भारत का हर व्यंजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर है

एक प्रश्न – पिछली बार आप को किस रेस्टोरेंट में या विवाह भोज में हींग के छौंके वाली अरहर की दाल, भरवां करेला, आलू-मेथी की सब्जी, बथुआ का परांठा और आटे की रोटी मिली थी?

अरहर की दाल को ही ले लीजिये. एक ही घर में अरहर की दाल मेरी माता जी ने बनाया है या भाभी ने, मैं तुरंत पकड़ लेता हूँ. दोनों ही दालों में टेस्ट होता है, लेकिन बनाने की स्टाइल अलग है.

इसी दाल को पूरब में पतली और पश्चिम में गाढ़ी बनायी जाती है. छौंक में साबुत लाल मिर्च, जीरा, हींग, लाल मिर्च पाउडर डाला जा सकता है. आप जीरे को लगभग जला सकते है या फिर जीरे के गरम घी में उछलते ही उसमें मिर्च पाउडर उड़ेल कर दाल में गरम चमचा डाल कर ढँक दिया.

कुछ अलग स्वाद के लिए लहसुन, प्याज, टमाटर का भी तड़का लगा सकते हैं. इसी दाल में हरी मटर, बारीक कटी हुई सोया या धनिया डालकर टेस्ट में एक नया ट्विस्ट दे सकते हैं.

खटास ले लिए उत्तर भारत में नीम्बू का रस, दक्षिण में इमली, और पश्चिम में कोकम मिला सकते हैं. हर तत्व की खटास और स्वाद अलग है. अमेरिका में मैंने दाल में कोकम डालना शुरू किया और अब इसकी खटास पसंद करता हूँ. गुजरात में चीनी या गुड़ की मिठास दाल में एक अलग ही फ्लेवर देती है. दक्षिण भारत से करी पत्ते का प्रयोग देश-विदेश में भारतीयों ने अपना लिया. पूर्व और दक्षिण भारत में सरसो दाने का तड़का लगा सकते हैं, घिसा नारियल और सहजन की फली भी डाली जाती है.

यही हाल किसी भी सब्जी का होता है. हर घर में भिंडी बनाने का तरीका, परवल काटने का तरीका, कटहल की सब्जी और दम आलू की अलग-अलग रेसिपी मिलेगी. सभी परिवारों में दम आलू की विवेचना अलग-अलग मिलेगी.

इसके विपरीत, यूरोप और अमेरिका में किसी भी डिश या व्यंजन को बनाने की फिक्स्ड प्रक्रिया है. शेफ या रसोइये वर्षो बिता देते है कि एक-एक व्यंजन की सॉस या ग्रेवी, सलाद की ड्रेसिंग, बुईयाबैस, कॉक ओ वें, अल दन्ते (पूरा ना पका हुआ) पास्ता, रीसोत्तो और पायेला (चावल का व्यंजन), मीट को पकाने की तकनीकी, क्रैम ब्रुले इत्यादि बनाने में लगा देते है. वहां के सर्वश्रेष्ठ रेस्तौरां की खासियत यह है कि हर व्यंजन का स्वाद जाना-पहचाना, उत्कृष्ट होगा, लकीर से एक सूत इधर-उधर नहीं.

भारत का हर व्यंजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, हमारे परिवार और पुरखों से जुड़ा हुआ है. व्यंजनों को बनाने की विविधिता ही हमारे भारत की विशेषता है. तभी किसी भी रेस्तोरां में घर का खाना नहीं मिलता. क्योंकि हम भारतीय तुरंत उस व्यंजन की तुलना अपने घर के खाने से करेंगे और उस भोजन को स्वादानुकूल ना पाने के कारण उस रेस्तरां को रिजेक्ट कर देंगे.

अतः मेरी सलाह यह है कि व्यंजन के नाम और विधि पर मत जाइये. अगर व्यंजन अच्छा लगता है, तो हींच के खाइये.

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