स्यूडो सेक्यूलर्स की नई साज़िश : बौद्ध स्तूप ढहा कर बने मंदिर

बामियान को किसने तोड़ा? जवाब के लिये गूगल करने की जरुरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि बामियान की बुद्ध प्रतिमाओं को टूटते पूरी दुनिया ने टीवी पर देखा था.

लेकिन आजकल कुछ नवबौद्ध और स्यूडो सेक्यूलर एक नया चोंचला लेकर आये हैं कि भारत के हिन्दू मंदिरों को बौद्ध स्तूपों के ध्वंसावशेष पर बनाया गया है.

अयोध्या में अदालती आदेश पर हुई पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की खुदाई की रिपोर्ट से लेकर देश भर में पाये जाने वाले बौद्ध विहारों और स्तूपों की श्रृंखला इस बात की गवाही है कि मंदिर बनाने के लिये स्तूप नहीं तोड़े गये.

समय काल के अनुसार मंदिरों और स्तूपों की निर्माण शैली एक दूसरे से ज़रुर प्रभावित होती रही है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मंदिरों के लिये स्तूपों को ध्वंस कर दिया गया हो.

बाकी अयोध्या से लेकर काशी विश्वनाथ और सोमनाथ तक के मंदिरों का पूरा इतिहास बताता है कि इन्हें तोड़कर किस प्रकार से मस्जिदों का निर्माण किया गया.

फिर भी अगर किसी को इतिहास पर शक हो तो बामियान की प्रतिमाओं को बारुद से उड़ाने के वीडियो उन्हें यू-ट्यूब पर भी मिल जायेंगे.

बहरहाल इसे सिर्फ इत्तेफाक नहीं कहा जा सकता कि बौद्ध स्तूपों के तोड़े जाने की बात तब एकाएक जोर पकड़ने लगे जब राम मंदिर का मुद्दा आम चर्चा का विषय बना हुआ हो.

यह एक पूरी सोची-समझी साज़िश है जिसके तहत आक्रांताओं द्वारा मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने के आरोप को सीधे तौर पर हिन्दूओं के सिर पर ही फोड़ने की तैयारी है.

चूंकि मस्जिद और मंदिर की निर्माण शैली में बुनियादी तौर पर बहुत बड़ी असमानता होती है. जबकि बौद्ध विहार या स्तूप और मंदिरों की निर्माण शैली बहुत मामलों में समान ही नहीं बल्कि एक दूसरे से प्रेरित भी रही है.

लिहाजा मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने के आरोप को छुपाने के लिये स्तूप तोड़कर मंदिर बनाने की बात को हवा दी जा रही है. बाकी तो इसे कौन लोग हवा दे रहे हैं इसे समझने के लिये करमचंद जासूस बनने की भी आवश्यकता नहीं.

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