यहाँ तक कि सर्वाधिक मूल्य धारण करके “सब्जी रतन” भी चुना गया.

मित्रों हमारे बीच मशरूम नजीर है कि हम उसका अनुसरण करें. अपनी हीनता को दरकिनार करके भीतर के गुणों को परिष्कृत करें.. उसे समाज में प्रकाशित करें. समाज को अपने मूल्य का बोध करायें.

सोचिए. व्यक्तित्व विकास की किसी पुस्तक अथवा लेख का यह शीर्षक रखना भी कितना कठिन और जोखिम भरा है कि “कैसे बने कुकुरमुत्ता से मशरूम” लेकिन जिसने यह करके या बनकर दुनिया को दिखा दिया वह कितनी “दृढ़ इच्छा शक्ति” और “ऊर्जा” का स्वामी होगा.. समाज की उपेक्षा और तिरस्कारों को ‘शक्ति और साधन’ बनाकर कैसे लड़ा होगा उसी समाज से? कैसे रसोईघर में घुसा होगा? कैसे निवाला बना होगा? कैसे सबकी जुबान चढ़ा होगा? कैसे बाज़ार का बादशाह बना होगा?

है न विचित्र.

तो भाईयों और बहनों. अगली बार जब मशरूम जी आपके घर में आये तो उन्हें ग्रीवा में उतारने से पहले उन्हें नमन करें, उनका अभिनन्दन करें… उनसे संवाद करें उनसे कुछ सीखें तब जाकर उनका निवाला बनायें.

सादर नमन मशरूम जी॥

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