गुजरात में आखिर क्यों 150 सीट जीतना चाहती है भाजपा?

क्या आपको पता है कि भाजपा ने गुजरात विधानसभा चुनाव में 150+ का नारा क्यों दिया? आखिर क्यों भाजपा 150 सीट जीतना चाहती है? 150 की संख्या का क्या महत्व है?

इस बात का महत्व ये है कि इतनी सीट किसी पार्टी ने कभी नहीं जीती. पिछला रिकॉर्ड कांग्रेस का है जितने 1985 के चुनाव में 149 सीट जीती थी.

अब सवाल ये उठता है कि कांग्रेस ने उस चुनाव में उतनी सीट क्यों जीती थी. इसका उत्तर है कि उस चुनाव में कांग्रेस ने KHAM अलायन्स बनाया था, KHAM यानि क्षत्रिय (कांग्रेस के मुख्यमंत्री खुद क्षत्रिय थे), हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम (Kshatriya – Harijan – Adiwasi – Muslim).

यानि हिन्दू समाज को जातियों में बांटो, और कुछ जातियों और मुस्लिम का साथ लेकर सत्ता प्राप्त कर लो. जातीय जहर फ़ैलाने के लिए गुजरात की मुख्य जाति पटेल को खूब गालियाँ भी दी गयी, (वैसे ही जैसे कांशीराम ने 1993 में यूपी विधान सभा चुनाव में ब्राह्मणों को दी थी).

फार्मूला बेहद सफल रहा और कांग्रेस को रिकॉर्ड सफलता मिली, लेकिन फिर 1990 में हिंदुत्व के उफान में कांग्रेस 149 से सीधे 33 पर गई, और तब से सत्ता से बाहर है.

लेकिन कांग्रेस सुधरी नहीं, आज फिर कांग्रेस हिन्दू समाज को जाति के आधार पर बांट कर चुनाव जीतना चाहती है. और इस के लिए हार्दिक पटेल जैसे टुच्चे आदमी के पैरों पर गिरी है.

हार्दिक पाटीदारों के, अल्पेश ठाकुरों के और जिग्नेश दलितों के वोट ले आये, मुस्लिम तो हमारे बंधुआ वोटर हैं ही, बस चुनाव जीत जाएं.

इसके लिए राहुल गांधी को दोष देना बेकार है. ये डिवाइड एंड रूल कांग्रेस के डीएनए में है. कांग्रेस ने ब्रिटिश से सीखा है.

राहुल की दादी इंदिरा और परनाना नेहरु ने भी यही किया था. नेहरु और इंदिरा ने हरिजन–मुस्लिम–ब्राह्मण का जोड़ बना कर 30 वर्ष निष्कंटक राज किया था.

बाद में कांग्रेस के इसी फ़ॉर्मूले को बाकी तथाकथित सेक्युलर पार्टियों ने भी अपनाया, लेकिन इसका आविष्कार कांग्रेस ने ही किया था.

इसी लिए कांग्रेस को हिन्दू शब्द से नफरत है, क्योंकि ये सभी हिन्दुओं को एक में जोड़ता है, उन्हें जातियों में बांटता नहीं, और कांग्रेस हमेशा हिन्दू से नफरत करती रहेगी क्योंकि ये उसके अस्तित्व का सवाल है.

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