इतना बड़ा scam? हर स्कूल में 7 सिफारशी BPL बच्चे!!!

Indian Express के पूर्व संपादक शेखर गुप्ता ने एक news website बनाई है… The Print… Print ने मोदी सरकार का एक बहुत बड़ा घोटाला पकड़ा है… Mother Of all Scams…

स्मृति ईरानी और प्रकाश जावड़ेकर ने अपने कार्यकाल में पिछले 3 साल में 25000 से ज़्यादा बच्चों को सांसद कोटा में KV, बोले तो केंद्रीय विद्यालयों में एडमीशन दे दिया.

सबसे पहले तो ये समझ लीजिए कि KV क्या है.

1963 में भारत सरकार को यह ज़रूरत महसूस हुई कि Defence Forces हमारे फौजी भाइयों के बच्चों को पढ़ाई की बहुत समस्या रहती है. हर दो या तीन साल में ट्रांसफर हो जाता है. Remote locations पर ट्रांसफर हो जाता है. शैक्षणिक सत्र के बीच मे ट्रांसफर हो जाती है.

ऐसे में फौजी अपने बच्चे को ले के कहां जाए. उसका बच्चा कैसे पढ़े. इस ज़रूरत को समझते हुए 1963 में भारत सरकार ने देश भर के हर उस location पे जहां फौज तैनात है वहां केंद्रीय विद्यालय खोल दिये. ये सरकारी स्कूल होते हैं. फीस नाममात्र की होती है.

मेरी शिक्षा दीक्षा खुद KV में ही हुई है. उस ज़माने में जबकि समाज में ये प्राइवेट स्कूलों का बोलबाला नही था KVs देश के सबसे अच्छे स्कूल माने जाते थे. 80 के दशक तक CBSE की जो मेरिट लिस्ट बनती थी उसमें top 20 KV के students ही होते थे.

फिर 90 के दशक में ये भी अन्य सरकारी संस्थानों की तरह बेहाल हो गए. फिर वर्ष 2000 के आसपास एक IAS अधिकारी, जिनका मैं नाम भूल गया हूँ, ने KVs का पुनरोद्धार किया. सख्ती से डंडा चलाया.

जंग खा रहे system को दुरुस्त किया. हरामखोर teachers को कुछ को terminate किया, कुछ को suspend और बहुत से teachers को punishment posting दे के घर से 2000 km दूर पटक दिया. देखते देखते ही KV पुनः अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को प्राप्त हुए.

90 के दशक में जबकि KVs की दुर्गति हो रही थी, फौज के अफसरों ने KV से मुंह मोड़ लिया और अपने बच्चों को महंगे private स्कूलों में पढ़ाने लगे. फिर उन्होंने जुगाड़ बैठा के फौज की ही जमीन पर Army Public Schools खोल लिए. इनका प्रबंधन फौजी अफसरों के हाथ में होता है और इनकी भारी भरकम फीस होती है. धीरे धीरे अफसरों की देखा देखी JCOs और जवानों के बच्चे भी वहीं जाने लगे.

तब मानव संसाधन मंत्रालय ने KVs की कुछ seats जो केंद्रीय कर्मियों के बच्चों से खाली रह जाती थीं उन्हें आम public के लिए खोल दिया. KV चूंकि बेहद सस्ते हैं, इसलिए गांव – शहर का आम गरीब आदमी भी अपने बच्चे को एक अच्छे CBSE स्कूल में 400 रूपए महीना फीस दे के पढ़ा लेता है और अगर BPL कार्ड धारी हो तो मुफ्त में पढ़ा लेता है.

पुराने ज़माने में इसमें सांसद कोटा होता था… देश भर में कुल जमा 500 seats का. अब जबकि कुल सांसद ही 800 से ज़्यादा हैं तो 500 seats का क्या औचित्य है राम जाने.

एक एक सांसद का क्षेत्र 100 किलोमीटर लंबा होता है जिसमे 25-30 लाख तक की जनसंख्या होती है. उसमें एक बच्चा प्रति सांसद का भी औसत नहीं निकलता था. और चूंकि ये सस्ते सरकारी स्कूल तो हैं नहीं जिसमें उद्योगपति पूंजीपति के बच्चे जाएंगे, बेहद गरीब लोग ही KV में प्रवेश लेने के लिये अपने सांसद को approach करते हैं.

सो हुआ ये कि पिछले तीन साल में देश के सांसदों ने प्रति सांसद 10 बच्चे की सिफारिश कर दी… 100 km लंबे संसदीय क्षेत्र में 10 बच्चे… BPL परिवारों के बच्चे… और सांसदों के कोटा से कुल 1100 स्कूलों में 8000 ऐसे सिफारशी BPL बच्चे पढ़ने लगे…

इतना बड़ा Scam? हर स्कूल में 7 सिफारशी BPL बच्चे!!!

ये घोटाला पकड़ा है शेखर गुप्ता ने और NDTV के रविश कुमार अपनी फेसबुक वॉल पर सुबह से चिहाड़ मचाये हैं कि मोदी सरकार ने Merit ताक पर धर दी…

घोटालेबाज़ मोदी… इस्तीफा दो…

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