पूरी दाल ही काली है

भारत में मोदी के आने के बाद सारी दुनिया में खलबली मची हुई है. विशेषकर चीन-पाकिस्तान और इस्लामिक जगत में. अब तक भारत उन्हें आसान चारागाह लग रहा था. मोदी और भाजपा के आने के बाद बहुत कुछ बदल गया. स्पेशिली बॉर्डर पर.

गज़वा-ए-हिन्द, लालक्रान्ति और चर्च-राज्य लटक कर रह गया. कांग्रेस के माध्यम से धीरे-धीरे जो कुछ भी साज़िशी परवान चढ़ रहा था अचानक सेना, पुलिस, व्यवस्था की निगाह में आ गया.

अब हिन्दुस्तान के सारे दुश्मन एक हो गये हैं. बाहरी शक्तियाँ किसी भी तरह मोदी को उखाड़ने में लगी हैं. ट्रम्प और मोदी दोनों अखर रहे हैं, तो गोपनीय मीटिंग्स हो रही हैं कि कैसे पुरानी व्यवस्था लाई जाए जिससे कुछ समय तैयारी का और मिल सके.

देखा नहीं थोड़ी सी चूक से नेपाल वामियों के हाथ चला गया. पिछले दिनों कांग्रेस के कई नेताओं ने 6 दिसंबर को गुपचुप तरीके से दिल्ली में पाकिस्तानी राजदूत से मुलाकात की.

इस सीक्रेट मीटिंग में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर के अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के पूर्व उच्चायुक्त चिन्मय गरे खान और सबसे खतरनाक उपस्थिति पूर्व सेनाध्यक्ष दीपक कपूर की थी. कई और लोग भी मौजूद थे.

इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर मिलना है तो खुलेआम मिलो, गुप्त मीटिंग वो भी पाकिस्तानी राजदूत से, मनमोहन सिंह करते है, क्या बात की जाती है? प्रधानमंत्री के इस वाक्य को मैं राजनीतिक नहीं मान सकता. यह एक गम्भीर मामला है और अपने में कई बड़े संकेत दे रहा है.

दीपक कपूर कांग्रेस द्वारा कई सीनियर कमांडरों को सुपरसीड कर सेनाध्यक्ष बनाए गए थे. उन पर आदर्श घोटाले व अन्य भ्रष्टाचारों में शामिल रहने के आरोप थे. कश्मीर में दीपक कपूर बल प्रयोग से बचते रहे थे, इस तरह आतंकियों की परोक्ष मदद हुई थी.

कांग्रेस के दस साल में 135 से अधिक बड़ी आतंकी घटनाएं हुई. आतंकियों को मारने की जगह उनको भगाने-बचाने में ही सरकार की भूमिका ज्यादा थी. अगर कही मुठभेड़ों में आतंकी मार दिए जाते तो सेना के उन अधिकारियों को किसी न किसी बहाने सज़ा देने, जांच बैठाने और प्रताड़ित करके हतोत्साहित किया जाता था.

निश्चित ही इसमें ऊपर के काफी लोग और कांग्रेस की नीतियों का हाथ था. आप सोचिए ज़रा, मुंबई में सीधे पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला कर दिया और एक सिंगल कार्रवाई तक नही हुई.

प्रश्न यह है कि इतनी रहस्यपूर्ण मीटिंग में दीपक कपूर को जाने की क्या ज़रूरत थी?कुछ दिनों पूर्व राहुल गांधी का चीनी राजदूत से गुपचुप मिलना और फिर मीडिया में खबरों के बाद इनकार करना, और बाद में फिर मान लेना, अपने में संदेह पैदा करता है कि कांग्रेस कम्पनी कम्युनिस्टों की तरह विदेशी-एजेंट के रूप में तो नहीं काम कर रही.

पाकिस्तान के एक जनरल का बयान कि ‘अहमद पटेल को मुख्यमंत्री बनाओ’, चुनाव में गुपचुप एक मज़हब को संदेश वितरित होना. यह सब एक बड़े-खतरे के रूप में देखना चाहिए.

कांग्रेस चीन-पाकिस्तान के एजेंट के रूप में काम कर रही थी. चीन के 25 बार सीमा अतिक्रमण के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करती थी. पाकिस्तान ने इस बीच भारत में आईएसआई नेटवर्क बना लिया. नकली नोटों का अम्बार भर दिया. सरकार के पास इसकी रिपोर्ट थी.

कांग्रेस के नेताओं ने हिन्दू आतंकवाद शब्द पाकिस्तान के एक विचारक के कहने पर उछाला और स्थापित करने का प्रयत्न किया था. कांग्रेस सरकार ऐसे दर्जनों मौकों पर कार्यवाहीं करने से बचती रही है.

गनीमत रही कि मोदी आ गया, नोट-बंदी कर दी, वरना अब तक अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकी होती. यह निश्चित है कि हामिद अंसारी, मणिशंकर अय्यर और मनमोहन सिंह पाकिस्तान की आंखों के तारे रहे हैं. यह सब बिना किसी कीमत के नहीं हुआ होगा.

मनमोहन सिंह ने शर्म अल शेख में यह कर पाकिस्तान की बहुत बड़ी मदद की थी कि ”पाकिस्तान खुद आतंकवाद का शिकार है”. हामिद अंसारी खुद को मुसलमानों का बहुत बड़ा खैरख्वाह मानते हैं और मुस्लिम वर्ल्ड में इनको मुस्लिम नेता के रूप में जाना जाता है. मणिशंकर अय्यर और कांग्रेस के कई नेता पाकिस्तान जाकर बीजेपी को हराने और मोदी को हटाने में मदद मांग रहे थे.

नेपाल, तिब्बत, भूटान, बर्मा, श्रीलंका, मालदीव, बाल्टिस्तान, बलूचिस्तान, गिलगित, अफगानिस्तान, पाकिस्तान को ‘अखंड भारत’ से योजना बनवाकर बंटवा देना, मज़हबी आधार पर देश के बंटने से एक तरफ पाकिस्तान में सेना लगाकर हिन्दुओं का निकाला जाना, उसके बावजूद भारत वर्ष में द्वितीय-सम्प्रदाय को रुकने की अनुमति देना…

धारा 370 देकर कांग्रेसी कश्मीर नीति (मुस्लिम राज्य) को बढावा देना, मज़हबी आधार पर दो अलग-अलग कानून होना, शासकीय नीतियों द्वारा हिन्दुओं में जातीय कट्टरता बढ़ा कर बांटने की कोशिश करना, भारत के 3 हजार से अधिक टूटे हुए धर्म-स्थलों पर काबिज परकीयों से मुक्त न करवाना…

चार करोड़ बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराकर एक वर्ग की जनसंख्या बढ़वाना, बहुसंख्यक वर्ग की जनसंख्या को नियंत्रित करके कम करने का प्रयास और एक समुदाय की जनसंख्या वृद्धि को न रोकना, 1947 के बाद हिन्दुओं 94.8 प्रतिशत से घटकर 78.9 होना…

लगातार धर्मान्तरण को (प्रोत्साहन) रोकने का प्रयत्न न करना, सेकुलरिज्म एजेंडे के तहत इस्लाम-ईसाइयत का संरक्षण, इतिहास के पाठ्यक्रमों द्वारा हिन्दू-गौरव ख़त्म करने का प्रयास, सनातनत्व के नाश का निरंतर प्रयास करना…

सेना को निरंतर कमज़ोर करने का प्रयत्न, कोई दूरदर्शी-सैन्य-रणनीति न बनने देना, राष्ट्र शब्द को कनफ्यूज़ किये रहना, मीडिया-शिक्षा-पाठ्यक्रम, सिनेमा, एनजीओ आदि द्वारा हिन्दू ह्तोत्साहन प्रोजेक्ट…

नागरिक डाटा को व्यवस्थित न होने देकर एक भ्रष्ट-राज्य बनाना, नागरिक सुरक्षा-सिस्टम न विकसित होने देना, तमाम बड़े नेताओं का विदेशी एकाउंट और विभिन्न देशों में नागरिकता होना, भारत में विदेश-नियंत्रित पार्टियों का होना आदि कांग्रेस के नेताओं का गज़वा-ए-हिन्द करवाने का प्रोजेक्ट लगता है.

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