देश को इसका जवाब दे कांग्रेस

आज नहीं तो कल, काँग्रेस और गांधी परिवार को सरकारी खज़ाने के 100-125 करोड़ रूपए लील रहे अपने इस निजी उपयोग/ खर्च का जवाब देश को देना ही होगा.

सोनिया गांधी 10 जनपथ के जिस सरकारी बंगले में रहती हैं उसका एरिया 1,63,408 वर्गफुट है. उस एरिया में किराए के न्यूनतम बाज़ार भाव से बंगले का किराया 3 से 4 करोड़ रूपए प्रतिमाह होता है.

प्रियंका वाड्रा लोधी एस्टेट के जिस सरकारी बंगले में रहती हैं उसका एरिया 29,763 वर्गफुट है. उस एरिया में किराए के न्यूनतम बाज़ार भाव से बंगले का किराया लगभग 1.5 से 2 करोड़ रूपए होता है.

राहुल गांधी तुगलक रोड के जिस सरकारी बंगले में रहते हैं उसका एरिया 54,063 वर्गफुट है. उस एरिया में किराए के न्यूनतम बाज़ार भाव से बंगले का किराया लगभग 2.5 से 3 करोड़ रूपए होता है.

इस तरह यह परिवार सिर्फ किराए के रूप में देश की जनता की गाढ़ी कमाई के औसतन लगभग 9 से 10 करोड़ रूपए प्रतिमाह अपने ऊपर खर्च कर रहा है. अर्थात लगभग 100-125 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष.

उल्लेखनीय है कि गांधी परिवार में अब मात्र 6 सदस्य हैं. सोनिया गांधी, पुत्र राहुल तथा पुत्री प्रियंका वाड्रा व उसके पति एवं 2 बच्चों समेत गांधी परिवार में कुल 6 सदस्य हैं.

इन 6 सदस्यों में से कोई भी सदस्य किसी भी संवैधानिक पद पर नहीं है.

अतः कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि 6 सदस्यीय गांधी परिवार देश की सर्वाधिक बेशकीमती लगभग ढाई लाख वर्गफुट जमीन पर अलग-अलग बने 3 मकानों में रहकर देश के ख़ज़ाने पर हर वर्ष लगभग 100-125 करोड़ रू का बोझ किस हैसियत से और क्यों डाल रहा है?

क्योंकि देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, एच डी देवेगौड़ा, आइ के गुजराल की सन्तानें सामान्य आवासों में ही रह रही हैं.

दूसरी बात यह कि सुरक्षा कारणों से यदि उपरोक्त उदाहरणों से गांधी परिवार की तुलना नहीं भी की जाए तो क्या एसपीजी की सहमति संस्तुति प्राप्त जिन तीन बंगलों पर गांधी परिवार काबिज़ है उनमें से 29763 वर्ग फुट जमीन पर बने बंगले में दो नाबालिग बच्चों समेत कुल 6 सदस्यों वाला गांधी परिवार क्यों नहीं रह सकता?

यह सामंती और शाही सोच का निकृष्टतम उदाहरण है. आज नहीं तो कल, कांग्रेस और गांधी परिवार को सरकारी खज़ाने के 100-125 करोड़ रूपए लील रहे अपने इस निजी उपयोग/ खर्च का जवाब देश को देना ही होगा.

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