वो कोई जादुई घड़ी थी, जब तुम मिले थे

वो कोई जादुई घड़ी थी
जब तुम मिले थे
या मिलवाए गए थे
यूँ ही मिलते ही जब हम किसी से कह दें
चलो, आओ, हम अपने सब ग़म बाँट लेंगे
तो कोई तो बात होगी
कोई तो राज़ होगा

तुमने कहा
है न राज़, राज़
यह बताने आया हूँ
सावन का महीना पवन करे शोर
शोर नहीं, सोर

तुम्हारे संग बैठ दो घूँट मदिरा पीने आया हूँ
जानता हूँ
तुम्हें मिलना है किसी के गले लग कर
और रोना है ज़ोर ज़ोर से
तुम्हें थोड़ा रुलाने आया हूँ

फिर ऐसे मिले
कि सूक्ष्म स्थूल सब एक हो गया
सब सीमाएँ धुँधली हो गईं
कब मौन में बातचीत होती
कब बातचीत में मौन विचर आता
पता ही न चलता
कब तुम रोते रोते को हँसाते
कब हँसती हँसती को रुला देते
पता ही नहीं चलता

जादू सर चढ़ कर बोलने लगा
जग ज़ाहिर हो गई सारी आपबीती
लोग दुआएँ देने लगे
तुम्हें इसी जन्म में मिल जाए
तुम्हारे दिल का मेहरम

कैसे समझाते
उसके मेरे बीच कोई जन्म है ही नहीं
हाँ, कभी कभी कोई जादुई घड़ी आती है
चमत्कार करती है
वो मुझे पुकारता है
मैं नींद से जगती हूँ
देखती हूँ, मैं तो नयी हो गई हूँ

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY