वैज्ञानिकों की चेतावनी : श्रृंगार की चमक ‘GLITTER’ के उत्पादन पर लगे रोक

समुद्री विज्ञान से जुड़े दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने पुरजोर मांग की है कि दुनिया के सब देशों को, महिलाओं की फैशन की दुनिया में श्रृंगार के समय काम आने बाली ग्लिटर GLITTER चमक का उत्पादन तत्काल बन्द कर देना चाहिये.

यह ग्लिटर अल्युमीनियम और सूक्ष्म प्लास्टिक से बनाये जाते हैं. इनके बनाने में जो रसायन उपयोग में लाये जाते हैं बह बेहद खतरनाक हैं उनसे केन्सर और मस्तिष्क जनिक neurological aliment विकृतियां पैदा होती हैं.

श्रृंगार में जिस ‘ग्लिटर’ को चेहरे पर लगाया जाता है, वह चेहरा धोने के बाद नाली में बहकर नदी नालों होती हुई समुद्रों में चली जाती है. समुद्री जीव जन्तु और मछलियां जब आहार करती हैं तो यह ग्लिटर उन जन्तुओं और मछलियों के पेट में पहुंचती है. फिर यही मछली मनुष्य का आहार बनती है तो ‘ग्लिटर’ आदमी के पेट में पहुंचकर प्राणघातक रसायन छोडता है. इससे हारमोन्स का बेलेन्स बिगड़ जाता है. फलस्वरूप केन्सर और मानसिक विकृतियों की बीमारी जन्म लेती हैं.

यद्यपि दुनिया के कई देशों ने प्लास्टिक से बनी माइक्रोबीडस के उत्पादन पर बन्दिश लगा दी है. क्योंकि एक अनुमान के अनुसार दुनिया के समुद्रों मे इस समय “पांच खरब टन” प्लास्टिक का कचरा समुद्रों में तैर रहा है.

अभी तक विकसित देशों ने माइक्रो प्लास्टिक जो पांच मिलीमीटर से कम साईज के हैं, उन पर समुद्री पर्यावरण को प्रदूषित करने का जिम्मेदार मानकर उस पर बन्दिश लगा रखी है. पर ग्लिटर उत्पादकों को शामिल नहीं किया गया है.

मेस्सी वि०वि० के प्रख्यात वैज्ञानिक डा० त्रिसिया फेर्रेली ने लम्बे अध्ययन के बाद यह अपील की है कि ग्लिटर के उत्पादन पर तुरन्त रोक लगा देना चाहिये.

इंग्लैण्ड के दूसरे प्रसिद्ध वैज्ञानिक डा० रिचर्ड थामसन ने पाया है कि लन्दन के बाजारों और स्टोरों में जो मछलियां बेची जा रहीं हैं उनके मांस में ग्लिटर की मात्रा मौजूद है. डाक्टर थामसन के अनुसार ग्लिटर में अल्युमीनियम के अलावा चमक की कोटिंग करने के लिए जिस प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है उसे “PET” कहा जाता है. यही पेट मछली खाने के बाद आदमी के पेट में विघटित होकर केन्सर जनित रसायन पैदा करती है. यही कारण है कि माइक्रोबीडस की श्रेणी के पदार्थ पर बन्दिश लगाने के बाद अब “ग्लिटर” के उत्पादन पर रोक लगा देना चाहिये.

“All that glitters is not gold,” including actual glitter. But that’s not because the annoying shiny stuff is impossible to ever clean up, it poses a serious environmental hazard to our oceans and sea life. That’s why scientists are calling for a global ban of it, especially in cosmetic products.

Environmental anthropologist Dr. Trisia Farrelly told The Independent News Paper that glitter can cause harm to our oceans because it’s a type of microplastic, which are especially destructive as they accumulate in the world’s bodies of water. The National Ocean Service says “plastic is the most prevalent type of marine debris found in our ocean and Great Lakes,” and defines microplastics as any plastics that “are less than five millimeters in length.” That why it’s easier for them to make their way through drains, ultimately resulting in their consumption by fish and other sea animals. Most glitter is made of aluminum and a type of plastic that releases a harmful chemical to both fish (and therefore humans who might eat those fish that microplastics aggregate in) when it breaks down.

Environmental hazard is why microbeads, another type of microplastic, were banned from cosmetics and personal care products in the U.S. in 2015, and why a similar law will go into effect in the UK next year. But scientists say glitter should be the next microplastic to go, because their prevalence in numerous items, including many cosmetics that end up being washed away, are potentially just as bad.

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