गुजरात : परिणाम चाहे जो हो, तय है तूफ़ान आना

गुजरात चुनाव के नतीजों पर देश दुनिया की नज़रें टिकी हुई हैं… देश दुनिया कहने का तात्पर्य वही है जो आप समझ रहे हैं.

यह चुनाव नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी एवं भारतीय राजनीति के भविष्य की दिशा को तय करने वाला होगा… यूँ समझें कि गेम चेंजर साबित होगा… यूपी चुनाव से भी ज्यादा महत्वपूर्ण.

जहाँ तक देश की राजनीति की बात है तो पिछले चार सालों से चोट पर चोट खा रहा विपक्ष और उसे लीड करने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए यह चुनाव अति महत्वपूर्ण है.

गुजरात में भले ही दो पार्टियों के बीच मुकाबला हो परंतु परिणाम पर निगाहें समूचे विपक्ष की लगी हुई है… ‘वको-ध्यानम’ यानी बगुले की तरह वे नजरें टिकाए हुए हैं.

मोदी नाम के तूफान से डरे सहमे और कोने में दुबक कर बैठे विपक्षी दलों को कांग्रेस की जीत में ही अपनी जीत और नव जीवन पाने की उम्मीदें दिख रही है… क्योंकि इसमें कोई संशय नहीं है कि आने वाले समय में राहुल ही विपक्षी दलों के सर्वमान्य नेता बनेंगे, जिसकी पुष्टि लालू ने भी कर ही दी है.

कांग्रेस सहित सारे विपक्षी दल इस चुनाव को अपने अस्तित्व की लड़ाई से भी जोड़कर देख रहे हैं. गुजरात में कांग्रेस पार्टी की सरकार भले ही ना बने परंतु यदि मोदी अपने गढ़ में कमज़ोर भी होते हैं तो मोदी की यह कमज़ोरी ही इनकी जीत होगी.

लेकिन ज़रा फ़र्ज़ करें कि बीजेपी इस चुनाव में इतनी सीटें ले आती है जितनी सीटों का दावा अमित शाह ठोक रहें हैं तो क्या होगा…?

आप यकीनन जान लें कि हाहाकार मच जाएगा… मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के वार इतने तेज हो जाएँगे जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है…

याद करें कि यूपी सहित पांच राज्यों के चुनावों के बाद कैसे सोनिया के नेतृत्व में सभी विपक्षी नेता ईवीएम टेंपरिंग के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मिलने गए थे?

अपनी हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहराने… इससे छेड़छाड़ जैसे बेतुके मुद्दों के सहारे लोकतंत्र का गला घोंटने… विपक्षी दलों की आवाज़ को दबाने आदि आदि का इल्जाम लगाया गया था.

इस बार तो ब्लूटूथ, व्हाट्सएप और पता नहीं किन किन तरीकों से हैक करने की उल-जलूल खबरें फैलाई जा रही हैं.

अब यदि इस बार कांग्रेस की इस हाड़तोड़ मेहनत और राहुल गांधी के चमत्कार का असर यदि गुजरात में नहीं हुआ और कांग्रेस पार्टी अपनी पुरानी स्थिति से बदतर परफॉर्म करती है… (जैसा कि अमित शाह का दावा है) तो इस बार विपक्षी दल वो तूफान खड़ा कर सकते हैं जिसकी कल्पना आपने भी नहीं की होगी.

जानकारी यह भी मिल रही है कि बीजेपी की बम्पर जीत की स्थिति में कांग्रेस सहित सभी पार्टियाँ देश में एक बार फिर से अविश्वास का माहौल खड़ा करेंगी.

एक बार फिर ईवीएम मशीन के द्वारा लोकतंत्र को बंधक बनाने की बात उछाली जाएगी… आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनाव में हर हाल में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग की जाएगी और यदि माँग नहीं मानी जाती है तो चुनाव का सामूहिक बहिष्कार भी कर सकते हैं.

वैसे भी कर्नाटक में बीजेपी – कांग्रेस का ही मुकाबला है जिसमें कांग्रेस की हार तय है.

अपने ओवैसी भाई भी कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस को चोट करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे क्योंकि वे मुस्लिम मतदाताओं में बड़ी फूट डालने के लिए कमर कस चुके हैं और पूरे दमखम के साथ मुस्लिमों को कांग्रेस से दूर रखने की कोशिश करेंगे.

वैसे तो कर्नाटक चुनाव में बीजेपी अपने तयशुदा मुद्दों के सहारे ही लड़ेगी लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर की सुनवाई और साध्वी प्रज्ञा को राज्यसभा में लाकर हिन्दुत्व की लाइन पर डटे रहने जैसे मुद्दों का शोर रहेगा.

साध्वी प्रज्ञा को पुरस्कृत करने का संघ और बीजेपी का यह निर्णय हिन्दुवादी ताकतों में जोश पैदा ज़रूर करेगा क्योंकि वे संन्यासी के साथ ही एक प्रखर वक्ता भी हैं और 2019 लोकसभा में अपनी हुँकार भी भरेंगी… फिलहाल उनके कैंसर का इलाज हो रहा है और अंतिम चरण में है.

बीजेपी का यह कदम विरोधियों के दिलों को छलनी करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा. ये सभी बातें विपक्षी दलों के ज़ेहन में पहले से ही है… और उनके लिए गुजरात चुनाव के परिणाम बहुत मायने रखते हैं.

कांग्रेसी ब्रिगेड के साथ ही लालू, ममता, मुलायम-अखिलेश, मायावती, केजरीवाल, येचुरी, पटनायक, पवार जैसे छद्म सेक्युलर नेताओं के लिए भी गुजरात का चुनाव परिणाम बहुत मायने रखेगा… यदि अमित शाह का आंकलन सही हुआ तो ये नेता एकजुट होकर तूफान मचाने में कोई कसर नहीं रखेंगे.

अब यदि दुनिया की बात करें तो… आज नरेंद्र मोदी दुनिया में सबसे तेजी से उभरकर विश्व पटल पर अपनी धमक दिखाने वाले नेता बन चुके हैं. मोदी की ताकत इस चुनाव के परिणाम से परखी जाएगी इसमें कोई संदेह नहीं है… क्योंकि गुजरात उनका राजनीतिक गढ़ है.

आज अपनी चुनावी सभा को संबोधित करने जा रहे राहुल गांधी जब साबरमती नदी पर बने सड़क-पुल से गुजर रहे थे ठीक उसी वक्त सी-प्लेन में बैठकर मोदी उस पुल के उपर आसमान से गुजर रहे थे…

ये नज़ारा देखना गुजरातियों के लिए तो वाकई रोमांचक रहा होगा… परंतु राहुल और विपक्षी दलों को यह दृश्य कितना रास आएगा नहीं कह सकता हूँ.

अब तो बस इंतज़ार है कि दूसरे फेज़ का चुनाव संपन्न हो, परिणाम आए, देश की राजनीति की दशा दिशा को देश की जनता भी समझे और देश का भविष्य किन हाथों में ज्यादा सुरक्षित रहेगा इसका आंकलन करे.

गुजरात की जागरूक जनता इस बार भी बीजेपी और मोदी पर ही विश्वास बनाए रखेगी मैं यही उम्मीद रखता हूँ … देश दुनिया की जो नज़रें गुजरातियों पर टिकी हुई हैं उस पर वे खरे उतरकर भारतीय राजनीति के भविष्य को सकारात्मक दिशा में ले जाने वाली विकासोन्मुख पार्टी को सत्ता की चाभी सौंपेंगे.

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