हैरान नहीं चिंतित करता है कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव

राहुल बाबा की ताजपोशी देख कर हैरानी नहीं हो रही, बल्कि इस घटनाक्रम से चिंता हो रही है.

हैरानी इसलिए नहीं हो रही क्योंकि हिन्दुस्तान की हकीकत जानता हूँ, मगर चिंता इसलिए हो रही हैं कि ये हकीकत समझ नहीं पा रहा हूँ.

हैरान इसलिए नहीं हूँ क्योंकि जानता हूँ कि हिंदुस्तान की रगों में गुलामी के रोगाणु बहते हैं, चिंतित इसलिए हूँ कि आजादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी हम इस रोग का इलाज नहीं कर पाए.

हैरान इस बात से बिलकुल नहीं हूँ कि एक परिवार विशेष की अगली पीढ़ी को कमान सौंपी गई, चिंतित इसलिए हूँ कि इस परिवार की हकीकत जानते हुए भी यह कितनी आसानी से किया जा रहा है.

हैरानी नहीं हो रही जब देखता हूँ समाचार-पत्रों, मीडिया आदि आदि क्षेत्रों में इसे लेकर कितनी उत्सुकता है, कितनी चर्चा की जा रही है यह मुख्य खबर है प्राइम टाइम न्यूज़, चिंतित इसलिए हूँ कि प्रजातंत्र का चौथा खंबा कितना बिकाऊ और कमजोर है.

हैरानी नहीं होती जब देखता हूँ कि देश का बौद्धिक वर्ग इस घटना को लेकर निष्क्रिय है अर्थात उसका इस सत्ता हस्तानांतरण को समर्थन है, हाँ चिंता जरूर होती है कि देश का बौद्धिक वर्ग कितना दरबारी है.

हैरान तब मैं नहीं होता जब यही बौद्धिक वर्ग मात्र तीन साल में मोदी का हर बात पर अंधा विरोध करता है, चिंतित तब होता हूँ जब इस बौद्धिक वर्ग को इस परिवार का अंध समर्थन करते हुए देखता हूँ.

हैरान इसलिए नहीं हूँ कि जानता हूँ कि इस पार्टी में सभी इस परिवार के स्वामिभक्त हैं, चिंतित इसलिए हूँ कि ये सभी भारतीय हैं और इनमें से एक भी स्वाभिमानी अब तक नहीं बन पाया.

हैरान इसलिए नहीं हूँ कि वंशवाद इस पार्टी का इतिहास है, मगर चिंता इसलिए करता हूँ कि इसी पार्टी ने देश पर लम्बे समय तक शासन किया.

हैरान यह देख कर बिलकुल नहीं होता जब पाता हूँ बड़े बड़े चेहरे, पढ़े लिखे विद्वान, एक से एक सक्षम लोग कैसे एक अक्षम व्यक्ति के समर्थन में आ गए, चिंता यह सोच कर होती है कि इन देशी वरिष्ठ जनों को अपनी विद्वता, उम्र और काबिलियत को लेकर अब तक अभिमान क्यों नहीं जागा.

हैरान इसलिए भी नहीं हूँ कि मैं देश का इतिहास जानता हूँ जहां मुठ्ठीभर मुगलों और अंग्रेजों ने इतने विशाल देश पर कैसे शासन किया, हममें से ही कुछ स्वार्थी, लोभी, धूर्त और मक्कार थे जो आक्रमणकारी के साथ मिलकर अपनों पर ही धोखे से शासन करते रहे, अपनों ने ही अपनों का शोषण किया, चिंतित इसलिए हूँ कि अब भी देश में एक बड़ा वर्ग है जो सिर्फ सत्ता के लालच में इस परिवार के साथ चींटी की तरह चिपका हुआ है.

हैरना इसलिए नहीं हूँ कि जानता हूँ कि ये सब सत्ता के लोभी एक जगह इकठ्ठा हैं, चिंतित यह सोच सोच कर हूँ कि देश के पास अब भी यही विपक्ष बचा है.

हैरानी नहीं होगी अगर कोई एक-दो राज्य में ये लोग भविष्य में कोई एक चुनाव जीत भी जाएँ तो, चिंता इसलिए होगी कि देश अब तक एक सशक्त सार्थक विपक्ष देने में असफल है.

हैरान बिलकुल नहीं हूँ क्योंकि सत्ता के खेल को अच्छी तरह जानता-समझता हूँ, चिंतित इसलिए हूँ क्योंकि एक बार फिर प्रजातंत्र को विफल होता देख रहा हूँ.

हैरान नहीं होता हूँ जब पाता हूँ कि ये सब लोग कैसे अब भी सफलतापूर्वक जाति में बांटने का खेल खेल लेते हैं, चिंता इसलिए होती है क्योंकि हिन्दू इस वक्त अपनी अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहा है.

हैरानी नहीं होती जब विदेशी शासन के बारे में पढता सुनता हूँ, चिंता यह देख कर होती है कि देश में अब भी किसी ना किसी तरह विदेशियों का दखल है.

हैरानी तब नहीं होती जब उपरोक्त सभी कटु सच को जान पाता हूँ, चिंता तब होती है जब देश को इन सब बातों को जान कर भी अनजान बने देखता हूँ.

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