तुमसे मिलने के बाद

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नायिका

तुमसे मिली
तो सब चीज़ों का आकार खो गया
सब एक सी ख़ूबसूरत लगने लगी

ख़ूबसूरती का जैसे एक नया संसार उत्पन्न हुआ
मैं भी ख़ूबसूरत हो गई
सात रंग
सात चक्रों के
इंद्रधनुष के
पानी के नीले में भी सात रंग
पेड़ों के हरे में भी सात रंग
पक्षी की उड़ान में भी सात रंग

सूर्य को हाथ जोड़ नमस्कार किया
आँखें बंद कर
तो लालम लाल हो गई मैं
ऊर्जा ही ऊर्जा
शुक्रिया हो गई मैं

तुमसे मिली
तो हर शय मेरे गले मिलने लगी
कोई टकराने भी आता तो गले लगा लेता
मैं क़बूलने लगी सब को
किसी के ग़ुस्से में उसका दर्द देखने लगी
किसी के दर्द में उसका अधूरापन
उसकी चाहत, उसके अंदर की मजबूरी
तुमसे मिलने के बाद ग़ुस्सा कहाँ आता है किसी पे
पत्थर में ज़िंदगी तुमसे मिलने के बाद ही देखी मैंने

तुमसे मिलने के बाद
सब हल्का हल्का हो गया है
कोई बोझ नहीं
चिड़ियाँ सुप्रभात कहने आती हैं
शाम ढले घरों को लौटते सारस
एक लंबी सी C बनाती रेखा में
सुरमई आकाश के गले में सफ़ेद मोतियों की माला के जैसे
राग दरबारी अलापते हुए
शुभ रात्रि कहते हुए नज़र आते हैं

तारे बंद खिड़की में से भी झाँक
मुझे लोरियाँ सुनाते हैं
मेरे बालों में उँगलियाँ घुमाते हैं

तुमसे मिलने के बाद
न कोई खोज
न अभिलाषा
न रास्ता न मंज़िल
न कुछ पाना न खोना
न पापम न पुण्यम
सिर्फ़ सत्यम शिवम् सुंदरम

अस्तित्व विहीन अस्तित्व
दूर दूर तक
अनन्त
यहाँ मेरे कमरे में बंद एक बिंदु भी
बिंदु, जो जब चाहे मुझ में सिमट जाए
जब चाहे शिवम् हो जाए
कैलाश हो जाए
गंगा हो जाए
अर्ध चाँद हो जाए

तुमसे मिलने के बाद कोई प्रतीक्षा नहीं
मृत्यु की भी नहीं
मोक्ष की भी नहीं

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