बिहारी मछली झोर भात

माँसाहार में मछली खाना सबसे स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है. पेट, हड्डी से लेकर आँखों की रौशनी सब के लिए फायदेमंद रेहू/रोहू/कतला मछली का बिहारी वर्जन प्रस्तुत है.

सामग्री

रेहू/ कतला मछली- 1 दो, सवा दो किलो (लगभग)
सरसों तेल- तलने के लिए
लहसुन- दो नग
प्याज- एक छोटा
पीली सरसों- दो बड़े चम्मच
मेथी दाने- एक छोटा चम्मच
कसूरी मेथी- एक बड़े चम्मच
धनिया पाउडर- एक छोटा चम्मच
लाल मिर्च पाउडर- एक छोटा चम्मच
हल्दी पाउडर- दो छोटे चम्मच
नमक- स्वादानुसार

पाक विधि

सबसे पहले मछली को पानी से खूब अच्छी तरह साफ कर लें.

फिर दो चम्मच नमक डाल कर रगड़ कर फिर से पानी से धो कर निथार लें. और हल्दी, मिर्च, नमक और लहसुन का पेस्ट मिला लें. यह मछली तलने के लिए तैयार है. इसे तल कर पकौड़ों की तरह खा सकते हैं.

क्योंकि मछली को तलते हुए, पलटते हुए कई बार गर्म तेल उड़ता भी है सो तलते वक्त अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है.

झोर के लिए

कसूरी मेथी को छोड़ कर बाकी सारे मसालों को पीस लें. वैसे तो आजकल मसाले मिक्सी में ही पीसे जाते हैं पर सरसों का मसाला यदि सिलबट्टे पर पिसा जाय तो स्वाद और टेक्सचर दोनों अद्वितीय होते हैं.

थोड़े तेल में कसूरी मेथी के फोरन डालकर मसाले का पेस्ट डाल दें. स्वादानुसार नमक डाल कर मसाले को तेल छोड़ने तक भूनें. थोड़ी सावधानी रखें क्योंकि ज्यादा भुन देने पर सरसों के कड़वे होने का डर भी होता है.

मसाले भुन लेने के बाद दो बड़े ग्लास पानी डालकर झोर को खौलने दें. झोर जब खौलने लगे तब तली हुई मछलियां डालकर चूल्हा बन्द कर दें.

उसना चावल का भात बनाएं और गरम-गरम मछली-झोर भात के साथ खाएं. बस जरा काँटों से बच कर रहें.

सर्दियों के दिन हैं. मटरप्रेमी मटर के दाने भी मसाले भूनते वक्त ही डाल सकते हैं.

– कल्याणी मंगला गौरी

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