हद है मूर्खता की, या धूर्तता की…

गंगाराम यानी गंगू एक ऐसा प्रभावी व्यक्तित्व था जो खुद तो कभी कुछ कर नहीं सकता था पर दूसरों के काम मे हमेशा कमी निकालता रहता था.

गंगू के पड़ोसी ने घर बनवाया तो गंगू बोला, “अरे ये भी कोई घर है. मैं बनवाता तो ऐसा बनवाता की सब देखते रह जाते”.

लोगों ने कहा, “अरे गंगू उस से जैसा बनवाते बना बनवा लिया. तू उंस से अच्छा बना कर दिखा फिर बात करना”.

गंगू बोला, “देख लेना इस से 1000 गुना बेहतर बनाऊंगा”. लोगों ने पूछा, “अबे कब बनाएगा”? तो गंगू बोला, “पहले शादी तो हो जाये, जब नई बहू आएगी तब नया घर भी बनेगा”.

गांव में जब भी किसी की शादी होती तब भी गंगू बाज़ नहीं आता और कहता, “अरे ये भी कोई शादी है? मेरी शादी होगी तब देखना क्या आलीशान शादी होगी. अरे ये दुल्हन तो सुन्दर नहीं है मेरी शादी होगी तब देखना”.

ना खुद शादी करे, न दूसरों को करने दे, बाकी के लड़कों को भी भड़काता रहता था.

लोग गंगू से बहुत परेशान थे, सो सबने मिल कर गंगू के लिए लड़की देखने का फैसला किया. अब हर हफ्ते कोई ना कोई रिश्ता आ जाता और गंगू अपनी आदत अनुसार उसमें कोई ना कोई कमी निकाल ही देता.

आखिर एक जगह आ कर गंगू फंस गया, घरवालों को लड़की पसंद आ गयी, और रिश्ता फाइनल हो गया.

गंगू की अब दम निकलने लगी, सारे पैंतरे फैल हो गए. आखिर में थक हार कर गंगू बोला कि “शादी को टाल दो क्योंकि मेरी शादी से टेंट वाले, बैंड वाले और हलवाई को फायदा हो जाएगा”.

कांग्रेस की हालत भी गंगू जैसी है, 70 साल में राम मंदिर के लिए कुछ कर नहीं पाए, भाजपा को कोसते रहे कि 20 साल से भाजपा सिर्फ चिल्ला रही है मूर्ख बना रही है, आज तक राम मंदिर नही बना.

और अब जब फैसला आने की बारी आयी है तब कहते हैं कि “मीलॉर्ड 2019 के बाद की तारीख लगाई जाए, क्योंकि फैसले से भाजपा को फायदा हो जाएगा”.

हद है मूर्खता की… या धूर्तता की.

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