मसीही धर्म शिक्षा भाग – 9 : ‘बाईबल’ को जानिये

अब तक जिन सुसमाचारों की चर्चा की गई वो ‘नया-नियम’ के एक अंश मात्र हैं क्योंकि इसकी 27 किताबों में इन सुसमाचारों की संख्या बस ये चार ही थी यानि 23 के करीब और किताबें भी हैं जिसपर चर्चा जरूरी है.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 1 : ‘बाईबल’ को जानिये]

हैरान करने वाली बात ये है कि सुसमाचारों में ईसा के जन्म, उनकी वंशावली, उनके उपदेश और सूलीकरण वगैरह की चर्चा है पर ये सुसमाचार इन 23 किताबों में से कईयों की रचना के काफी बाद लिखे गये.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 2 : ‘बाईबल’ को जानिये]

बाकी बची 23 किताबों में कई किताबों की रचना इन सुसमाचारों से काफी पहले ही की जा चुकी थी.

कहा जाता है कि पौलुस ने रोमन साम्राज्य में जगह-जगह बिखर चुके मसीहियों को निर्देशित करने के लिये कुछ पत्र लिखे थे उन्हें ही बाद में नया-नियम का अंश बना दिया गया.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग-3: ‘बाईबल’ को जानिये]

इसका अर्थ ये है कि नया-नियम के प्रत्येक शब्द ईश्वरीय है ये दावा स्वतः खारिज़ हो जाता है और इसका अर्थ ये भी है कि मसीही मत का प्रचार पहले शुरू हुआ और फिर सुविधानुसार ईसा का जीवन-वृत रचा गया.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 4 : ‘बाईबल’ को जानिये]

चार सुसमाचारों के अलावा जिन 23 किताबों को नये-नियम में जगह दी गई है वो भी बिना विवाद के संभव नहीं हुआ.

कहते हैं कि लगभग तीन सौ वर्षों तक चर्चों में ईसाई धर्मगुरुओं के बीच इस बात पर बहस होती रही कि नया-नियम में बाकी किस-किस किताबों को शामिल किया जाये.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 5 : ‘बाईबल’ को जानिये]

‘नीसिया धर्मसभा’ में चार सुसमाचारों पर तो जबरन सहमति बना दी गई पर बाकी की किताबों पर झगड़ा फिर भी कायम रहा.

ये झगड़ा तब तक चलता रहा जब तक 367 ईसवी में सिकंदरिया के मुख्य बिशप, जिनका नाम ‘अथनेसियुस’ था, ने बाकी की तेईस पुस्तकों की सूची को जबरन मान्यता नहीं दे दी. तब से नया-नियम में स्वीकृत वही सत्ताईस किताबें चल रही है.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 6 : ‘बाईबल’ को जानिये]

नया-नियम के आरंभिक तीन सुसमाचार ईसा के जन्म, जीवन, उपदेश और उनके सूलीकरण को बताता है, चौथे अध्याय में ईसाई धर्म के सिद्धांत निरूपित किये गये.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 7 : ‘बाईबल’ को जानिये]

उसके बाद के अध्याय का नाम है ‘बुक ऑफ़ एक्ट्स’. इसमें ईसाई मत के आरंभिक दौर में हुये प्रचार और विस्तार का वर्णन है.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 8 : ‘बाईबल’ को जानिये]

बीच के पत्रों में पौलुस द्वारा मसीही धर्म-प्रचारकों को निर्देशित करने से सम्बंधित है और अंतिम किताब ‘प्रकाशित वाक्य’ में अजीब-अजीब भविष्यवाणी और बेसिर-पैर की बातें हैं जो कल्पना से परे तथ्यों से समाविष्ट है.

यहाँ ये जोड़ना आवश्यक है कि बाकी की तरह इस किताब के लेखक का नाम भी ज्ञात नहीं है.

जारी…

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