लालू के साथ जाएंगे शरद या जबलपुर! संसद सदस्यता ख़त्म होने पर JDU का तंज़

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नई दिल्ली. बिहार में भाजपा से गठबंधन के नितीश कुमार के फैसले के खिलाफ जेडीयू पार्टी से बगावत करने वाले नेता शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा से सदस्यता समाप्त कर दी गई है.

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय के पास शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने दोनों नेताओं की सदस्यता समाप्त करने का फैसला लिया.

राज्यसभा सचिवालय के अनुसार संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2 (1) (a) के अनुसार दोनों नेताओं की सदस्यता रद्द की गई. राज्यसभा में पार्टी के नेता आर सी पी सिंह जी ने इसकी पुष्टि की. शरद यादव का कार्यकाल अभी 5 साल बाकी था जबकि अली अनवर का 6 महीने बाकी है.

शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म किये जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए जदयू नेता अजय आलोक ने ट्वीट कर लिखा है, ‘अब शरद जी क्या यादवों के स्वाभिमान के नाम पे लालू जी आपको राज्य सभा भेजेंगे या जबलपुर, ये देखेंगे हम लोग!! विनाश काल विपरीत बुद्धि‘.

उल्लेखनीय है कि शरद यादव का राजनीतिक करियर मध्यप्रदेश के जबलपुर से ही परवान चढ़ा था. वे यहाँ से ही पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे. इसके बाद राष्ट्रीय राजनीति में जगह बनाने की महत्वाकांक्षा के चलते उन्होंने जबलपुर को ठुकरा कर बिहार को अपनी राजनीतिक शरणस्थली बनाया था.

जेडीयू ने अगस्त में शरद यादव को राज्यसभा में जेडीयू के नेता के पद से हटा दिया गया था. जेडीयू के महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद से ही शरद यादव बागी तेवर अपनाए हुए थे.

शरद जेडीयू नेताओं के मना करने के बाद भी पटना में हुई लालू की ‘बीजेपी भगाओ, देश बचाओ’ रैली में शामिल हुए थे और मंच से नीतीश कुमार पर हमला बोला था. बता दें कि शरद को राज्यसभा में जेडीयू के नेता पद से हटाने के बाद आरसीपी सिंह को राज्यसभा में जेडीयू का नेता बनाया गया था.

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