जब नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के भाषण के प्रसारण पर रोक लगाई

देश के प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर सोमनाथ के पुनर्निर्माण का फैसला जब सरदार पटेल ने किया तो वो इस संबंध में महात्मा गांधी से आशीर्वाद लेने उनके पास गए.

गांधी ने ऐतिहासिक मंदिर के पुनर्निर्माण को अपना आशीर्वाद इस शर्त पर देना कबूल किया कि इस मंदिर का पुनर्निर्माण जनता के चंदे से प्राप्त धनराशि से किया जाएगा और इसमें सरकार की भागीदारी नहीं होगी.

इसी दौरान में सरदार पटेल का निधन हो गया और इस ऐतिहासिक मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य भारत के तत्कालीन खाद्य मंत्री के. एम. मुंशी ने सम्भाला.

उल्लेखनीय है कि सोमनाथ का प्राचीन मंदिर सौराष्ट्र में स्थित है. उसकी गणना शिव के ज्योर्तिलिंगों में होती है. कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण चन्द्रमा ने चांदी की धातु से किया था.

हिन्दुओं के इस महान तीर्थ स्थल पर सबसे पहले मुस्लिम आक्रांता महमूद गजनवी ने हमला किया. मंदिर की रक्षा करते हुए पचास हजार से अधिक हिन्दू शहीद हुए. जबकि चालीस हजार मुसलमान भी उनके हाथों मारे गए.

जब आप वीरावल से प्रभास पाटन की ओर जाते हैं तो मार्ग में सड़क के दोनों ओर इस युद्ध में मारे गए मुसलमानों की बेशुमार कब्रें दिखाई देती हैं. महमूद गजनवी ने इस मंदिर को 1024 में ध्वस्त किया था. इसके बाद इस मंदिर को एक दर्जन बार विभिन्न मुस्लिम शासकों ने ध्वस्त किया और हर बार हिन्दू इसका पुनर्निर्माण करते रहे.

अंतिम बार सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होलकर ने करवाया था. इस मंदिर के एक किलोमीटर दूर प्राचीन मंदिर के भगनावशेष पड़े हुए महमूद की बर्बरता की याद दिलाते थे.

सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के मूल स्थान पर एक भव्य मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया. 1951 में मंदिर बनकर तैयार हो गया. श्री मुंशी ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद से अनुरोध किया कि वह मंदिर में मूर्ति की स्थापना अपने हाथों से करें.

सेकुलरवादी नेहरू को यह बात पसंद नहीं आई और उन्होंने राष्ट्रपति को यह निर्देश दिया कि वह इस समारोह में न जायें. डॉ राजेन्द्र प्रसाद का आग्रह था कि क्योंकि वह श्री मुंशी को इस कार्यक्रम में भाग लेने का वचन दे चुके हैं इसलिए वह अपना कार्यक्रम रद्द नहीं करेंगे.

उनके इस इंकार से सेकुलरवादी नेहरू चिढ़ गए. उन्होंने एक पत्र डॉ राजेंद्र प्रसाद को लिखा जिसमें उनको सूचित किया कि अगर वो सोमनाथ जाते हैं तो यह उनका दौरा निजी होगा. इस पर जो भी धनराशि खर्च होगी वह उनके वेतन से काटी जाएगी.

इसके साथ ही नेहरू ने ऑल इंडिया रेडियो के महानिदेशक को लिखित रूप से यह आदेश दिया कि सोमनाथ मंदिर से संबंधित कोई भी समाचार रेडियो से प्रसारित न किया जाए. (नेहरू का यह पत्र और ऑल इंडिया रेडियो के महानिदेशक को भेजे गए इस आदेश की मूल कॉपी भारतीय अभिलेखागार में आज भी सुरक्षित है.)

डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर में शिवलिंग की स्थापना तो कर दी मगर सरकारी ऑल इंडिया रेडियो ने इस समारोह के संबंध में कोई भी समाचार प्रसारित नहीं किया. 1957 में स्व. डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने मुझसे हुई बातचीत में इस बात की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की थी.

वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन शर्मा

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