इसलिए मैं अब तुमसे कभी नहीं मिलूंगी!

तुम मेरे एकांत का प्रेम हो
शांत, निश्छल, निर्मल
अपने आप में पूर्ण…

कभी तुमसे मिलना हुआ
तो मैं तुम्हें उस तरह से कभी प्रेम न कर सकूंगी
जैसे एकांत में करती हूँ

उस निकटता को कोई परिभाषित नहीं कर सकता
जो मैं तुम्हारे साथ अनुभव करती हूँ
जहाँ किसी शब्द, किसी स्पर्श के लिए कोई स्थान नहीं

जैसे ही शब्द बीच में आएगा
हम दो हो जाएंगे
जैसे ही स्पर्श बीच में आएगा
हम दो हो जाएंगे

मैं उघाड़ना नहीं चाहती अपने एकाकी प्रेम को
उसकी सुन्दरता, उसकी पवित्रता को,
तुम्हारे सामने भी नहीं

तुम्हारा मेरे साथ होना भी
मेरी पूजा में बाधक होगा…

इसलिए मैं तुमसे कभी नहीं मिलूंगी…

– माँ जीवन शैफाली द्वारा सुश्री राजेश जोशी की अंग्रेज़ी कविता का हिन्दी अनुवाद

I love you the most in my aloneness
It is so peaceful and serene
And so fulfilling

I know I will never be able to love you
If we ever happen to meet
The way I love you in my aloneness

Nothing can translate the closeness
That I feel in my aloneness
No words, no touch
Words will come between us
Touch will also come between us
We will be two
That’s why I never want to meet you
I don’t want to disrobe my aloneness
Of its beauty, of its divinity

Your being with me will disturb my worship…….

– Rajesh Joshi

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