‘फल्कानेली’ की तरह कोई और भी हमारी कुशलता चाहता है!

जब चालीस के दशक में पूरी दुनिया में परमाणु को लेकर प्रयोग किये जा रहे थे तो कुछ अज्ञात असाधारण लोग परमाणु के घातक परिणामों के बारे में लगातार चेतावनी दे रहे थे. जर्मनी (सन 1924), जर्मनी( सन 1940), अमेरिका( सन 1945) में फल्कानेली नामक रहस्यमयी व्यक्ति ने लगातार आगाह किया कि इस रास्ते पर न चलें.

हमेशा ओवरकोट और फेल्ट हैट पहनने वाला फल्कानेली कौन था, कहाँ से आया था, इसकी ज़्यादा जानकारी नहीं मिलती. मानव कल्याण के प्रति आग्रही इस व्यक्ति ने कभी अपने क़दमों के निशान भी नहीं छोड़े. इस तरह के घातक अविष्कारों और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति आगाह करवाने के लिए इस अथाह जगत में किसी न किसी को चुन लिया जाता है. कौन चुनता है, इसके बारे में जानना मेरे जैसे अल्पज्ञानी के लिए फिलहाल संभव नहीं है.

अब कहानी का ट्रेक बदलते हैं. 20 सितंबर को केरल के बीके रिसर्च एसोसिएशन से प्रधानमंत्री कार्यालय को एक लिफ़ाफ़ा प्राप्त हुआ. इसमें प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक पत्र लिखा गया था. पत्र लिखने वाले वैज्ञानिक का नाम बाबू कालियल है. पत्र में बाबू ने एक संभावित भयानक आपदा की ओर संकेत किया है. उन्होंने कहा है ’31 दिसंबर से पूर्व पृथ्वी एक बेहद शक्तिशाली भूकंप का सामना करेगी. ये भूकंप हिन्द महासागर में आ सकता है. एशिया के महाद्वीपीय क्षेत्र इससे बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं.

ये असर इतना घातक हो सकता है कि समुद्री किनारों की शक्ल ही बदल देगी. ग्यारह देश इस भूकंप से प्रभावित होंगे. इनमें भारत, पाकिस्तान, चीन, जापान, नेपाल, बांग्लादेश, थाईलैंड, इंडोनेशिया, अफगानिस्तान, श्रीलंका और खाड़ी देशों तक इसका असर होने की सम्भावना है. ये भूकंप एक तूफ़ान को जन्म देगा. तूफान की रफ़्तार 120-180 किमी प्रति घंटा हो सकती है. यदि भूकंप का केंद्र हिन्द महासागर होता है तो इसका मतलब है तटवर्ती क्षेत्रों को अति बलशाली सुनामी का सामना करना पड़ सकता है. वैज्ञानिक ने भविष्यवाणी का आधार 20 अगस्त तक किये अध्ययन को बताया है. उन्होंने अपने अध्ययन के लिए अतिरिक्त संवेदी बोध (Extrasensory perception) की मदद ली है. इसे आप कुछ-कुछ परामनोविज्ञान कह सकते हैं.

जैसे ही ये खबर वायरल हुई, लोग भयभीत होने लगे. National Centre for Seismology और Earth System Science Organization ने इस भविष्यवाणी को बेहूदा करार दिया है. सरकार द्वारा संचालित इन संस्थानों ने साफ़ कहा है कि ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा. दूर-दूर तक ऐसी कोई आशंका दिखाई नहीं देती. तो बाबू भाई की कहानी तो सरकार ने यहीं ख़त्म कर दी. सितंबर में पत्र भेजा गया और खारिज कर दिया गया. अब क्रिसमस और नये साल का जश्न मनाइये. ऐसी कोई सुनामी नहीं आ रही है.

लेकिन ठहरिये. अभी कहानी ख़त्म कहाँ हुई है. अपने बाबू भाई के बारे में मैंने काफी खोजबीन की. पता चला वे कई साल से ऐसी भविष्यवाणी करते रहे हैं और उनमे कई सच हुई है. दिसंबर 2004 में आई सुनामी के बारे में उन्होंने अपने एक जर्नल में पहले ही आगाह कर दिया था. मंगल ग्रह पर पानी होने की भविष्यवाणी भी वे पहले ही कर चुके हैं. हालांकि इस बात को भी तुक्का बताया जा रहा है.

अब जरा एक नज़र नवंबर से दिसंबर के बीच बदले मौसम के मिज़ाज़ पर डाल लेते हैं.

3 नवंबर – पाकिस्तान में भूकंप से 8 की मौत,
3 नवंबर- जापान में 5.1 तीव्रता का भूकंप
8 नवंबर- त्रिपुरा, बांग्लादेश में 4.8 तीव्रता का भूकंप
8 नवंबर- ईरान-इराक बॉर्डर पर 7.3 तीव्रता का भूकंप, 135 लोगों की मौत
15 नवंबर- दक्षिण कोरिया में 5.4 तीव्रता का दूसरा सबसे शक्तिशाली भूकंप
18 नवंबर- तिब्बत में 6.9 तीव्रता का भूकंप , गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे
6 दिसंबर – देहरादून में भूकंप के झटकों से दहशत में आए लोग, घर छोड़कर बाहर निकल आए
6 दिसंबर – दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में भूकंप के झटके, उत्तराखंड में था केंद्र
7 दिसंबर – जम्मू कश्मीर में 5.4 तीव्रता का भूकंप
8 दिसंबर – पूर्वोत्तर नेपाल में 5.2 तीव्रता का भूकंप
11 दिसंबर – पांच दिनों में दूसरी बार भूकंप से हिला जम्मू-कश्मीर, रिक्‍टर स्‍केल पर 4.5

तो देखा आपने 3 नवंबर से देश और आसपास लगातार भूकंप का सिलसिला जारी है. एक व्यक्ति जिसकी भविष्यवाणियां पूर्व में सच साबित हुई हो, उसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. बजाय उसका उपहास उड़ाने के ये देखना होगा कि भूकंपो की एक चेन क्यों बन गई है. सिलसिलेवार भूकंप किसी बड़े भूकंप आने की ओर भी संकेत देते हैं. जिसका उपहास उड़ाया गया, वह ज्यादा सटीक क्यों सिद्ध हो रहा, ये विचारणीय है. भूकंप का अगला वार कहाँ और कितना घातक होगा, कोई बता नहीं सकता. इस बारे में सरकार को संज्ञान लेना चाहिए. अभी हाल ही में तमिलनाडु और केरल में चक्रवाती तूफ़ान ओखी के गुज़रने से करोड़ों का नुकसान हुआ है. मौसम तेज़ी से खराब हो रहा इसमें कोई संदेह नहीं है.

मैंने लेख की शुरुआत में ‘फल्कानेली’ का उल्लेख किया था. उसका कोई लालच नहीं था. वह लोक कल्याण की भावना से ये सब कर रहा था. वैसे ही बाबू भाई का भी कोई लालच मुझे इस प्रकरण में दिखाई नहीं दे रहा. वे किसी संभावित आपदा के बारे में संकेत देना चाह रहे हैं. यदि ये चेतना किसी विलक्षण माध्यम से उन तक आई है तो हमें ये समझ लेना चाहिए कि ‘फल्कानेली’ की तरह कोई और भी हमारी कुशलता चाहता है.

इस लेख का उद्देश्य भयभीत करना नहीं बल्कि जागरूक करना है. तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले मित्र सतर्क रहे. 31 दिसंबर सकुशल निकल जाता है तो इससे बढ़कर सुकून की बात और क्या होगी. ‘एक भविष्यवाणी ही है’ ऐसा सोचकर इसे नज़रअंदाज मत कीजिये. मौसम का हाल आपको पिछले पैरा में बता ही चुका हूँ. नए साल का जश्न कम से कम समुद्र किनारे मनाने से बचें. यदि वैज्ञानिक की भविष्यवाणी गलत साबित हो जाती है तो इससे बढ़कर ख़ुशी की बात क्या होगी लेकिन यदि उसकी कही बात में थोड़ी भी सच्चाई है तो चिंतित होने की आवश्यकता है.

फोटो- पिछले बीस दिन में आए भूकम्पों की जानकारी

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