हम सरकार से भी शेयर नहीं करते आधार डेटा : अजय भूषण पाण्डे

आधार भारत में जीवन का आधार बनता जा रहा है. पढ़ाई, राशन, मोबाइल, बैंकिंग आदि तमाम जगह अब इसकी जरूरत पड़ने लगी है. ऐसे में डेटा की प्राइवेसी और कुछ दूसरे विवाद भी उठने लगे हैं. इन्हीं मुद्दों पर राजेश मित्तल और अमित मिश्रा ने बातचीत की UIDAI के सीईओ अजय भूषण पाण्डे से:

Q. लोगों को लगता है कि बैंक अकाउंट से लेकर पीडीएस और प्रॉपर्टी की खरीद से लेकर सिम कार्ड तक, हर जगह आधार नंबर अटैच करवा कर केंद्र सरकार अपना शिकंजा नागरिकों पर कसने की कोशिश कर रही है. किसी सरकार-विरोधी शख्स को निपटाने के लिए सरकार आधार के जरिए उसका सारा कच्चा चिट्ठा खुलवा सकती है.

A. यह सोचना कतई गलत है. इसे आप ऐसे समझिए कि हर जानकारी अलग-अलग ब्लॉक में सुरक्षित है. उसका एक-दूसरे से कोई लिंक नहीं है. प्रॉपर्टी, बैंक अकाउंट, मोबाइल आदि से जुड़ा सारा डेटा एक जगह इकट्ठा नहीं है. बैंकों का खांचा अलग है, टेलिकॉम कंपनियों का अलग.

इन अलग-अलग खांचों में भी कोई संवेदनशील जानकारी नहीं है. मिसाल के तौर पर अगर आपने पैन को आधार से लिंक करवाया है तो हमारे पास यूजर के पैन डिटेल्स नहीं पहुंचते और न ही पैन अथॉरिटी के पास हमारे पास स्टोर जानकारी ही पहुंचती है. हम सिर्फ केवाईसी करते हैं. मतलब अगर कोई अथॉरिटी किसी शख्स के फिंगरप्रिंट लेकर हमसे इस बात को वेरिफाई करती है कि क्या अमुक शख्स वही है जिसका वह दावा कर रहा है तो हम यह जानकारी सिर्फ ‘हां’ या ‘नहीं’ में देते हैं. कभी-कभी जरूरत के मुताबिक शेयर करते हैं ये 5 जानकारियां भी: 1. नाम, 2. जन्मतिथि, 3. लिंग, 4. पता और 5. फोटो. इससे ज्यादा जानकारियां पहले आप फॉर्मों में भर देते थे.

Q. यह तो ठीक है कि बैंकों का खांचा अलग है, टेलिकॉम कंपनियों का अलग है लेकिन यह भी तो हो सकता है कि कोई एक मकसद के लिए हमसे e-kyc ले और दूसरे मकसद से इसका इस्तेमाल कर ले.

A. इस खतरे से निपटने के लिए आप पहले जरूर पता कर लें कि किस काम के लिए आपका आधार नंबर और फिंगरप्रिंट या आइरिस या e-kyc मांगा जा रहा है. कहां और किस वक्त पर उसका इस्तेमाल हुआ है, इस बारे में ईमेल आपके पास आ जाता है, अगर आपने आधार नंबर लेते वक्त ईमेल दिया हो. हम कुछ ही वक्त में एम-आधार मोबाइल ऐप में ऐसी सुविधा उपलब्ध करवाने वाले हैं, जहां आप पिछले 6 महीने में अपने इस्तेमाल किए हुए बायोमीट्रिक डेटा को ट्रेस कर सकेंगे.

आपको ऐप के जरिए यह पता चल जाएगा कि आपने कहां और किस वक्त अपना बायोमीट्रिक डेटा इस्तेमाल किया था. अगर आपको लगे कि बेजा इस्तेमाल हुआ है तो आप हमसे संपर्क करें. हम जांच करेंगे. वैसे अगर आपको अपने आधार बायोमीट्रिक डेटा के बेजा इस्तेमाल का डर है तो एम-आधार मोबाइल ऐप में इसे लॉक करने की भी सहूलियत है. जब भी आधार के लिए अंगूठा लगाना हो तो ऐप में जाकर कुछ देर के लिए इसे अनलॉक कर सकते हैं.

Q. एक डर यह है कि किसी के पास करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी है, लाखों का बैंक बैलेंस है. कोई बंदा उसके आधार नंबर से उसकी नेटवर्थ जान सकता है.

A. आधार के बारे में ऐसे आरोप निराधार हैं. ऐसा वे लोग कहते हैं, जिन्हें न तो इसके बारे में कोई जानकारी है और न ही उन्होंने कभी आधार ऐक्ट को ढंग से पढ़ा है. ऐक्ट में साफ लिखा है कि आधार के लिए ली गई कोई भी जानकारी आधार अथॉरिटी किसी के साथ भी नहीं शेयर करेगी.

Q. सरकार अगर किसी का आधार से जुड़ा डेटा मांगे तो क्या आप शेयर करेंगे?

A. जी नहीं, सरकार के साथ भी नहीं. हमने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा भी दिया है. ऐसा करना अपराध है. हम सरकार या किसी जांच एजेंसी को कोई जानकारी तभी उपलब्ध करवाते हैं, जब कोर्ट हमें ऐसा करने के लिए निर्देश देता है.

Q. इसका मतलब यह कि अगर पुलिस या सीबीआई या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपसे कोई जानकारी या फिंगरप्रिंट आदि मांगे तो आप उसे मुहैया नहीं कराएंगे?

A. हम तब तक कोई जानकारी नहीं मुहैया नहीं कराएंगे, जब तक कोर्ट से हमें इसके ऑर्डर नहीं मिलते. हम कोई भी डेटा जांच एजेंसी के सिर्फ मांगने भर से उससे नहीं शेयर करते. अगर किसी जांच एजेंसी को कोई जानकारी चाहिए तो उसे पहले कोर्ट से इसका आदेश हासिल करना होगा.

Q. फिर भी मैं प्रॉपर्टी, बैंक अकाउंट आदि आधार से लिंक करवाने के झंझट में क्यों पड़ूं? मुझे इसका क्या फायदा?

A. क्योंकि आधार से लिंक करवाना सबके लिए फायदे का सौदा है. अभी आपने प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के वक्त आधार नंबर देने और बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन की बात की थी. अभी यह अनिवार्य नहीं है इसलिए हर राज्य में ऐसा नहीं हो रहा, लेकिन जहां यह हो रहा है, वहां किसी भी तरह के फर्जीवाड़े की गुंजाइश नहीं रहती. हमारी अदालतें ऐसे ढेरों मुकदमों से लदी पड़ी हैं, जहां किसी ने फर्जी कागजात और सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत करके प्रॉपर्टी बेच दी. आधार से लिंक हो जाने पर क्राइम में काफी कमी आएगी. फालतू की मुकदमेबाजी घटेगी. इसी तरह बदमाश फर्जी आईडी से बैंक अकाउंट खोलकर नौकरी देने के नाम पर या दूसरे झांसे देकर भोले-भाले लोगों से पैसे जमा करते हैं और पैसे बटोरकर चंपत हो जाते हैं. अगर हर बैंक अकाउंट आधार से लिंक होगा तो ऐसे फ्रॉड होने बंद हो जाएंगे.

Q. हाल में खबर आई थी कि आधार लिंक न होने की वजह से झारखंड में एक परिवार को राशन का सामान महीनों तक नहीं मिला. इसकी वजह से एक बच्ची की मौत हो गई. इस तरह की घटनाओं पर आपका क्या कहना है?

A. सबसे पहली बात तो यह जानें कि आधार ऐक्ट में यह दर्ज है कि आधार न होने पर किसी को भी सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता. राज्यों के पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम में इसे एक नए बहाने की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. राशन की दुकान पर गरीब को सिर्फ आधार लिंक न होने का बहाना बना कर अनाज न देना सरासर गलत है और ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. राज्य सरकार की मशीनरी को भी इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए. यह अपनी गलती का ठीकरा आधार के सिर पर फोड़ने वाली बात है.

Q. अगर किसी का आधार डेटा मैच न करे या उसके पास आधार न हो तो वह सरकारी सुविधा कैसे ले सकता है?

A. इसके लिए भी सिस्टम है. अगर मैचिंग में किसी तरह की परेशानी है या आधार नहीं है तो दूसरी आईडी से फिजिकल वेरिफिकेशन करने के बाद सुविधा दे दी जाए. वह भी न हो तो एक रजिस्टर में उसे दर्ज करके बाद में वेरिफाई कराया जा सकता है. इसकी वजह से सुविधा में रुकावट का कोई सवाल ही नहीं है. यह कोरी बहानेबाजी है. हमने या सरकार ने कभी नहीं कहा कि आधार न होने की वजह से किसी को मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया जाए.

Q. अगर आधार न होने की वजह से किसी शख्स को सरकारी या प्राइवेट सर्विस देने से मना कर दिया जाए तो वह कहां शिकायत कर सकता है? क्या आधार अथॉरिटी का कोई शिकायत नंबर है?

A. नहीं, हमारा काम है आधार जारी करना और फिर इस आईडी का अथॉन्टिकेशन. इसके लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल प्लैटफॉर्म हम मुहैया कराते है ताकि कभी भी और कहीं भी यानी पूरे देश में चौबीसों घंटे यह सहूलियत मिले. पब्लिक को सर्विस संबंधित विभाग देता है. मिसाल के लिए कोई शख्स राशन लेने के लिए गया, उसका अथॉन्टिकेशन फेल हो गया. अगर एक उंगली से फेल हो जाए तो बारी-बारी से दूसरी उंगलियों से करके देखना चाहिए. सबसे फेल हो जाए तो आइरिस (आंख की पुतली) से करना चाहिए. वैसे यह सच है कि ज्यादातर दुकानदार आइरिस स्कैनर नहीं रखते जबकि उन्हें आइरिस भी रखने को कहा गया है. अथॉन्टिकेशन फेल होने पर अगर राशन देने से मना कर दिया जाए तो ऊपर की अथॉरिटी यानी डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर या एडीएम (सप्लाई) आदि के पास शिकायत करनी चाहिए. ऐसे ही अगर कोई टेलीकॉम कंपनी मना कर दे तो कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट या फिर ट्राई को संपर्क करें.

Q. अक्सर देखा गया है कि बुजुर्गों के फिंगरप्रिंट लेने में दिक्कत आती है. इससे उनका आधार जेनरेट करने से ही मना कर दिया जाता है.

A. आधार नंबर पाना हर देशवासी का हक है और इसे कोई मना नहीं कर सकता. अगर किसी का बायोमीट्रिक डेटा लेने में दिक्कत है तो उसके लिए तस्वीर के साथ खास तरह का आधार कार्ड बना कर दिया जाता है. अगर बाद में वेरिफिकेशन के वक्त कोई दिक्कत आती है तो फोटो से मिलान करके पहचान सुनिश्चित की जा सकती है.

Q. हाल में पहले लखनऊ में एसटीएफ ने एक मामले में फर्जी आधार बनाने में कई लोगों को पकड़ने का खुलासा किया था. इस तरह के मामले काफी गंभीर हैं. आपका क्या कहना है?

A. इस मामले में हमने ही रिपोर्ट करवाई थी. किसी भी तरह का डेटा इस केस में लीक नहीं हुआ था. ऐसे में खुलासे का दावा करना ही समझ से बाहर है. इतने बड़े सिस्टम में हमें जब भी किसी भी तरह की छेड़छाड़ का अलर्ट मिलता है तो हम संबंधित राज्य की पुलिस को संपर्क करते हैं और जरूरी कार्रवाई करने के लिए कहते हैं. ऐसा ही हमने इस केस में भी किया.

Q. पिछले दिनों खबर आई थी कि अथॉरिटी ने हजारों आधार कैंसल कर दिए. यह सही है?
A. हम साल में कई बार ऐसा करते हैं. आधार का किसी वजह से कैंसल हो जाना आम बात है.

Q. तो क्या वे सारे आधार कार्ड बोगस थे?
A. आधार कार्ड बोगस होने की वजह से कैंसल नहीं हुए. हम किसी भी शख्स द्वारा उपलब्ध कराए गए आईडी प्रूफ और अड्रेस प्रूफ के आधार पर आधार जेनरेट कर देते हैं. इसके बाद सभी कागजात की बारीकी से जांच होती है. कई बार आईडी प्रूफ या अड्रेस प्रूफ फर्जी निकलता है तो हम उससे जुड़े आधार को कैंसल कर देते हैं.

Q. अगर आईडी के तौर पर आधार कार्ड को इस्तेमाल करना हो तो क्या ऑरिजिनल आधार कार्ड पास में होना जरूरी है?

A. नहीं. अगर ऑरिजिनल कार्ड हर वक्त जेब या बैग में न रखना हो तो आप अपने मोबाइल में एम-आधार (mAadhaar) ऐप डाउनलोड कर लें. जरूरत के वक्त ऐप में अपना आधार दिखाकर आपका काम चल जाएगा. यहां तक कि एयरपोर्ट में एंट्री के वक्त भी इसे दिखा सकते हैं.

Q. इस ऐप में अपने आधार कार्ड को खोलने के लिए कई बार पासवर्ड डालना पड़ता है जोकि काफी झंझट भरा है. इसे सुधारने के बारे में सोच रहे हैं?

A. हमें भी इस तरह की शिकायतें मिली हैं. हम इसे बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. जल्द ही एम-आधार ऐप में कई नए फीचर जोड़े जाएंगे और फिलहाल आने वाली परेशानी को कम किया जाएगा. वैसे, आप ऐप की Settings में जाकर Password का ऑप्शन हटा भी सकते हैं.

Q. सोशल मीडिया के कई यूजर अब अफवाहें फैलाने के कारण कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनकर उभरे हैं. क्या अगर भविष्य में फेसबुक या ट्विटर जैसी कंपनी आधार केवाईसी के लिए आपसे संपर्क करती है तो क्या आप सहयोग करेंगे?

A. किसी भी नई सर्विस को आधार से जोड़ने पर लोग हल्ला-हंगामा मचाने लगते हैं और आप इसे सोशल मीडिया जैसी पर्सनल चीज से जोड़ने की बात कर रहे हैं? सोशल मीडिया का माध्यम बड़ा ही पर्सनल है. फिलहाल न हमने इस बारे में कभी सोचा है और न ही हमारे पास ऐसे कोई कोई प्लान आया है.

Q. हमारे देश में फर्जी ‌वोटर, फर्जी वोटिंग भी होती है. क्या वोटर आईकार्ड को भी आधार से जोड़ने की योजना है?

A. इस बारे में फैसला चुनाव आयोग को करना है.

Q. अमेरिका जैसा हाई-टेक देश भी सिर्फ सोशल सिक्यॉरिटी नंबर के भरोसे है. जब उसे बायोमीट्रिक आइडेंटिफिकेशन पर भरोसा नहीं है तो ऐसे में हमने इसे क्यों अपनाया?

A. जब उन्होंने यूनिक आइडेंटिफिकेशन पर काम करना शुरू किया था, तब यह तकनीक इतनी अडवांस नहीं थी. अब अगर बेहतर तकनीक उपलब्ध है तो इसे अपनाने में क्या बुराई है. फिर भारत जैसे बड़े देश में हर इंसान के लिए एक यूनिक नंबर बनाने के लिए किसी सिस्टम को तो अपनाना ही था. अगर हम इसे न अपनाते तो हर शख्स कई आधार बनवा कर फर्जीवाड़ा कर रहा होता. ऐसे में बायोमीट्रिक आइडेंटिफिकेशन जरूरी है.

Q. आधार विरोधियों का कहना है कि सिस्टम में काफी कमियां हैं और सरकार डेटा सिक्यॉरिटी को लेकर गंभीर नहीं है. आपका क्या कहना है?

A. विरोध करने वाले जो चाहें, कह सकते हैं. हमारा सिस्टम पूरी तरह से मुस्तैद हैं और हम इसे लगातार बेहतर बना रहे हैं. तकनीक में हमेशा बेहतरी की गुंजाइश रहती है और हम इसे लगातार बेहतर बनाते जा रहे हैं.

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