पृथ्वी की गुनगुनाहट सुनी या नहीं

पृथ्वी पर जीवन को आए 3.5 अरब साल बीत चुके हैं. अनुमान है कि 25 करोड़ साल तक पृथ्वी का अस्तित्व बना रहेगा. हर जीवनदायी ग्रह की आयु सीमित होती है. पृथ्वी का युवाकाल लगभग बीतने को है. जब उसकी वृद्धावस्था शुरू होगी तो वह इतनी उपजाऊ, जीवन उत्पादक नहीं रह जाएगी. कई विद्वानों का कहना है कि पृथ्वी की अपनी इंटेलिजेंस है. वह सोच सकती है, बात कर सकती है. पृथ्वी चैतन्य है, इसका प्रमाण प्रकृति की विविधताओं से मिलता है.

पता चला है कि पृथ्वी अपने जन्म के बाद से ही धीमे स्वर में गुनगुनाती है. उसकी ये ‘भनभनाहट’ या ‘हमिंग’ इतनी धीमी है कि मानव कान उसे सुन नहीं सकते. मानव के सुनने के स्तर से लगभग दस हज़ार गुना सूक्ष्म है पृथ्वी की गुनगुनाहट. सबसे पहले इस ‘आवाज़’ की पहचान सन 1959 में हुई थी. गहन परीक्षण के बाद सन 1988 में ये सिद्ध हो गया कि ये ‘सूक्ष्म स्वर’ पृथ्वी से ही निकल रहा है. हाल ही में मेडागास्कर में समुद्र के तल में साइज़्मामीटर की मदद से पहली बार पृथ्वी की आवाज़ रिकॉर्ड की गई.

इस आवाज़ का पीछा करते हुए वैज्ञानिकों को बड़े रोचक तथ्य मालूम हुए. दुनियाभर के विभिन्न स्थानों पर इस तरह की ‘हमिंग’ रिपोर्ट की जा रही है. सन 2012-13 में पता चला कि सारे विश्व में चुने हुए स्थानों पर ये आवाज़ डिटेक्ट की गई है. अब तक ऐसी दस हज़ार रिपोर्ट्स आई हैं जिनमे ये ‘हमिंग’ सुनने की बात कही गई है. हमारा भारत भी इससे अछूता नहीं है. देश के कई स्थानों पर ये रहस्यमयी हमिंग सुनी गई है.

हिन्द महासागर वो क्षेत्र है जहाँ से ये आवाज सबसे ज्यादा सुनी गई है. इस रहस्य का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने हिन्द महासागर के तल में सबसे ज्यादा साइज़्मामीटर स्थापित किये हैं. कई वैज्ञानिक मानते हैं कि ये हमिंग पृथ्वी के ‘कोर’ की है. पृथ्वी के रहस्य खोलने की दिशा में ये एक बड़ा कदम साबित होने जा रहा है. सम्भव है आने वाले दिनों में हम अपने ग्रह के बारे में और भी बहुत कुछ जान पाएंगे. हैरानी है कि हम अपने ग्रह और मानव शरीर के बारे में आज भी बहुत कम जानकारी रखते हैं. जिस दिन हम इस अनूठी ‘आवाज़’ के बारे में जान लेंगे, शायद उस दिन पृथ्वी की असीम बुद्धिमता का एक छोर हम समझ सकेंगे.

चित्र में आप भारत के वे क्षेत्र देख सकेंगे, जहाँ ये हमिंग रिपोर्ट की गई है.

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